जंग के बीच ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान न्यूयॉर्क पहुंचे, आज UN में देंगे भाषण; आवाजाही पर अमेरिकी पाबंदियां

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान न्यूयॉर्क पहुंचे हैं। UNGA में आज भाषण देंगे। ईरानी प्रतिनिधिमंडल की आवाजाही पर अमेरिकी पाबंदियां हैं।

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच राष्ट्रपति मसूद पजशकियान न्यूयॉर्क पहुंच गए हैं। वह 23 सितंबर को UN महासभा को संबोधित करेंगे। ईरानी प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका आने की अनुमति मिली है, लेकिन न्यूयॉर्क में उसकी आवाजाही और कुछ खरीदारी पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।

न्यूयॉर्क: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंच गए हैं। पजशकियान 23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। उनके साथ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अन्य अधिकारी भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने ईरानी राष्ट्रपति और विदेश मंत्री को UNGA में शामिल होने के लिए अमेरिका आने की अनुमति दी है, लेकिन प्रतिनिधिमंडल की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच जंग के बीच न्यूयॉर्क दौरा

पजशकियान का न्यूयॉर्क दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष जारी है। संयुक्त राष्ट्र महासभा का मौजूदा सत्र वैश्विक कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ईरान-अमेरिका युद्ध के अलावा मध्य पूर्व में कई अन्य संकट भी चर्चा के केंद्र में हैं।

ईरानी राष्ट्रपति ने न्यूयॉर्क रवाना होने से पहले कहा था कि उनका प्रतिनिधिमंडल संयुक्त राष्ट्र में ईरानी जनता की स्थिति, उसके सामने मौजूद समस्याओं और संघर्ष से जुड़े मुद्दों को उठाएगा। विदेश मंत्री अराघची ने भी कहा है कि प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य ईरानी जनता के अधिकारों और हितों को सामने रखना है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल के न्यूयॉर्क पहुंचने की पुष्टि कई रिपोर्टों में हुई है। पजशकियान मंगलवार को तेहरान से रवाना हुए थे और बुधवार को महासभा को संबोधित करने वाले हैं।

पजशकियान के भाषण पर दुनिया की नजर

पजशकियान के UN भाषण में ईरान-अमेरिका संघर्ष और आगे की कूटनीति सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल रहने की संभावना है। ईरानी पक्ष पहले ही युद्ध, अमेरिकी सैन्य दबाव और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर अपना रुख स्पष्ट करता रहा है।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल संयुक्त राष्ट्र मंच का इस्तेमाल अपनी स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखने के लिए करना चाहता है। विदेश मंत्री अराघची ने संयुक्त राष्ट्र की संघर्ष रोकने की क्षमता पर भी सवाल उठाए हैं।

पजशकियान के भाषण में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि ईरान युद्ध समाप्त करने या बातचीत आगे बढ़ाने के लिए किन शर्तों को सामने रखता है।

होर्मुज स्ट्रेट पर क्या कहेगा ईरान?

पजशकियान के UN भाषण में होर्मुज स्ट्रेट भी प्रमुख मुद्दा हो सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और मौजूदा संघर्ष के दौरान यहां शिपिंग गतिविधियों में व्यवधान ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर असर डाला है।

ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि अमेरिका द्वारा सैन्य दबाव कम करने और ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाने की स्थिति में तेहरान एक सप्ताह के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को फिर खोलने के लिए तैयार है। यह प्रस्ताव मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है।

इसलिए पजशकियान के भाषण में होर्मुज को लेकर कोई नई शर्त, समयसीमा या बातचीत का संकेत सामने आता है या नहीं, इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।

ट्रंप और पजशकियान एक ही शहर में, लेकिन बैठक तय नहीं

पजशकियान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस सप्ताह न्यूयॉर्क में मौजूद हैं। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से पजशकियान से मिलने की संभावना जताई है, लेकिन ईरानी राष्ट्रपति और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच औपचारिक बैठक तय होने की पुष्टि नहीं हुई है।

Reuters के अनुसार, ईरानी पक्ष ने कहा है कि पजशकियान की ट्रंप से मुलाकात की कोई योजना नहीं है। हालांकि, न्यूयॉर्क में ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क और मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी है।

The National की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और कतर समेत मध्यस्थों ने दोनों पक्षों के बीच संपर्क बढ़ाया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच मध्यस्थों के जरिए लंबी बातचीत हुई।

इस घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि शीर्ष नेताओं की प्रत्यक्ष बैठक तय नहीं होने के बावजूद कूटनीतिक संपर्क के चैनल सक्रिय हैं।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल पर आवाजाही की पाबंदी

पजशकियान को अमेरिका आने की अनुमति मिल गई है, लेकिन न्यूयॉर्क में ईरानी प्रतिनिधिमंडल की गतिविधियां सामान्य विदेशी प्रतिनिधिमंडल जैसी नहीं होंगी।

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार ईरानी प्रतिनिधिमंडल पर यात्रा संबंधी प्रतिबंध और कुछ वस्तुओं की खरीद को लेकर सीमाएं लागू हैं। रिपोर्टों के मुताबिक प्रतिनिधिमंडल की आवाजाही मुख्य रूप से निर्धारित क्षेत्र और मार्ग तक सीमित रखी गई है।

Al Jazeera के अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति के साथ आने वाली मीडिया टीम के सदस्यों को वीजा नहीं दिया गया। ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों पर लग्जरी सामान खरीदने पर भी रोक है।

इसका अर्थ है कि पजशकियान UNGA में हिस्सा ले सकते हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर उनकी गतिविधियों पर अमेरिकी नियम लागू रहेंगे।

UN की मेजबानी और अमेरिका की भूमिका

संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय न्यूयॉर्क में स्थित है। UNGA में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करना मेजबान देश और संयुक्त राष्ट्र के बीच एक संवेदनशील कूटनीतिक व्यवस्था का हिस्सा है।

इसी संदर्भ में अमेरिका ने ईरानी राष्ट्रपति और विदेश मंत्री को UNGA में शामिल होने के लिए प्रवेश की अनुमति दी है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी प्रतिनिधिमंडल को कार्यक्रम में हिस्सा लेने की अनुमति के साथ-साथ यात्रा और खरीदारी पर प्रतिबंधों की जानकारी भी दी गई थी।

इसलिए पजशकियान का न्यूयॉर्क दौरा एक असामान्य कूटनीतिक स्थिति पेश करता है—एक ओर दोनों देशों के बीच संघर्ष जारी है, दूसरी ओर ईरान का सर्वोच्च राजनीतिक प्रतिनिधि अमेरिकी धरती पर UN के आधिकारिक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहा है।

क्या पजशकियान गिरफ्तारी से सुरक्षित हैं?

मौजूदा राष्ट्राध्यक्षों की विदेश यात्रा में कानूनी सुरक्षा का सवाल जटिल होता है और इसे किसी एक सामान्य नियम से तय नहीं किया जा सकता। राष्ट्राध्यक्षों की व्यक्तिगत प्रतिरक्षा, मेजबान देश के कानून, अंतरराष्ट्रीय दायित्व और संबंधित मामले की प्रकृति जैसे कई कारक महत्वपूर्ण होते हैं।

इसलिए यह कहना कि कोई मौजूदा राष्ट्रपति किसी भी परिस्थिति में किसी दूसरे देश में गिरफ्तार नहीं हो सकता, कानूनी रूप से बहुत व्यापक दावा होगा। पजशकियान के मौजूदा न्यूयॉर्क दौरे के संदर्भ में उपलब्ध रिपोर्टों का मुख्य फोकस गिरफ्तारी के बजाय अमेरिकी प्रवेश और आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों पर है।

ईरान की कूटनीति के लिए UNGA क्यों महत्वपूर्ण?

ईरान के लिए UNGA ऐसा अंतरराष्ट्रीय मंच है जहां वह सीधे बड़ी संख्या में देशों के प्रतिनिधियों के सामने अपना पक्ष रख सकता है। मौजूदा संघर्ष के बीच यह मंच तेहरान को युद्ध, आर्थिक दबाव, होर्मुज और भविष्य की बातचीत पर अपना दृष्टिकोण रखने का अवसर देता है।

ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे एक तरफ अपनी स्थिति मजबूती से रखेंगे, वहीं दूसरी तरफ मध्यस्थों के जरिए कूटनीतिक रास्ते तलाशने की कोशिश भी जारी रखेंगे। Al Jazeera के अनुसार, पाकिस्तान, कतर, ओमान और तुर्किये जैसे देश संकट को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की कोशिशों में सक्रिय हैं।

बातचीत की गुंजाइश कितनी है?

न्यूयॉर्क में ईरान और अमेरिका के बीच प्रत्यक्ष राष्ट्रपति-स्तरीय बैठक तय नहीं है, लेकिन दोनों देशों के अधिकारियों के बीच मध्यस्थों के जरिए संपर्क की खबरें सामने आई हैं।

ईरान ने होर्मुज को फिर खोलने के लिए अमेरिकी सैन्य दबाव और बंदरगाह नाकाबंदी से जुड़ी शर्तें रखी हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर दबाव जारी रखने और तेहरान से कई मुद्दों पर रियायतों की मांग की है।

ऐसे में पजशकियान का UNGA भाषण केवल सार्वजनिक बयान तक सीमित नहीं रहेगा। उसके बाद होने वाली द्विपक्षीय और मध्यस्थों के जरिए बैठकों से यह स्पष्ट हो सकता है कि दोनों पक्ष संघर्ष के बीच बातचीत के लिए किस स्तर तक तैयार हैं।

UN में ईरान के भाषणों का पुराना विवादित इतिहास

ईरान के नेताओं के UN संबोधन पहले भी राजनीतिक विवादों का केंद्र रहे हैं। अलग-अलग वर्षों में उनके भाषणों के दौरान प्रतिनिधिमंडलों के वॉकआउट और विरोध प्रदर्शन जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं।

इस बार भी UNGA का माहौल अत्यधिक संवेदनशील है। अमेरिका-ईरान संघर्ष, होर्मुज में समुद्री यातायात, मध्य पूर्व के अन्य युद्ध और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसके प्रभाव के कारण पजशकियान का भाषण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास ध्यान आकर्षित करेगा।

23 सितंबर का संबोधन इसलिए महत्वपूर्ण होगा कि इससे ईरान अपने युद्ध संबंधी रुख, होर्मुज पर शर्तों और अमेरिका के साथ संभावित कूटनीति को लेकर किस तरह का सार्वजनिक संदेश देता है, इसकी तस्वीर सामने आएगी।

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