केंद्र सरकार ने केरल का नाम आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ करने को मंजूरी दे दी। अब सभी सरकारी दस्तावेज, मानचित्र और रिकॉर्ड में राज्य का नया नाम लागू होगा। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इसे सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण कदम बताया।
नई दिल्ली। मोदी सरकार ने केरल का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से 'केरलम' करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह फैसला नई पीएमओ बिल्डिंग सेवा तीर्थ में मंगलवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया। प्रस्ताव के अनुमोदन के बाद अब केरल राज्य को आधिकारिक दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड में 'केरलम' के नाम से ही जाना जाएगा।
नाम परिवर्तन का इतिहास
केरल विधानसभा ने पहले 24 जून, 2024 को एक प्रस्ताव पास किया था, जिसमें केंद्र से राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' करने की अपील की गई थी। विधानसभा का कहना था कि राज्य को स्थानीय भाषा मलयालम में 'केरलम' कहा जाता है और यह नाम मलयालम भाषी समुदायों के लिए सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

इससे पहले अगस्त 2023 में भी केरल विधानसभा ने एक समान प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उसमें कुछ टेक्निकल बदलावों का सुझाव दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने गृह मंत्रालय के सुझावों के अनुसार संशोधित प्रस्ताव पेश किया।
केंद्रीय कैबिनेट ने दी मंजूरी
नई पीएमओ बिल्डिंग सेवा तीर्थ में हुई कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव को पेश किया गया। कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी और अब राज्य का नाम आधिकारिक रूप से 'केरलम' कर दिया गया है। इस फैसले को मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का भी समर्थन प्राप्त है। उन्होंने बैठक में कहा कि यह कदम राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा और मलयालम भाषी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करेगा।
संविधान के आठवें शेड्यूल में नाम अपडेट
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने प्रस्ताव में यह भी कहा कि केरल का नाम संविधान के आठवें शेड्यूल में मलयालम में 'केरलम' के रूप में दर्ज किया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषी लोगों ने एक संयुक्त केरल बनाने की मांग की थी। हालांकि, संविधान के पहले शेड्यूल में राज्य का नाम अभी भी 'केरल' के रूप में लिखा हुआ है।










