भारतीय रेलवे 40,000 स्मार्ट सेंसर को C-DOT Common Service Platform से जोड़ेगा। AI और मशीन लर्निंग सेंसर डेटा का विश्लेषण कर तकनीकी खराबियों की पहचान करेंगे, जिससे समय रहते अलर्ट जारी कर ट्रेन सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
प्रयागराज: भारतीय रेलवे ने IoT परियोजनाओं के लिए स्वदेशी C-DOT Common Service Platform को मंजूरी दी है। इसके तहत अलग-अलग कंपनियों के 40,000 स्मार्ट सेंसर एक केंद्रीय सिस्टम से जोड़े जाएंगे। ट्रैक, पहियों, इंजन, कोच, ओवरहेड तारों और सिग्नल से मिलने वाले डेटा का AI और मशीन लर्निंग के जरिए विश्लेषण किया जाएगा, ताकि संभावित तकनीकी गड़बड़ियों का समय रहते पता लगाया जा सके।
40 हजार स्मार्ट सेंसर एक केंद्रीय प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगे
भारतीय रेलवे अपने IoT नेटवर्क को एकीकृत करने के लिए C-DOT Common Service Platform यानी CCSP का इस्तेमाल करेगा। अब तक इंजन, कोच, पहियों, पटरियों, ओवरहेड बिजली तारों और सिग्नल जैसे अलग-अलग सिस्टम पर विभिन्न कंपनियों के सेंसर लगाए जाते थे। इन सेंसरों के लिए अलग-अलग सॉफ्टवेयर इस्तेमाल होने के कारण डेटा एक जगह उपलब्ध नहीं हो पाता था।

नई व्यवस्था के तहत देशभर में लगाए गए विभिन्न कंपनियों के करीब 40,000 स्मार्ट सेंसर एक केंद्रीय स्वदेशी प्लेटफॉर्म से जोड़े जाएंगे। इससे रेलवे को अलग-अलग उपकरणों से मिलने वाली सूचनाओं को एक ही सिस्टम पर देखने और उनका विश्लेषण करने में मदद मिलेगी।
AI और Machine Learning से पहले मिलेगी खराबी की जानकारी
नए सिस्टम में ट्रैक, पहियों, इंजन, एक्सल और सिग्नल से जुड़े सेंसर लगातार तकनीकी स्थिति की जानकारी भेजेंगे। अगर किसी पहिए का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ता है, पटरी में बारीक फ्रैक्चर दिखाई देता है, कोच के सस्पेंशन में असामान्य कंपन होता है या सिग्नल के रिले बॉक्स में तय वोल्टेज से बदलाव आता है, तो सेंसर यह जानकारी इंटरनेट गेटवे के जरिए केंद्रीय सर्वर तक भेजेंगे।
सर्वर पर मौजूद सिस्टम इस डेटा का विश्लेषण करेगा। इसमें Artificial Intelligence और Machine Learning तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। मशीन लर्निंग पुराने यात्रा रिकॉर्ड और सामान्य संचालन से जुड़े डेटा के आधार पर असामान्य पैटर्न की पहचान करेगी। इसका उद्देश्य किसी उपकरण के पूरी तरह खराब होने से पहले संभावित समस्या का संकेत हासिल करना है।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी पहिए में असामान्य कंपन दिखाई देता है, तो सिस्टम उपलब्ध डेटा के आधार पर यह पहचानने की कोशिश करेगा कि समस्या आगे चलकर गंभीर हो सकती है या नहीं। ऐसी स्थिति में कंट्रोल रूम, स्टेशन मास्टर और लोको पायलट को अलर्ट भेजा जा सकेगा।
समय रहते ट्रेन रोकने या गति नियंत्रित करने में मदद
अलर्ट मिलने के बाद रेलवे समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर सकेगा। जरूरत पड़ने पर ट्रेन को अगले स्टेशन पर रोका जा सकता है या उसकी गति नियंत्रित की जा सकती है। इसके बाद संबंधित उपकरण की जांच और मेंटेनेंस की जा सकेगी। इससे तकनीकी खराबी के कारण होने वाले जोखिम को कम करने और ट्रेनों के संचालन में व्यवधान घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
रेलवे बोर्ड के निदेशक/एमई (C&IS) भारत भूषण हरित के अनुसार, इस परियोजना के लिए 71.73 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हार्डवेयर, इलेक्ट्रिकल सुविधाओं और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था पांच वर्षों के लिए प्रस्तावित और स्वीकृत की गई है।
साइबर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परियोजना का मुख्य डेटा सेंटर दिल्ली में और बैकअप सेंटर सिकंदराबाद में बनाया जाएगा। परियोजना को उत्तर रेलवे और रेलवे की IT संस्था CRIS के जरिए लागू किया जा रहा है।
इससे उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल से लेकर लखनऊ रेल मंडल के फाफामऊ, प्रयाग और प्रयागराज संगम स्टेशन तक सुरक्षा निगरानी को मजबूत करने में मदद मिलेगी।










