मां वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन से वापस लाने की प्रक्रिया तेज, केंद्र सरकार ने म्यूजियम को लिखा पत्र

केंद्र सरकार ने लंदन में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा की वापसी के लिए म्यूजियम को पत्र भेजा है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद प्रक्रिया तेज हुई है।

भारत सरकार ने लंदन के म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। संस्कृति मंत्रालय ने संबंधित म्यूजियम को पत्र भेजा है। यह मुद्दा भोपाल में आयोजित ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक में भी प्रमुखता से उठा।

भोपाल: मां वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन से भारत वापस लाने के प्रयास तेज हो गए हैं। संस्कृति मंत्रालय ने संबंधित म्यूजियम को आधिकारिक पत्र भेजकर प्रतिमा की वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद इस मामले में तेजी आई है और सरकार इसे अपनी सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी के महत्वपूर्ण अभियान का हिस्सा मान रही है।

मां वाग्देवी की प्रतिमा की वापसी के लिए तेज हुई पहल

धार की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़ी मां वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन से भारत वापस लाने के लिए केंद्र सरकार ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। भोपाल में आयोजित ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया कि सरकार ने उस म्यूजियम को औपचारिक पत्र भेज दिया है, जहां यह प्रतिमा वर्तमान में सुरक्षित रखी गई है। सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है ताकि प्रतिमा को उसके मूल स्थान पर वापस लाया जा सके।

संस्कृति मंत्रालय का कहना है कि यह केवल एक प्रतिमा की वापसी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को उसके वास्तविक स्थान तक पहुंचाने का प्रयास है। इसी उद्देश्य से विदेशों में मौजूद भारतीय कलाकृतियों को वापस लाने के लिए लगातार पहल की जा रही है।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी प्रक्रिया

संस्कृति सचिव ने बताया कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में केंद्र सरकार को प्रतिमा की वापसी के लिए आवश्यक प्रयास करने का निर्देश दिया था। हालांकि, मंत्रालय के अनुसार इस दिशा में कार्रवाई अदालत के आदेश से पहले ही शुरू हो चुकी थी।

उन्होंने कहा कि पदभार संभालने के बाद उन्हें इस प्रतिमा की वापसी के संबंध में सुझाव मिला था, जिसके बाद संबंधित म्यूजियम से संपर्क स्थापित किया गया। अब सरकार कूटनीतिक और कानूनी स्तर पर सभी आवश्यक कदम उठा रही है ताकि प्रतिमा को भारत लाया जा सके।

11वीं सदी की है यह ऐतिहासिक प्रतिमा

मां वाग्देवी की यह संगमरमर की प्रतिमा 11वीं सदी की मानी जाती है और इसका संबंध परमार काल से बताया जाता है। ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार ब्रिटिश शासन के दौरान इसे धार से ले जाकर लंदन पहुंचाया गया था, जहां यह वर्तमान में ब्रिटिश म्यूजियम के संग्रह का हिस्सा है।

भारत सरकार इस प्रतिमा को भोजशाला की मां वाग्देवी की प्रतिमा मानती है, जबकि ब्रिटिश म्यूजियम अपने रिकॉर्ड में इसे जैन परंपरा की अंबिका देवी की प्रतिमा के रूप में दर्ज करता है। यही कारण है कि इसकी पहचान को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग मत हैं।

म्यूजियम के उपलब्ध विवरण के अनुसार यह चार भुजाओं वाली संगमरमर की प्रतिमा है, जिसकी ऊंचाई लगभग 1.28 मीटर और वजन करीब 250 किलोग्राम है। इसे भारतीय शिल्पकला की महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है।

भारतीय धरोहरों की वापसी पर सरकार का विशेष जोर

संस्कृति मंत्रालय के अनुसार हाल के वर्षों में विदेशों से कई भारतीय प्राचीन मूर्तियां और कलाकृतियां सफलतापूर्वक वापस लाई गई हैं। हाल ही में तमिलनाडु के एक मंदिर से जुड़ी प्रतिमा भी भारत लौटाई गई है, जबकि दो अन्य मूर्तियों की वापसी की प्रक्रिया अभी जारी है।

मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 के बाद अब तक करीब 650 भारतीय कलाकृतियां विदेशों से वापस लाई जा चुकी हैं। इससे पहले इतने लंबे समय में केवल 13 कलाकृतियां ही भारत लौट पाई थीं।

ब्रिक्स देशों की बैठक में भी सांस्कृतिक धरोहरों की अवैध तस्करी रोकने, औपनिवेशिक काल में विदेश ले जाई गई कलाकृतियों की वापसी और सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है। सरकार को उम्मीद है कि इन प्रयासों से मां वाग्देवी की प्रतिमा की भारत वापसी का मार्ग भी जल्द प्रशस्त होगा।

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