मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने EC से शिकायत की, जबकि भोपाल में उपवास और प्रदर्शन हुए तथा RSS की गणवेश दफ्तर के बाहर टांगी गई।
भोपाल: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा खारिज किए जाने के बाद राज्य की राजनीति में भारी हलचल मच गई है। इस फैसले को कांग्रेस ने लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे नियमों के अनुसार लिया गया प्रशासनिक निर्णय बताया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव आयोग की भूमिका, नामांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता और राजनीतिक दलों के बीच टकराव को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।
नामांकन खारिज होने का कारण: हलफनामे में कथित जानकारी छिपाने का आरोप
रिटर्निंग ऑफिसर के अनुसार, मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र में एक महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाया गया था। आरोप है कि उनके खिलाफ तेलंगाना के हैदराबाद की एक अदालत में एक निजी परिवाद (क्रिमिनल शिकायत) लंबित था, जिसका उल्लेख हलफनामे (फॉर्म-26) में नहीं किया गया।
आदेश में कहा गया कि संबंधित मामले में 17 सितंबर 2025 को समन जारी हुआ था और उम्मीदवार को इसकी जानकारी थी। इसके बावजूद इस तथ्य को शपथ पत्र में शामिल नहीं किया गया, जिसे नियमों का उल्लंघन माना गया। इसी आधार पर नामांकन पत्र को अधूरा और अवैध घोषित कर दिया गया।
कांग्रेस का आरोप: लोकतंत्र पर हमला और राजनीतिक साजिश
नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस ने इसे “लोकतंत्र की हत्या” और “राजनीतिक साजिश” करार दिया है। पार्टी का कहना है कि यह निर्णय भारतीय जनता पार्टी के दबाव में लिया गया है और इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करना है।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि जिस मामले के आधार पर नामांकन खारिज किया गया है, वह न तो आपराधिक दोष सिद्ध मामला है और न ही अदालत ने उस पर कोई संज्ञान लिया है। पार्टी ने इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
चुनाव आयोग से मुलाकात: कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल दिल्ली रवाना
इस विवाद को लेकर कांग्रेस ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए 10 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली भेजा। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।
इस टीम में वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, रणदीप सुरजेवाला, सचिन पायलट, भूपेश बघेल, दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा सहित कई प्रमुख नेता शामिल रहे। पार्टी ने मांग की कि नामांकन रद्द करने के फैसले की निष्पक्ष समीक्षा की जाए।
भोपाल में कांग्रेस का विरोध: सामूहिक उपवास और प्रदर्शन
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस ने इस निर्णय के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। रोशनपुरा चौराहे पर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक उपवास रखा, जिसमें कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए।
इस विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव सहित कई नेता मौजूद रहे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और सरकार तथा चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की।
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RSS गणवेश विवाद: प्रतीकात्मक विरोध ने बढ़ाया तनाव
भोपाल में विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के बाहर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गणवेश टांगकर अपना विरोध दर्ज कराया। यह कदम राजनीतिक रूप से बेहद विवादास्पद माना जा रहा है और इसने राज्य की राजनीति में तनाव और बढ़ा दिया है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे “लोकतंत्र के अपमान” के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध बताया, जबकि विरोधियों ने इसे प्रशासनिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया।
कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी
इस पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रहा है और सत्ताधारी दल के प्रभाव में है।
वहीं भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नामांकन रद्द करना पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया निर्णय है। भाजपा का कहना है कि यदि नियमों का पालन नहीं किया गया तो कार्रवाई स्वाभाविक है।
वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया और कानूनी बहस
कांग्रेस के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को “कानूनी रूप से गलत और मनमाना” बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय तर्कहीन है और इसे न्यायिक समीक्षा की जरूरत है।
वहीं कुछ कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि यह फैसला “2+2 को गलत तरीके से 7 लिखने जैसा” है, जिससे यह संकेत दिया गया कि निर्णय तथ्यों पर आधारित नहीं है।
उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और अन्य भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष को आत्ममंथन करने की जरूरत है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि नामांकन में गंभीर अनियमितताएं थीं।
पूरे घटनाक्रम की समयरेखा में बढ़ा तनाव
मंगलवार से शुरू हुआ यह विवाद दिनभर राजनीतिक घटनाक्रमों से भरा रहा। विधायकों के स्थानांतरण की तैयारी, चुनाव आयोग से शिकायत, विरोध प्रदर्शन, और नामांकन रद्द होने तक की घटनाओं ने पूरे दिन को राजनीतिक संकट में बदल दिया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विधायकों की संभावित क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए यह पूरा घटनाक्रम प्रभावित किया गया, जबकि भाजपा ने इसे बेबुनियाद बताया।
कानूनी विकल्प और आगे की लड़ाई
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा के लिए हर कानूनी विकल्प का इस्तेमाल किया जाएगा।
चुनाव आयोग ने अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।









