झारखंड राज्यसभा चुनाव विवाद: परिमल नाथवानी का नामांकन वैध घोषित, कांग्रेस का विरोध तेज

झारखंड में राज्यसभा चुनाव के लिए परिमल नाथवानी का नामांकन वैध घोषित किया । कांग्रेस ने त्रुटियों का आरोप लगाकर विधानसभा में धरना दिया और कड़ी आपत्ति जताई।

झारखंड में राज्यसभा चुनाव के लिए परिमल नाथवानी का नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर ने वैध घोषित कर दिया है। कांग्रेस ने नाम और दस्तावेजों में त्रुटियों का आरोप लगाते हुए विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया। भाजपा-कांग्रेस के बीच तीखी नारेबाजी और हंगामा हुआ।

रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव के दौरान बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है, जहां एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन को रिटर्निंग ऑफिसर ने वैध घोषित कर दिया है। हालांकि, इस फैसले की आधिकारिक अधिसूचना अभी जारी नहीं की गई है, जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।

नामांकन जांच प्रक्रिया के दौरान कई त्रुटियों को लेकर सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद मामला कुछ समय के लिए “होल्ड” पर डाल दिया गया था।

नामांकन जांच के दौरान उठे सवाल

नामांकन पत्रों की जांच के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने परिमल नाथवानी के दस्तावेजों में कई अनियमितताओं का आरोप लगाया था। इनमें नाम के प्रारूप में अंतर, अधूरी जानकारी और हलफनामे में विवरण की कमी जैसे मुद्दे शामिल थे।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि 2008 के राज्यसभा चुनाव में उनका नाम “परिमल नाथवानी” दर्ज था, जबकि 2026 के नामांकन में “नाथवानी परिमल” लिखा गया है। इसे लेकर विपक्ष ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई।

HUF और आपराधिक मामलों की जानकारी पर विवाद

विपक्षी दलों ने यह भी आरोप लगाया कि नामांकन पत्र में अविभाजित हिंदू परिवार (HUF) से जुड़ी जानकारी अधूरी दी गई है। इसके अलावा, प्रत्याशी के खिलाफ दर्ज मामलों और व्यक्तिगत विवरणों को लेकर भी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

फॉर्म-26 के प्रावधानों के तहत आवश्यक सभी सूचनाएं पूरी तरह घोषित नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है, जिससे नामांकन की वैधता पर सवाल उठे।

विधानसभा परिसर में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

नामांकन को लेकर स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब कांग्रेस नेताओं ने झारखंड विधानसभा परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि परिमल नाथवानी का नामांकन रद्द किया जाए, क्योंकि उनके अनुसार प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां हैं।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विधानसभा परिसर में धरना दिया और नारेबाजी करते हुए चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी नोकझोंक

कांग्रेस के विरोध के बीच भाजपा नेता भी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच तीखी नारेबाजी देखने को मिली। स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई।

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस के प्रदर्शन को “अनुचित और अराजकता” करार दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।

रिटर्निंग ऑफिसर का निर्णय और केंद्रीय चुनाव आयोग की भूमिका

रिटर्निंग ऑफिसर ने जांच के बाद परिमल नाथवानी के नामांकन को वैध घोषित कर दिया है। हालांकि, कुछ तकनीकी बिंदुओं पर स्पष्टता के लिए केंद्रीय चुनाव आयोग से परामर्श भी मांगा गया था।

झारखंड राज्यसभा चुनाव विवाद: परिमल नाथवानी का नामांकन वैध घोषित, कांग्रेस का विरोध तेज

इससे पहले नामांकन को “होल्ड” पर रखा गया था, जब दस्तावेजों में कुछ विसंगतियां सामने आई थीं। बाद में स्पष्टीकरण मिलने के बाद इसे वैध माना गया।

परिमल नाथवानी का पक्ष: सभी आपत्तियों का जवाब दिया

परिमल नाथवानी ने कहा है कि उनके खिलाफ उठाई गई सभी आपत्तियों का विधिवत जवाब दे दिया गया है। उनके वकीलों द्वारा रिटर्निंग ऑफिसर को सभी आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण उपलब्ध कराए गए हैं।

उन्होंने दावा किया कि नामांकन में किसी भी प्रकार की जानबूझकर गलती नहीं की गई है और सभी प्रक्रियात्मक नियमों का पालन किया गया है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज, विपक्ष ने उठाए सवाल

इस पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया के माध्यम से नामांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर नियमों का निष्पक्ष पालन हुआ तो सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

विपक्ष का आरोप है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और कुछ उम्मीदवारों को राजनीतिक संरक्षण मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

एनडीए का समर्थन और चुनावी समीकरण

परिमल नाथवानी को एनडीए गठबंधन के विधायकों का समर्थन प्राप्त है। उनके नामांकन के दौरान कई समर्थक विधायक मौजूद रहे थे।

झारखंड में राज्यसभा सीटों को लेकर पहले से ही राजनीतिक समीकरण जटिल बने हुए हैं, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने उम्मीदवारों को मजबूत स्थिति में रखने की कोशिश कर रहे हैं।

कांग्रेस की रणनीति और आगे की लड़ाई

कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को आगे भी उठाएगी और जरूरत पड़ने पर कानूनी विकल्पों का सहारा लिया जाएगा। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता को स्वीकार नहीं किया जाएगा। विधानसभा परिसर में हुए प्रदर्शन को कांग्रेस ने लोकतांत्रिक अधिकार बताया, जबकि भाजपा ने इसे राजनीतिक नाटक करार दिया।

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