दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण ने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता गहरा दी है। इसी गंभीर हालात को देखते हुए गुरुग्राम प्रशासन ने कक्षा 5 तक के सभी छात्रों के लिए स्कूलों में हाइब्रिड मोड लागू करने का निर्णय लिया है। यह कदम छोटे बच्चों को खराब AQI के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए उठाया गया है।
गुरुग्राम: दिल्ली-NCR में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता के बीच गुरुग्राम जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए कक्षा 5 तक के छात्रों के लिए स्कूलों में हाइब्रिड शिक्षण प्रणाली अपनाने का आदेश जारी किया है। हालिया दिनों में गुरुग्राम का AQI गंभीर श्रेणी के करीब पहुंच गया है, जिससे सबसे अधिक खतरा छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।
उपायुक्त अजय कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि यह निर्णय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के चरण-3 निर्देशों के तहत लिया गया है। जिला प्रशासन का मानना है कि हाइब्रिड मॉडल के जरिए बच्चों को प्रदूषण के सीधे संपर्क से बचाया जा सकता है। इसके तहत स्कूलों को ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निर्णय ले सकें।
ऑनलाइन विकल्प अभिभावकों की मर्जीगुरुग्राम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हाइब्रिड मोड लागू होने के बाद ऑनलाइन कक्षाएं पूरी तरह अभिभावकों की इच्छा पर निर्भर होंगी। जिला प्रशासन के अनुसार, बढ़ते प्रदूषण के बीच अभिभावक अपने बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन या ऑफलाइन क्लास में से किसी भी विकल्प को चुन सकते हैं। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी छात्र पर ऑफलाइन उपस्थिति के लिए दबाव न डालें। वहीं, स्कूल आने वाले बच्चों के लिए सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रहेगा, ताकि प्रदूषण के जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।
तुरंत व्यवस्था तैयार
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जिले में बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए प्रशासन ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को तत्काल हाइब्रिड शिक्षा प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि ऑनलाइन कक्षाओं के लिए तकनीकी व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए ताकि किसी बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो। साथ ही स्कूलों को यह भी निर्देशित किया गया है कि उपस्थिति को लेकर विद्यार्थियों पर अनावश्यक दबाव न बनाया जाए।
हाइब्रिड मॉडल के तहत स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कक्षाएं सुचारू रूप से चले और ऑफलाइन आने वाले बच्चों के लिए आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हो। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि दोनों मोड में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना स्कूलों की जिम्मेदारी होगी।
अभिभावकों ने फैसले को सराहा
गुरुग्राम में अभिभावकों ने प्रशासन के इस निर्णय को राहत भरा कदम बताया है। उनका कहना है कि प्रदूषण का स्तर चिंताजनक है और ऐसे में छोटे बच्चों को घर पर सुरक्षित रखते हुए पढ़ाई जारी रखना अधिक उचित है। अभिभावकों का मानना है कि हाइब्रिड मॉडल से बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य, दोनों का संतुलन बना रहेगा।
स्कूल प्रबंधन ने भी जिला प्रशासन को आश्वासन दिया है कि वे हाइब्रिड प्रणाली को सुचारू रूप से लागू करने के लिए तैयार हैं। डिजिटल क्लासरूम, लाइव लेक्चर और सुरक्षित ऑफलाइन वातावरण जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। कुल मिलाकर, यह फैसला शिक्षा और बच्चों की सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में प्रभावी कदम माना जा रहा है।










