उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी ने स्कूलों के विलय और बंद किए जाने के मुद्दे को लेकर अपनी राजनीतिक मुहिम तेज कर दी है। इसी क्रम में सपा की ओर से PDA पाठशाला का आयोजन किया गया, जहां बच्चों को पढ़ाया गया और उन्हें कॉपी-किताबें तथा पढ़ाई से जुड़ी सामग्री वितरित की गई। इन कॉपियों और किताबों पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीर भी दिखाई गई। कार्यक्रम के दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बच्चों से बातचीत की और शिक्षा के महत्व पर जोर दिया।
सपा लंबे समय से प्रदेश में सरकारी स्कूलों के विलय और बंद होने के मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधती रही है। पार्टी का आरोप है कि स्कूलों को दूसरे विद्यालयों में मर्ज किए जाने से ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चों के सामने पढ़ाई के लिए अधिक दूरी तय करने की समस्या खड़ी हुई है। इसी मुद्दे को राजनीतिक अभियान में बदलते हुए सपा कार्यकर्ताओं ने बंद या विलय किए गए स्कूलों के आसपास PDA पाठशालाएं शुरू करने की पहल की है। इससे पहले भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी पाठशालाओं की गतिविधियां सामने आई हैं।
लखनऊ में आयोजित पाठशाला को लेकर सपा नेताओं ने कहा कि बच्चों की शिक्षा किसी भी राजनीतिक विवाद से ऊपर है। उनका कहना था कि अगर किसी गांव या बस्ती का स्कूल बंद हो जाता है और बच्चों को पढ़ने के लिए दूर जाना पड़ता है, तो सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और कमजोर परिवारों को होती है। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से स्थानीय स्तर पर बच्चों को पढ़ाने और उनके बीच शैक्षणिक सामग्री पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
PDA पाठशाला के जरिए सपा ने अपने राजनीतिक एजेंडे को शिक्षा के मुद्दे से जोड़ने की कोशिश की है। पार्टी के मुताबिक PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के बड़ी संख्या में बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। सपा का कहना है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी तो इन वर्गों के बच्चों को आगे बढ़ने के ज्यादा अवसर मिलेंगे। पार्टी इस मुद्दे को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच लगातार उठा रही है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को दी गई कॉपी-किताबों पर अखिलेश यादव की तस्वीर होने को भी पार्टी की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि बच्चों को पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराने के साथ उन्हें शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करना इस पहल का उद्देश्य है। वहीं, भाजपा सरकार की स्कूल संबंधी नीतियों को लेकर सपा लगातार सवाल खड़े कर रही है।
इस पूरे मुद्दे पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही बड़ा राजनीतिक ऐलान कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि 2027 में सपा की सरकार बनने पर भाजपा शासन के दौरान बंद किए गए स्कूलों को फिर से खोला जाएगा। अखिलेश यादव ने यह भी कहा था कि सरकारी स्कूलों में PDA समाज के लोग पढ़ते हैं और उनकी सरकार बनने पर PDA समाज को आबादी के अनुपात में उसका हक दिलाया जाएगा।
अखिलेश यादव के इस बयान के बाद सपा संगठन ने बंद स्कूलों के मुद्दे पर अपनी गतिविधियां और तेज कर दी हैं। शिक्षक दिवस के मौके पर भी पार्टी ने बंद स्कूलों के बाहर कार्यक्रम आयोजित करने और शिक्षकों को सम्मानित करने का अभियान चलाने की घोषणा की थी। सपा की छात्र सभा और शिक्षक सभा से जुड़े कार्यकर्ताओं को ऐसे कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए थे। पार्टी ने इस अभियान को ‘पाठशाला पुकारे’ नाम दिया है।
सपा का आरोप है कि स्कूलों को मर्ज करने के कारण कई जगह बच्चों को अपने पुराने स्कूल से काफी दूर स्थित दूसरे विद्यालय में जाना पड़ रहा है। पार्टी का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए कई किलोमीटर की दूरी तय करना आसान नहीं होता। इसी वजह से कुछ स्थानों पर बच्चे नए विद्यालय में दाखिला लेने या नियमित रूप से वहां जाने के बजाय पढ़ाई से दूर हो जाते हैं। सपा ने PDA पाठशाला को इसी समस्या के खिलाफ एक प्रतीकात्मक और राजनीतिक पहल के तौर पर सामने रखा है।
इससे पहले लखनऊ के बीकेटी क्षेत्र में भी PDA पाठशाला शुरू किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। वहां उमरभारी गांव में ऐसी पाठशाला शुरू होने की बात कही गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक जिस स्कूल के बच्चों को दूसरे गांव के विद्यालय में भेजा गया था, वहां की दूरी लगभग तीन किलोमीटर बताई गई थी और कुछ बच्चे इतनी दूरी के कारण नए स्कूल में पढ़ने नहीं जा रहे थे। इसके बाद स्थानीय स्तर पर PDA पाठशाला के माध्यम से बच्चों को उसी क्षेत्र में पढ़ाने की पहल की गई।
सपा के इस अभियान का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि 2027 का विधानसभा चुनाव अब पार्टी की रणनीति के केंद्र में है। शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और सामाजिक हिस्सेदारी जैसे मुद्दों के साथ पार्टी PDA के सवाल को लगातार जनता के बीच ले जाने की कोशिश कर रही है। स्कूलों का मुद्दा सीधे तौर पर ग्रामीण और निम्न आय वाले परिवारों से जुड़ा होने के कारण सपा इसे बड़ा जनसरोकार वाला विषय बता रही है।
वहीं, भाजपा सरकार और सपा के बीच सरकारी स्कूलों को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी लगातार जारी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले सपा पर निशाना साधते हुए शिक्षा और गरीबों से जुड़े मुद्दों पर अपनी सरकार के कामकाज का बचाव किया है। ऐसे में स्कूलों को लेकर PDA पाठशाला की शुरुआत आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकती है।
लखनऊ में हुई PDA पाठशाला में बच्चों को पढ़ाने और कॉपी-किताब बांटने की तस्वीरें और गतिविधियां सपा की इस मुहिम को जमीन पर उतारने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही हैं। पार्टी का संदेश साफ है कि वह बंद और मर्ज किए गए स्कूलों के मुद्दे को केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे स्थानीय स्तर पर अभियान का रूप देना चाहती है। नेताओं ने कहा कि आने वाले समय में इस तरह की पाठशालाओं को और इलाकों तक ले जाया जाएगा।
सपा नेताओं का कहना है कि यदि उनकी सरकार बनती है तो बंद किए गए स्कूलों को दोबारा खोलने के साथ सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। हालांकि स्कूलों के विलय और बंद होने से जुड़े आंकड़ों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग दावे हैं, इसलिए इस मुद्दे पर अंतिम तस्वीर सरकारी आंकड़ों और संबंधित विभाग के रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट होगी। फिलहाल सपा ने इसे आगामी चुनावी अभियान का प्रमुख मुद्दा बना लिया है।
लखनऊ की PDA पाठशाला इसी व्यापक अभियान की एक कड़ी है। बच्चों के बीच पढ़ाई की सामग्री बांटने, उन्हें पढ़ाने और बंद स्कूलों के मुद्दे को उठाने के जरिए सपा एक तरफ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है, तो दूसरी तरफ अपने PDA एजेंडे को भी मजबूत करने की कोशिश कर रही है। अब देखना होगा कि यह अभियान प्रदेश के अन्य जिलों में किस स्तर तक पहुंचता है और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले स्कूलों का मुद्दा राजनीतिक रूप से कितना प्रभाव डालता है।









