इंदौर में 10 साल की सबसे कम बारिश, मानसून के दो महीने बाद भी जलाशयों में पानी की कमी

इंदौर में 10 साल की सबसे कम बारिश दर्ज हुई। जलाशयों का जलस्तर घटा है और कम वर्षा से पेयजल आपूर्ति व खरीफ फसलों पर असर दिख रहा है।

इंदौर में मानसून के दो महीने बाद केवल 15 इंच बारिश दर्ज हुई है, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे कम है। कम वर्षा से जलाशयों का जलस्तर घटा है और खरीफ फसलों के साथ पेयजल व्यवस्था पर भी असर पड़ने लगा है।

इंदौर: इंदौर बारिश इस बार सामान्य से काफी कम रही है। मानसून का आधा सीजन बीतने के बावजूद शहर में केवल 15 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई है। कम बारिश का असर जलाशयों, पेयजल आपूर्ति और खरीफ फसलों पर साफ दिखाई देने लगा है, जबकि मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों में बारिश बढ़ने की संभावना जताई है।

10 वर्षों में सबसे कम बारिश दर्ज

मानसून का आधा सीजन गुजरने के बावजूद इंदौर को अब भी अच्छी बारिश का इंतजार है। जून और जुलाई सहित दो महीनों में शहर में केवल लगभग 15 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जो पिछले दस वर्षों में इसी अवधि की सबसे कम बारिश मानी जा रही है।

इंदौर में 10 साल की सबसे कम बारिश, मानसून के दो महीने बाद भी जलाशयों में पानी की कमी

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई के पहले सप्ताह के बाद कोई भी मजबूत बारिश प्रणाली इंदौर पर प्रभाव नहीं डाल सकी। कई सक्रिय सिस्टम प्रदेश के अन्य हिस्सों की ओर मुड़ गए, जिससे शहर में अपेक्षित वर्षा नहीं हो पाई। शहर के अलग-अलग इलाकों में भी बारिश का वितरण समान नहीं रहा। एयरपोर्ट, राजबाड़ा और रीगल क्षेत्र में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा हुई, जबकि पूर्वी हिस्सों में बारिश लगभग 13 इंच तक सीमित रही।

जलाशयों का जलस्तर घटा, बढ़ी पेयजल की चिंता

कम बारिश का सीधा असर शहर के प्रमुख जलाशयों पर दिखाई दे रहा है। 34 फीट क्षमता वाला बड़ा बिलावली तालाब अभी अपनी कुल क्षमता का केवल लगभग 34 प्रतिशत ही भर पाया है, जबकि छोटा बिलावली तालाब पूरी तरह सूख चुका है।

शहर की पेयजल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत यशवंत सागर का जलस्तर भी घटकर लगभग 12 फीट रह गया है, जबकि इसकी क्षमता 19 फीट है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो जल आपूर्ति को लेकर प्रशासन की चिंता और बढ़ सकती है।

खेती पर भी दिखने लगा असर

बारिश की कमी का असर ग्रामीण क्षेत्रों में खरीफ फसलों पर भी पड़ने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त नमी नहीं मिलने से सोयाबीन, मक्का, धान और उड़द जैसी फसलों की बढ़वार प्रभावित हो रही है।

बताया जा रहा है कि जुलाई के बाद बने चार प्रमुख वर्षा तंत्र इंदौर के बजाय बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी की दिशा में सक्रिय रहे, जिससे जिले को अपेक्षित वर्षा नहीं मिल सकी।

प्रदेश में सामान्य से 19% कम बारिश, राहत की उम्मीद

पूरे मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 16.03 इंच वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 19.50 इंच होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अब तक लगभग 19 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। हालांकि देवास जैसे कुछ जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज हुई है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले तीन दिनों में प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से यदि वर्षा प्रणाली मजबूत रहती है तो आने वाले दिनों में इंदौर सहित कई जिलों में अच्छी बारिश हो सकती है। इससे जलाशयों के जलस्तर में सुधार और किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

Leave a comment