महेंद्रगढ़ में 4.22 करोड़ रुपये की डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। कई वार्डों में नियमित कचरा उठान नहीं होने से जगह-जगह कूड़े के ढेर लग गए हैं और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
Haryana: महेंद्रगढ़ नगर पालिका की डोर-टू-डोर कचरा उठान योजना शुरू होने के कुछ ही महीनों बाद सवालों के घेरे में आ गई है। शहर को स्वच्छ बनाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से शुरू की गई इस परियोजना का जमीनी असर सीमित दिखाई दे रहा है। कई क्षेत्रों में कचरा संग्रहण व्यवस्था प्रभावित होने से नागरिकों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
करोड़ों की योजना पर उठने लगे सवाल
नगर पालिका महेंद्रगढ़ ने शहर में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगभग 4.22 करोड़ रुपये की लागत से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण योजना शुरू की थी। इस योजना को आगामी पांच वर्षों के लिए लागू किया गया था और इसके तहत शहर के हर घर, व्यावसायिक प्रतिष्ठान तथा संस्थागत क्षेत्रों से नियमित रूप से कचरा उठाने का लक्ष्य रखा गया था।

योजना के शुभारंभ के समय इसे आधुनिक और तकनीक आधारित स्वच्छता मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया था। हालांकि कुछ महीनों बाद ही कई वार्डों में व्यवस्था की खामियां सामने आने लगी हैं।
कई इलाकों में नहीं पहुंच रहे कचरा वाहन
स्थानीय लोगों के अनुसार शहर के अनेक क्षेत्रों में कचरा उठाने वाले वाहन नियमित रूप से नहीं पहुंच रहे हैं। खासकर संकरी गलियों और आवासीय इलाकों में लोगों को कई दिनों तक वाहन का इंतजार करना पड़ता है।
इस वजह से नागरिक मजबूरी में सड़कों किनारे या पुराने डंपिंग प्वाइंट्स पर कचरा फेंक रहे हैं। परिणामस्वरूप शहर के कई हिस्सों में कूड़े के ढेर दिखाई देने लगे हैं, जिससे स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
वर्क प्लान के अनुसार नहीं हो रहा संचालन
योजना के तहत प्रत्येक कचरा वाहन के साथ चालक और हेल्पर की व्यवस्था अनिवार्य थी। लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकांश वाहनों में केवल चालक ही कार्य करता नजर आता है।
हेल्पर की अनुपस्थिति में लोगों को स्वयं घरों से कचरा उठाकर वाहन तक पहुंचाना पड़ता है। इसका सबसे अधिक असर बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों पर पड़ रहा है। कई नागरिकों ने इस व्यवस्था पर नाराजगी भी जताई है।
कचरा पृथक्करण व्यवस्था भी कमजोर
योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग एकत्रित करना था, ताकि वैज्ञानिक तरीके से उसका निस्तारण किया जा सके। हालांकि स्थानीय स्तर पर यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती नहीं दिख रही है।
लोगों का कहना है कि कचरा पृथक्करण को लेकर केवल जागरूकता संदेश दिए जा रहे हैं, जबकि व्यवहारिक स्तर पर अलग-अलग कचरा संग्रहण की व्यवस्था पर्याप्त रूप से दिखाई नहीं देती। इससे योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
एजेंसी को सौंपी गई है जिम्मेदारी
नगर पालिका ने इस परियोजना का संचालन The Hooda Cooperative L&C Society Limited को सौंपा है। एजेंसी को कचरा संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन और जागरूकता कार्यक्रमों की जिम्मेदारी दी गई थी।
योजना के तहत जीपीएस आधारित ट्रैकिंग, आरएफआईडी और क्यूआर कोड जैसी तकनीकों के उपयोग का भी प्रावधान किया गया था। साथ ही स्कूल कार्यक्रम, पोस्टर, पंपलेट और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से स्वच्छता जागरूकता बढ़ाने की योजना बनाई गई थी।
सुधार की उम्मीद में नागरिक
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए तो शहर की स्वच्छता व्यवस्था में बड़ा सुधार हो सकता है। हालांकि वर्तमान स्थिति में नियमित निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
लोगों की मांग है कि नगर पालिका और संबंधित एजेंसी जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं का समाधान करें, ताकि करोड़ों रुपये की लागत से शुरू की गई योजना अपने उद्देश्य को पूरा कर सके और शहर को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण मिल सके।












