लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के दौरान भारतीय सेना की अधिकारी मेजर अभिलाषा बराक को महिलाओं और किशोरियों के सशक्तिकरण तथा जेंडर सेंसिटाइजेशन में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रतिष्ठित यूएन अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।
World News: लेबनान में संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत तैनात भारतीय शांतिरक्षक Abhilasha Barak को 2025 का प्रतिष्ठित “United Nations Military Gender Advocate of the Year Award” दिया जाएगा। यह सम्मान उन्हें लेबनान में महिलाओं और लड़कियों के बीच किए गए उनके प्रभावी आउटरीच कार्यों के लिए प्रदान किया जा रहा है।
अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने स्थानीय समुदाय की महिलाओं और किशोरियों के साथ सक्रिय रूप से जुड़कर शांति स्थापना प्रयासों को मजबूत किया और साथ ही संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षकों के लिए जेंडर-संवेदीकरण प्रशिक्षण भी आयोजित किए।
संयुक्त राष्ट्र ने भारतीय अधिकारी को किया सम्मानित
लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत तैनात भारतीय सेना की अधिकारी मेजर अभिलाषा बराक को वर्ष 2025 के “United Nations Military Gender Advocate of the Year Award” के लिए चुना गया है। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान उन सैन्य शांतिरक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी, सुरक्षा और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
यह घोषणा संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के विभाग द्वारा की गई। इस उपलब्धि को भारत के लिए भी एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय मान्यता के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि मेजर बराक अपने प्रभावी सामुदायिक कार्यों के कारण वैश्विक स्तर पर पहचान बना रही हैं।
लेबनान में शांति मिशन के दौरान उल्लेखनीय कार्य
मेजर अभिलाषा बराक वर्तमान में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के साथ भारतीय बटालियन में फीमेल एंगेजमेंट टीम (FET) की कमांडर के रूप में कार्यरत हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने स्थानीय महिलाओं और किशोरियों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए कई आउटरीच कार्यक्रमों का संचालन किया। उनकी प्रमुख गतिविधियों में शामिल हैं—
- महिलाओं और युवतियों के साथ सामुदायिक संवाद स्थापित करना
- शिक्षा, सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता अभियान
- शांतिरक्षकों के लिए जेंडर सेंसिटाइजेशन प्रशिक्षण आयोजित करना
- स्थानीय समुदायों के साथ भरोसेमंद संबंध विकसित करना
इन प्रयासों ने न केवल स्थानीय स्तर पर महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाया, बल्कि शांति अभियानों में लैंगिक दृष्टिकोण को भी मजबूत किया।

भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट
मेजर अभिलाषा बराक भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट भी हैं। उनकी यह उपलब्धि भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है। सैन्य सेवा में उनकी बहुआयामी भूमिका ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बना दिया है। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार 29 मई को अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रदान किया जाएगा।
इस सम्मान के साथ मेजर बराक भारत की तीसरी अधिकारी बन जाएंगी जिन्हें यह वैश्विक पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इससे पहले यह सम्मान प्राप्त करने वाली भारतीय अधिकारियों में शामिल हैं—
- मेजर सुमन गवानी (2019) – दक्षिण सूडान
- मेजर राधिका सेन (2023) – कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य
- UN Military Gender Advocate Award क्या है?
यह पुरस्कार वर्ष 2016 में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के सैन्य मामलों के कार्यालय द्वारा शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य उन सैन्य शांतिरक्षकों को सम्मानित करना है जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 (Women, Peace and Security) के सिद्धांतों को सक्रिय रूप से लागू करते हैं। यह पहल संघर्ष क्षेत्रों में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने और शांति प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर केंद्रित है।









