ईरान बोला- अमेरिका का साथ देने वाले NATO सदस्य जवाब दें: होर्मुज स्ट्रेट में कॉमर्शियल जहाज पर हमला

ईरान ने NATO सदस्य देशों पर अमेरिका-इजराइल का साथ देने का आरोप लगाया। होर्मुज स्ट्रेट में जहाज पर हमला हुआ, जबकि क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक गतिविधियां जारी हैं।

ईरान ने अमेरिका और इजराइल के साथ सैन्य कार्रवाई में सहयोग करने पर NATO सदस्य देशों को जवाबदेह ठहराने की मांग की है। इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट में एक व्यावसायिक जहाज पर हमला हुआ, जबकि क्षेत्र में कूटनीतिक और सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

तेहरान: मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ अपने आरोपों को और तेज कर दिया है। ईरान ने कहा है कि हालिया सैन्य कार्रवाई में अमेरिका और इजराइल का समर्थन करने वाले NATO सदस्य देशों को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इसी बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक वाणिज्यिक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला होने की घटना ने क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

ईरान का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन सैन्य गतिविधियां और सुरक्षा जोखिम अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

NATO देशों पर ईरान का गंभीर आरोप

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि NATO महासचिव मार्क रूटे ने स्वयं स्वीकार किया है कि इटली और रोमानिया ने ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया था। बघई ने कहा कि जिन देशों ने इस अभियान में किसी भी स्तर पर सहयोग किया, उन्हें अपने नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। 

ईरान का कहना है कि ऐसे देशों की भूमिका की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच होनी चाहिए और उन्हें अपने फैसलों के लिए जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। हालांकि NATO या संबंधित देशों की ओर से ईरान के इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाज पर हमला

क्षेत्रीय तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से एक और चिंताजनक घटना सामने आई है। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार ओमान के तट के निकट एक वाणिज्यिक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया।

हमले में जहाज के दाहिने हिस्से को नुकसान पहुंचा, जबकि ब्रिज यानी जहाज के संचालन केंद्र पर भी प्रभाव पड़ा। जहाज के कप्तान ने पुष्टि की कि इस घटना में किसी भी चालक दल के सदस्य को चोट नहीं आई। हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं और अभी तक हमले की जिम्मेदारी किसी संगठन या देश ने नहीं ली है। यह घटना ऐसे समय हुई है जब दुनिया की बड़ी नौवहन कंपनियां पहले से ही होर्मुज मार्ग की सुरक्षा को लेकर सतर्क हैं।

नए समुद्री मार्ग के प्रस्ताव का ईरान ने किया विरोध

संयुक्त राष्ट्र द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक समुद्री मार्ग या इवैक्यूएशन लेन बनाने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि ईरान ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। तेहरान का कहना है कि क्षेत्रीय समुद्री व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े फैसले संबंधित देशों की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के अनुरूप होने चाहिए। ईरान का मानना है कि बाहरी हस्तक्षेप से क्षेत्र की स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है।

होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान आमने-सामने

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि जो जहाज निर्धारित नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। दूसरी ओर अमेरिका ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। 

विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मार्ग पर तनाव बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है।

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युद्ध खर्च के लिए अतिरिक्त फंडिंग की मांग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिकी संसद से 87.6 अरब डॉलर (करीब 8.3 लाख करोड़ रुपये) की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है। प्रशासन का कहना है कि इस राशि का उपयोग सैन्य अभियानों, हथियारों के भंडारण, सेना की तैयारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में किया जाएगा।

यह मांग ऐसे समय आई है जब अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखने के साथ-साथ सहयोगी देशों की सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को भी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

ईरान ने अमेरिकी कृषि खरीद संबंधी दावे को किया खारिज

ईरान और अमेरिका के बीच आर्थिक मुद्दों पर भी मतभेद सामने आए हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की अनफ्रीज की गई संपत्ति का उपयोग अमेरिकी गेहूं, मक्का और सोयाबीन खरीदने के लिए किया जाएगा। हालांकि ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि ईरान की संपत्ति का इस्तेमाल अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने के लिए नहीं किया जाएगा। उन्होंने इसे अमेरिकी प्रशासन का भ्रामक दावा बताया।

खाड़ी देशों ने अमेरिका-ईरान समझौते का किया स्वागत

क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बावजूद कूटनीतिक स्तर पर कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान सहित खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत किया है।

इन देशों का कहना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति केवल संवाद, कूटनीति और राजनीतिक समाधान के जरिए ही संभव है। उन्होंने किसी नए सैन्य संघर्ष से बचने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

इजराइल-लेबनान वार्ता जारी

अमेरिका की मध्यस्थता में इजराइल और लेबनान के बीच चल रही वार्ता को एक दिन और बढ़ा दिया गया है। दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा और सैन्य तनाव कम करने को लेकर बातचीत जारी है। हालांकि इस बीच लेबनान के नाबातियेह क्षेत्र में इजराइली हमले में तीन लोगों की मौत और एक व्यक्ति के घायल होने की खबर भी सामने आई है। इस घटना पर इजराइली सेना की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

नेतन्याहू का बड़ा बयान

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान, सीरिया और गाजा में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखेगी। उन्होंने कहा कि जब तक राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकता रहेगी, तब तक सैनिकों की तैनाती जारी रहेगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्षेत्र में तनाव कम करने और युद्धविराम को स्थायी बनाने के प्रयासों में जुटा हुआ है।

वैश्विक सुरक्षा पर बढ़ती चिंता

मध्य पूर्व में जारी घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्रीय संघर्ष केवल स्थानीय देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका प्रभाव वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज पर हमला, NATO देशों पर ईरान के आरोप और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी इस बात के संकेत हैं कि स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।

आने वाले दिनों में कूटनीतिक वार्ताओं की सफलता, समुद्री सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्रीय शक्तियों के फैसले इस संकट की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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