मदर्स डे 2026: मई के दूसरे रविवार को ही क्यों मनाया जाता मदर्स डे है? जानिए दिल छू लेने वाला इतिहास

मदर्स डे 2026 हर साल मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं इसके पीछे का इतिहास क्या है? जानें इस खास दिन की शुरुआत कैसे हुई,

मदर्स डे को मई के दूसरे रविवार को मनाने की परंपरा की शुरुआत एक सामाजिक और भावनात्मक आंदोलन से जुड़ी है, न कि किसी पारंपरिक त्योहार से।इसकी आधुनिक शुरुआत अमेरिका में अन्ना जार्विस के प्रयासों से हुई।

Mother’s Day: मदर्स डे दुनिया भर में मनाए जाने वाले सबसे भावनात्मक और महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। यह दिन केवल एक उत्सव नहीं बल्कि मातृत्व, त्याग, प्रेम और समर्पण को सम्मान देने का अवसर है। हर साल यह दिन मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर यही तारीख क्यों चुनी गई? इसके पीछे एक बेहद प्रेरणादायक और भावुक इतिहास छिपा है, जिसकी शुरुआत एक बेटी के अपनी मां के प्रति गहरे प्रेम से हुई थी।

मदर्स डे की शुरुआत कैसे हुई?

मदर्स डे की शुरुआत का श्रेय अमेरिका की सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना जार्विस (Anna Jarvis) को दिया जाता है। अन्ना अपनी मां एन रीव्स जार्विस से बेहद जुड़ी हुई थीं। उनकी मां एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं, जिन्होंने अमेरिकी गृहयुद्ध के दौरान घायल सैनिकों की सेवा की थी और शांति के लिए काम किया था। एन रीव्स जार्विस का मानना था कि समाज में माताओं के योगदान को सम्मान देने के लिए एक विशेष दिन होना चाहिए। लेकिन वे अपने जीवनकाल में इस सपने को पूरा होते नहीं देख सकीं।

1905 में जब अन्ना जार्विस की मां का निधन हुआ, तब उन्होंने अपनी मां के अधूरे सपने को पूरा करने का निश्चय किया। अन्ना ने सोचा कि दुनिया में हर मां अपने बच्चों के लिए जो त्याग करती है, उसका सम्मान होना चाहिए। उन्होंने एक आंदोलन शुरू किया जिसमें यह मांग की गई कि माताओं के सम्मान में एक विशेष दिन घोषित किया जाए। यह केवल एक व्यक्तिगत श्रद्धांजलि नहीं थी, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बन गया।

मई का दूसरा रविवार क्यों चुना गया?

मदर्स डे के लिए मई का दूसरा रविवार चुनने के पीछे एक बहुत खास कारण जुड़ा हुआ है। अन्ना जार्विस की मां का निधन 9 मई 1905 को हुआ था। वह तारीख उस वर्ष मई का दूसरा रविवार थी। अपनी मां की स्मृति को जीवित रखने के लिए अन्ना ने इसी दिन को विशेष रूप देने का विचार रखा। इसके बाद 1908 में उन्होंने वर्जीनिया के ग्राफ्टन शहर में पहली आधिकारिक स्मृति सभा आयोजित की। इस आयोजन में उन्होंने सफेद कार्नेशन फूल बांटे, जिसे बाद में मदर्स डे का प्रतीक माना गया।

अन्ना जार्विस के लंबे संघर्ष और लगातार अभियान के बाद आखिरकार 1914 में उन्हें बड़ी सफलता मिली। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति वुडरो विल्सन (Woodrow Wilson) ने आधिकारिक घोषणा की कि हर वर्ष मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाएगा। इसके साथ ही यह दिन एक राष्ट्रीय अवकाश के रूप में भी मान्यता प्राप्त कर गया। इसके बाद धीरे-धीरे यह परंपरा दुनिया के कई देशों में फैल गई।

सफेद कार्नेशन का महत्व

मदर्स डे के साथ सफेद कार्नेशन फूल का गहरा संबंध है। अन्ना जार्विस ने इसे अपनी मां के सम्मान में चुना था। यह फूल शुद्धता, प्रेम और मातृत्व का प्रतीक माना जाता है। परंपरा के अनुसार, जीवित मां के लिए लाल कार्नेशन और दिवंगत मां के लिए सफेद कार्नेशन पहनने की प्रथा शुरू हुई। यह फूल आज भी कई देशों में मदर्स डे के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि जिस अन्ना जार्विस ने मदर्स डे की शुरुआत की थी, बाद में वही इसके व्यावसायीकरण से नाराज हो गईं। जैसे-जैसे यह दिन लोकप्रिय हुआ, कंपनियों ने इसे कार्ड, उपहार और फूल बेचने का माध्यम बना लिया। अन्ना को यह बिल्कुल पसंद नहीं था। उनका मानना था कि यह दिन केवल भावनाओं, सम्मान और मातृत्व के लिए होना चाहिए, न कि व्यापार के लिए। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्षों में इस व्यावसायिकता के खिलाफ अभियान भी चलाया।

दुनिया भर में मदर्स डे का विस्तार

आज मदर्स डे केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक परंपरा बन चुका है। भारत सहित 40 से अधिक देशों में यह मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। यूनाइटेड किंगडम में इसे अलग तारीख पर मनाया जाता है, जिसे ‘Mothering Sunday’ कहा जाता है। कई देशों में इसकी परंपराएं और रीति-रिवाज अलग-अलग हैं, लेकिन उद्देश्य एक ही है—मां का सम्मान। साल 2026 में मदर्स डे 10 मई 2026 को मनाया जाएगा। यह दिन रविवार को पड़ेगा, जैसा कि हर साल परंपरा के अनुसार होता है।

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