जेल में बंद अनंत सिंह की बड़ी जीत: मोकामा से वीणा देवी को 30 हजार वोटों से हराया

बिहार चुनाव 2025 में जेल में बंद जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह ने मोकामा से वीणा देवी को 29,720 वोटों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की।

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों में मोकामा सीट ने फिर सुर्खियां बटोरीं, जहां जेल में बंद जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह ने निर्णायक बढ़त बनाते हुए जीत दर्ज की। उन्होंने आरजेडी प्रत्याशी वीणा देवी को 29,720 वोटों के अंतर से हराया। शुरुआती दौर से ही वे लगातार आगे चल रहे थे, जिससे मुकाबले का रुख स्पष्ट होता गया।

Patna: बिहार विधानसभा चुनाव की मतगणना में मोकामा सीट सबसे चर्चित मुकाबलों में रही, जहां दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में जेल में बंद जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह ने प्रभावशाली जीत हासिल की। उन्होंने आरजेडी उम्मीदवार वीणा देवी को 29,720 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। मतगणना की शुरुआत से ही अनंत सिंह बढ़त बनाए हुए थे, जिसने चुनावी माहौल को और रोमांचक बना दिया। 

मोकामा को अनंत सिंह का मजबूत गढ़ माना जाता है और इस बार भी उन्होंने अपने प्रभाव को बरकरार रखते हुए सीट को जेडीयू के खाते में रखा। चुनाव परिणामों ने यह भी दिखाया कि कानूनी मुश्किलों के बावजूद उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। स्थानीय मतदाताओं में उनका प्रभाव अब भी गहरा है, जिसने इस हाई-प्रोफाइल सीट पर उनकी जीत को और भी महत्वपूर्ण बना दिया।

राउंड-दर-राउंड बढ़त से साफ हुआ मुकाबले का रुख

मोकामा की हाई-प्रोफाइल सीट पर जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह ने पूरी मतगणना के दौरान मजबूत पकड़ बनाए रखी। शुरुआती रुझानों में ही वे आगे निकल गए थे और हर राउंड में बढ़त बढ़ती गई। 18वें राउंड के बाद उन्हें 68,132 वोट मिले, जबकि आरजेडी प्रत्याशी वीणा देवी 48,845 वोटों पर रहीं। 20वें राउंड के अंत तक अनंत सिंह अपनी प्रतिद्वंद्वी से 23,000 से अधिक मतों से आगे थे। बाहुबल और प्रभाव के लिए चर्चित इस सीट पर रुझानों ने शुरू से ही साफ कर दिया था कि मुकाबला एकतरफा दिशा में बढ़ रहा है।

जेल में बंद अनंत सिंह की बड़ी जीत: मोकामा से वीणा देवी को 30 हजार वोटों से हराया

फिर दोहराया पुराना राजनीतिक प्रभाव

अनंत सिंह ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मोकामा में उनका जनाधार अब भी अटूट है। 2015 में निर्दलीय जीत से लेकर 2020 में आरजेडी के टिकट पर जेल में रहते हुए मिली विजय तक, उनका राजनीतिक सफर हमेशा चर्चा में रहा। 2022 में दोषसिद्धि के कारण सदस्यता रद्द होने के बावजूद उनकी लोकप्रियता कम नहीं हुई। 2025 में जदयू में लौटकर उन्होंने एक बार फिर इस मजबूत गढ़ को अपने नाम कर लिया।

दशकों से प्रभाव और स्थानीय पकड़ के चलते अनंत सिंह लगातार मोकामा राजनीति में प्रमुख चेहरा बने हुए हैं। इस बार भी मतदाताओं ने उनके पक्ष में भरोसा जताते हुए उन्हें स्पष्ट बहुमत दिलाया। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, जेल में रहते हुए यह उनकी तीसरी बड़ी जीत है, जो उनके प्रभाव को फिर स्थापित करती है।

दूसरे उम्मीदवारों का प्रदर्शन कमजोर

मतगणना के 20 दौर पूरा होने पर जन सुराज पार्टी के प्रियदर्शी पीयूष 14,465 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। मुकाबले के शुरुआती चरण में उम्मीद जताई जा रही थी कि जन सुराज नई ताकत बन सकता है, लेकिन बढ़ते राउंड्स के साथ उनका वोट शेयर सीमित होकर रह गया।

वहीं आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी राजेश कुमार रत्नाकर मात्र 1,847 वोट हासिल कर चौथे स्थान पर रहे। दोनों पार्टियों का प्रदर्शन बताता है कि मोकामा में मुकाबला मूल रूप से दो बड़े उम्मीदवारों के बीच ही सिमटा रहा। चुनावी परिणाम स्पष्ट करते हैं कि क्षेत्रीय समीकरण और पारंपरिक समर्थन इस चुनाव में निर्णायक कारक रहे।

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