जापान ने बदले शाही उत्तराधिकार नियम, लेकिन महिला सम्राट पर प्रतिबंध बरकरार

जापान की संसद ने शाही उत्तराधिकार नियमों में बदलाव को मंजूर। महिला सदस्यो को विवाह के बाद शाही दर्जा बनाए रखने की अनुमति मिलेगी, लेकिन महिला सम्राट पर प्रतिबंध

जापान की संसद ने शाही परिवार के उत्तराधिकार नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी है। नए कानून से शाही परिवार का दायरा बढ़ेगा, लेकिन महिलाओं को सम्राट बनने की अनुमति नहीं मिलेगी, जिससे उत्तराधिकार पर बहस फिर तेज हो गई है।

टोक्यो: जापान की संसद ने शाही उत्तराधिकार प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी देकर देश की सबसे पुरानी संवैधानिक परंपराओं में एक बड़ा सुधार किया है। संसद के उच्च सदन से पारित नए विधेयक का उद्देश्य शाही परिवार के लगातार घटते आकार और उत्तराधिकार संकट से निपटना है। हालांकि इस बदलाव के बावजूद महिलाओं को सम्राट बनने का अधिकार नहीं दिया गया है, जिससे इस मुद्दे पर वर्षों से चल रही बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है। नए कानून के तहत शाही परिवार दूर के पुरुष रिश्तेदारों को फिर से परिवार में शामिल कर सकेगा। साथ ही, शाही परिवार की महिला सदस्य अब किसी आम नागरिक से विवाह करने के बाद भी अपना शाही दर्जा बनाए रख सकेंगी। इसके बावजूद उत्तराधिकार केवल पुरुष सदस्यों तक सीमित रहेगा।

शाही परिवार के घटते आकार ने बढ़ाई चिंता

जापान का शाही परिवार पिछले कई वर्षों से उत्तराधिकार संकट का सामना कर रहा है। मौजूदा कानून के अनुसार केवल पुरुष सदस्य ही राजगद्दी के उत्तराधिकारी बन सकते हैं। परिणामस्वरूप उत्तराधिकार के योग्य सदस्यों की संख्या लगातार घटती जा रही है। वर्तमान में सम्राट के छोटे भाई, 60 वर्षीय प्रिंस फुमिहितो, राजगद्दी के पहले उत्तराधिकारी हैं। उनके 19 वर्षीय पुत्र प्रिंस हिसाहितो दूसरे स्थान पर हैं। तीसरे स्थान पर सम्राट के 90 वर्षीय चाचा हैं।

यदि भविष्य में प्रिंस हिसाहितो का कोई पुरुष उत्तराधिकारी नहीं होता, तो मौजूदा व्यवस्था के तहत उत्तराधिकार की शृंखला समाप्त हो सकती है। इसी संभावित संकट को देखते हुए सरकार ने शाही परिवार का दायरा बढ़ाने के लिए नए संशोधन प्रस्तावित किए।

दूर के पुरुष रिश्तेदारों को मिलेगा शाही परिवार में स्थान

नए कानून के अनुसार, दूसरे विश्व युद्ध के बाद शाही परिवार से अलग किए गए 11 पूर्व शाही शाखाओं के पुरुष वंशजों को दोबारा शाही परिवार में शामिल किया जा सकेगा। इसके लिए उनकी आयु कम से कम 15 वर्ष होना आवश्यक होगी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से भविष्य में शाही परिवार में उत्तराधिकार के लिए पात्र पुरुष सदस्यों की संख्या बढ़ेगी और राजशाही की निरंतरता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। यह संशोधन 1949 के बाद पहली बार शाही परिवार से संबंधित मूल कानून में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

जापान ने बदले शाही उत्तराधिकार नियम, लेकिन महिला सम्राट पर प्रतिबंध बरकरार

विवाह के बाद भी शाही दर्जा रखेंगी महिलाएं

अब तक जापान में यदि शाही परिवार की कोई महिला किसी आम नागरिक से विवाह करती थी, तो उसे अपना शाही दर्जा छोड़ना पड़ता था। इसका सबसे चर्चित उदाहरण प्रिंसेस माको थीं, जिन्होंने वर्ष 2021 में अपने कॉलेज के साथी से विवाह करने के बाद शाही परिवार छोड़ दिया था। नए कानून के तहत महिला सदस्य विवाह के बाद भी शाही परिवार का हिस्सा बनी रहेंगी और आधिकारिक समारोहों, सार्वजनिक कार्यक्रमों तथा राजकीय दायित्वों का निर्वहन करती रहेंगी। हालांकि, यदि इन महिला सदस्यों के बच्चों का जन्म किसी गैर-शाही परिवार में होता है, तो उन्हें भविष्य में राजगद्दी का उत्तराधिकारी नहीं माना जाएगा।

प्रिंसेस आइको अब भी उत्तराधिकार से बाहर

जापान के मौजूदा सम्राट की इकलौती संतान प्रिंसेस आइको हैं। लोकप्रियता और सार्वजनिक समर्थन मिलने के बावजूद वह वर्तमान कानून के अनुसार राजगद्दी की उत्तराधिकारी नहीं बन सकतीं। नए संशोधन में भी महिला सम्राट की अनुमति शामिल नहीं की गई है। इसका अर्थ है कि उत्तराधिकार की परंपरा पहले की तरह केवल पुरुष सदस्यों तक सीमित रहेगी। यही कारण है कि यह कानून शाही परिवार के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत तो करता है, लेकिन उत्तराधिकार संबंधी मूल विवाद को पूरी तरह समाप्त नहीं करता।

महिला सम्राट पर सार्वजनिक समर्थन लगातार मजबूत

हाल के वर्षों में जापान में महिला सम्राट को अनुमति देने की मांग लगातार बढ़ी है। विभिन्न जनमत सर्वेक्षणों में अधिकांश नागरिकों ने महिला उत्तराधिकार का समर्थन किया है। एक प्रमुख राष्ट्रीय सर्वेक्षण में 70 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने महिला सम्राट के पक्ष में राय व्यक्त की। एक अन्य सर्वेक्षण में भी बड़ी संख्या में लोगों ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश को देखते हुए उत्तराधिकार कानून में व्यापक सुधार होना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि जापानी समाज में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत हुई है और यही बदलाव अब शाही व्यवस्था पर भी प्रभाव डाल रहा है।

सरकार का रुख क्यों अलग है?

प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची और कई रूढ़िवादी राजनीतिक नेताओं का मानना है कि केवल पुरुष उत्तराधिकार की परंपरा जापान की शाही व्यवस्था की ऐतिहासिक वैधता और निरंतरता का महत्वपूर्ण आधार है। उनका तर्क है कि लगभग 2,600 वर्षों से चली आ रही शाही परंपरा को बनाए रखने के लिए पुरुष उत्तराधिकार प्रणाली आवश्यक है। इसी कारण सरकार ने उत्तराधिकार नियमों में सीमित बदलाव किए, लेकिन महिला सम्राट को अनुमति देने का प्रस्ताव शामिल नहीं किया।

दुनिया की सबसे पुरानी वंशानुगत राजशाही

जापान का शाही परिवार दुनिया की सबसे पुरानी निरंतर चलने वाली वंशानुगत राजशाही माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार इसकी परंपरा लगभग 2,600 वर्षों पुरानी है। शाही परिवार केवल राजनीतिक प्रतीक नहीं, बल्कि जापान की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा भी माना जाता है। इसलिए उत्तराधिकार से जुड़े किसी भी बदलाव का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक महत्व होता है।

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