श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन में मदन मोहन पांडेय, महेश भागचंदका और डॉ. निर्मला यादव को नया न्यासी बनाया गया है। इनमें संघ और विहिप से जुड़े लोगों की पृष्ठभूमि प्रमुख है, जबकि निर्मला यादव पहली महिला न्यासी बनी हैं।
अयोध्या: श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन के बाद इसके नए स्वरूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़े संगठनों की पृष्ठभूमि वाले चेहरों की मौजूदगी बढ़ी है। बुधवार को हुई बैठक में मदन मोहन पांडेय, महेश भागचंदका और डॉ. निर्मला यादव को नया न्यासी बनाया गया। डॉ. निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला न्यासी बनी हैं।
तीन नए न्यासियों से बदला ट्रस्ट का स्वरूप
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में तीन नए न्यासियों की नियुक्ति की गई। अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय, दिल्ली के कारोबारी एवं समाजसेवी महेश भागचंदका और शिकोहाबाद की शिक्षाविद् डॉ. निर्मला यादव को ट्रस्ट में नई जिम्मेदारी दी गई है। ये नियुक्तियां ट्रस्ट में खाली हुए तीन पदों को भरने के लिए की गई हैं।
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नए सदस्यों की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो मदन मोहन पांडेय का राम जन्मभूमि मामले से लंबे समय तक कानूनी जुड़ाव रहा है। उन्होंने रामलला की ओर से अदालत में पैरवी करने वाली टीम में भूमिका निभाई थी। वह उत्तर प्रदेश के अपर महाधिवक्ता की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। राम जन्मभूमि विवाद से जुड़े लंबे कानूनी संघर्ष के कारण ट्रस्ट में उनका शामिल होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महेश भागचंदका का राम मंदिर आंदोलन से पुराना जुड़ाव
दिल्ली के महेश भागचंदका का राम मंदिर आंदोलन और उससे जुड़ी धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों से लंबे समय से संबंध रहा है। वह विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल के रिश्तेदार बताए जाते हैं। भागचंदका राम मंदिर के भूमि पूजन और प्राण प्रतिष्ठा से जुड़े आयोजनों में भी शामिल रहे हैं। वह विश्व हिंदू आर्थिक मंच की गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं।
भागचंदका की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब ट्रस्ट में प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर बदलाव किए जा रहे हैं। नए स्वरूप में उन्हें ट्रस्टी के साथ कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई है। ट्रस्ट के पुनर्गठन को मंदिर से जुड़े कामकाज के प्रशासन और प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
डॉ. निर्मला यादव बनीं पहली महिला न्यासी
शिकोहाबाद की डॉ. निर्मला यादव ट्रस्ट में शामिल होने वाली पहली महिला हैं। वह शिक्षा जगत से लंबे समय तक जुड़ी रही हैं और राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से भी उनका संबंध रहा है। उनकी नियुक्ति को ट्रस्ट के इतिहास में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इससे पहली बार किसी महिला को न्यासी के रूप में जगह मिली है।
डॉ. यादव की शैक्षणिक पृष्ठभूमि हिंदी और संस्कृत से जुड़ी रही है। उन्होंने महाविद्यालय में प्राचार्या के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। उनके परिवार का भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव रहा है। इस वजह से उनकी नियुक्ति को शिक्षा, संगठनात्मक अनुभव और धार्मिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के मेल के रूप में देखा जा रहा है।
देवरिया से जुड़े दो अहम पद
राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक ढांचे में देवरिया जिले की मौजूदगी भी उल्लेखनीय रही है। ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्र और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र दोनों देवरिया जिले से हैं। दोनों ने मंदिर से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक और निर्माण संबंधी दायित्व संभाले हैं।
हालांकि, इन नियुक्तियों के संदर्भ में उनके प्रशासनिक, सुरक्षा, प्रबंधन और संचालन संबंधी अनुभव को भी महत्वपूर्ण आधार माना गया है। ट्रस्ट के पुनर्गठन के साथ नए पदाधिकारियों और न्यासियों की जिम्मेदारियों का दायरा मंदिर के प्रशासन और आगे के संचालन के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।









