वाराणसी में आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगाए गए आरोपों से पीछे हटने के बाद चर्चाएं तेज हो गई हैं। शिष्यों का कहना है कि मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए इस पर सार्वजनिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
वाराणसी: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद में नया मोड़ तब आया जब आशुतोष ब्रह्मचारी ने सोशल मीडिया पर अपने पुराने आरोपों को लेकर अलग रुख अपनाया। बयान सामने आने के बाद काशी में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि स्वामी के शिष्यों ने न्यायालय में मामला लंबित होने का हवाला देते हुए सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है।
बयान बदलने के बाद फिर चर्चा में आया मामला
प्रयागराज में माघ स्नान के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके एक शिष्य पर गंभीर आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी के हालिया बयान ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। सोशल मीडिया पर जारी अपने वक्तव्य में उन्होंने दावा किया कि उन पर दबाव बनाकर आरोप लगाने के लिए कहा गया था। इस दावे के बाद वाराणसी में धार्मिक और सामाजिक हलकों में मामले को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद फिलहाल काशी से बाहर हैं, लेकिन उनके अनुयायियों और शिष्यों के बीच इस घटनाक्रम को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। श्रीविद्यामठ से जुड़े लोगों का कहना है कि उन्हें भी आशुतोष ब्रह्मचारी के नए बयान की जानकारी मिली है।
शिष्यों ने कोर्ट में मामला होने का दिया हवाला
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों का कहना है कि पूरा प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि पहले लगाए गए आरोपों को वे शुरू से ही निराधार बताते रहे हैं और अदालत से भी उन्हें राहत मिली थी।
शिष्यों ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया जारी है और मामले से जुड़े सभी पक्ष अदालत में अपनी बात रख रहे हैं। ऐसे में किसी भी तरह की टिप्पणी न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से वे इस विषय पर अधिक कुछ कहने से बच रहे हैं।
दबाव में लगाए गए थे आरोप, दावा
आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपने हालिया बयान में आरोप लगाया है कि उन पर कुछ लोगों द्वारा दबाव बनाया गया था। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस पूरे घटनाक्रम में कुछ अन्य लोगों और अधिकारियों की भी भूमिका रही हो सकती है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों का कहना है कि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से आरोप लगाए गए थे। उनका विश्वास है कि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सभी तथ्यों की स्पष्टता सामने आएगी। फिलहाल काशी में सभी की नजरें अदालत की कार्यवाही और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की वापसी पर टिकी हुई हैं।










