ब्रिटेन के रेडियो स्टेशन पर तकनीकी खराबी के कारण किंग चार्ल्स III के निधन की झूठी घोषणा प्रसारित हो गई, जिससे हड़कंप मच गया। बाद में गलती सामने आने पर स्टेशन ने तुरंत सुधार कर श्रोताओं और राजघराने से माफी मांगी।
लंदन: ब्रिटेन में मंगलवार को एक अजीबोगरीब तकनीकी गड़बड़ी ने दुनिया भर में हड़कंप मचा दिया, जब मशहूर रेडियो स्टेशन ‘रेडियो कैरोलीन’ पर गलती से किंग चार्ल्स III की मौत की झूठी घोषणा प्रसारित हो गई। यह घटना एक कंप्यूटर सिस्टम में आए तकनीकी ग्लिच के कारण हुई, जिसके चलते पहले से रिकॉर्ड किया गया “मोनार्क डेथ प्रोटोकॉल” ऑडियो अचानक ऑन-एयर चल गया।
इस गलत प्रसारण के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से अफवाह फैल गई और कुछ ही मिनटों में “किंग चार्ल्स निधन” जैसी खबरें ट्रेंड करने लगीं। हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि यह पूरी तरह एक तकनीकी त्रुटि थी और राजा पूरी तरह स्वस्थ हैं।
कैसे हुआ यह पूरा तकनीकी हादसा?
रेडियो कैरोलीन पर सामान्य प्रसारण चल रहा था, तभी अचानक सिस्टम में एक गंभीर सॉफ्टवेयर फॉल्ट आ गया। इस फॉल्ट के कारण ब्रिटेन में उपयोग होने वाला इमरजेंसी ब्रॉडकास्ट सिस्टम सक्रिय हो गया।
यह सिस्टम विशेष परिस्थितियों के लिए तैयार किया जाता है, खासकर ब्रिटिश राजघराने के किसी सदस्य की मृत्यु जैसी अत्यंत संवेदनशील स्थिति में। जैसे ही यह प्रोटोकॉल एक्टिव हुआ, पहले से रिकॉर्ड किया गया “राजा की मृत्यु” से जुड़ा संदेश बिना किसी मानवीय नियंत्रण के प्रसारित हो गया।
इसके तुरंत बाद रेडियो स्टेशन का सामान्य प्रसारण बंद हो गया और कुछ समय के लिए शोक-संगीत जैसा वातावरण ऑन-एयर सुनाई देने लगा, जिससे भ्रम और भी बढ़ गया।
स्टाफ की गलती का खुलासा और तत्काल सुधार
जैसे ही स्टूडियो में मौजूद तकनीकी टीम को इस बड़ी त्रुटि का पता चला, उन्होंने तुरंत सिस्टम को बंद किया और प्रसारण को सामान्य स्थिति में लाया। इसके बाद रेडियो कैरोलीन की ओर से ऑन-एयर आकर श्रोताओं से माफी मांगी गई।
स्टेशन प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि यह कोई वास्तविक समाचार नहीं था, बल्कि एक तकनीकी खराबी के कारण हुआ गलत अलर्ट था। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे ही गलती का एहसास हुआ, उन्होंने तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए।
रेडियो कैरोलीन का आधिकारिक बयान
रेडियो स्टेशन के मैनेजर पीटर मूर ने इस घटना पर बयान जारी करते हुए कहा कि एक कंप्यूटर सिस्टम में आई खराबी के कारण “डेथ ऑफ मोनार्क” प्रोटोकॉल अनजाने में सक्रिय हो गया।
उन्होंने कहा कि यह एक संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाला सिस्टम है, जिसे केवल वास्तविक आपात स्थिति में उपयोग के लिए तैयार किया गया है। लेकिन तकनीकी खराबी के चलते यह गलती से ट्रिगर हो गया।
स्टेशन ने ब्रिटिश शाही परिवार और अपने श्रोताओं से बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी प्रकार की गलत सूचना फैलाना नहीं था।
सोशल मीडिया पर तेजी से फैली अफवाह
जैसे ही रेडियो से यह गलत घोषणा प्रसारित हुई, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह खबर जंगल की आग की तरह फैल गई। ट्विटर (X), फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर “King Charles death” जैसे कीवर्ड ट्रेंड करने लगे।
कई लोगों ने बिना पुष्टि किए इस खबर को शेयर करना शुरू कर दिया, जिससे भ्रम और बढ़ गया। कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया उपयोगकर्ताओं ने भी शुरुआती मिनटों में इस खबर को लेकर अनिश्चितता जताई।
हालांकि कुछ ही समय बाद आधिकारिक स्रोतों ने स्पष्ट कर दिया कि किंग चार्ल्स पूरी तरह जीवित और स्वस्थ हैं और इस खबर का कोई आधार नहीं है।
उस समय कहां थे किंग चार्ल्स III?
घटना के समय किंग चार्ल्स III और क्वीन कैमिला उत्तरी आयरलैंड के दौरे पर थे। वे एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल थे और सामान्य रूप से सार्वजनिक गतिविधियों में भाग ले रहे थे।
उनकी उपस्थिति और सक्रिय कार्यक्रमों ने भी यह साफ कर दिया कि उनके निधन की खबर पूरी तरह झूठी थी।

क्या है ‘मोनार्क डेथ प्रोटोकॉल’?
ब्रिटेन में एक विशेष और अत्यंत गोपनीय प्रसारण प्रणाली होती है जिसे “मोनार्क डेथ प्रोटोकॉल” कहा जाता है। यह सिस्टम तब सक्रिय किया जाता है जब ब्रिटिश राजा या रानी की मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि होती है।
इस प्रोटोकॉल के तहत:
- सभी टीवी और रेडियो चैनल तुरंत सामान्य प्रसारण रोक देते हैं
- शोक संगीत और विशेष घोषणाएं प्रसारित की जाती हैं
- राष्ट्रीय स्तर पर शोक की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होती है
इसी संवेदनशील सिस्टम के गलत तरीके से सक्रिय होने के कारण यह पूरी घटना हुई।
रेडियो कैरोलीन का इतिहास और पृष्ठभूमि
रेडियो कैरोलीन ब्रिटेन का एक ऐतिहासिक रेडियो स्टेशन है, जिसकी शुरुआत 1964 में एक “पायरेट रेडियो” के रूप में हुई थी। उस समय यह समुद्र में जहाजों से प्रसारण करता था ताकि सरकारी BBC के एकाधिकार को चुनौती दी जा सके।
धीरे-धीरे यह स्टेशन ब्रिटिश रेडियो इतिहास का एक प्रसिद्ध नाम बन गया। इसकी पहचान स्वतंत्र और वैकल्पिक संगीत प्रसारण के लिए भी रही है।
साल 2009 में आई फिल्म “The Boat That Rocked” भी इसी तरह के पायरेट रेडियो युग से प्रेरित मानी जाती है।
घटना के बाद उठे सवाल
इस घटना ने दुनिया भर में मीडिया सिस्टम और आपातकालीन प्रसारण प्रोटोकॉल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि:
- ऐसे संवेदनशील सिस्टम में अतिरिक्त सुरक्षा लेयर होनी चाहिए
- ऑटोमेटिक एक्टिवेशन के बजाय मल्टी-लेवल वेरिफिकेशन जरूरी है
- तकनीकी गड़बड़ी के बावजूद फेक न्यूज फैलने से रोकने के उपाय होने चाहिए








