Mohan Bhagwat का नेताओं पर तंज, बोले- 'चुनाव नजदीक आते ही सेवा करने वाले लोग ज्यादा दिखने लगते हैं'

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आते ही सेवा करने वाले लोग ज्यादा दिखने लगते हैं। उनके बयान के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि कई बार बड़ी संख्या में सेवा करने वाले लोग अचानक दिखाई देने लगते हैं, तो लगता है कि आसपास कोई चुनाव होने वाला है। उन्होंने यह बात नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम के दौरान नेताओं और चुनावी राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब अचानक बड़ी संख्या में सेवा करने वाले लोग दिखाई देने लगते हैं, तो समझ लेना चाहिए कि चुनाव नजदीक हैं। उन्होंने कहा कि सच्ची सेवा कर्तव्य की भावना से होती है, न कि किसी स्वार्थ या राजनीतिक लाभ के लिए।

भागवत महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जहां गंगाधर राव फडणवीस मेमोरियल डायग्नोस्टिक सेंटर का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पिता की स्मृति में बनाया गया है।

सेवा को बताया कर्तव्य, नहीं उपकार

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा में सेवा को कभी उपकार नहीं माना गया, बल्कि यह हर व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति निस्वार्थ भाव से सेवा करता है, तो उसका मन शुद्ध होता है और वह स्वयं भी बेहतर इंसान बनता है। उन्होंने कहा,

'हमारे यहां सेवा का मतलब किसी पर उपकार करना नहीं है। सेवा करना हमारा कर्तव्य है। जब हम सेवा करते हैं तो हम खुद पवित्र होते हैं, क्योंकि सेवा के दौरान इंसान अपने स्वार्थ को भूल जाता है।'

भागवत ने यह भी कहा कि मनुष्य के भीतर अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के विचार होते हैं, लेकिन सेवा का भाव मन को शुद्ध करने का काम करता है।

चुनाव के समय बढ़ जाती है सेवा करने वालों की संख्या

अपने भाषण में उन्होंने हल्के अंदाज में राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कई बार सेवा करने वाले लोग अचानक बड़ी संख्या में दिखाई देने लगते हैं।उन्होंने कहा,

'कई बार सेवा करने वाले लोग हमें बड़ी मात्रा में दिखते हैं, तब हम समझ जाते हैं कि आसपास कोई चुनाव है। उस समय बहुत लोग सेवा के काम में जुड़ जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उनमें से कितने लोग दिखाई देते हैं, यह भी देखना चाहिए।'

भागवत ने कहा कि अगर सेवा के पीछे स्वार्थ हो, तो वह लंबे समय तक नहीं टिकती। कुछ लोग डर, मजबूरी या लाभ की उम्मीद से भी सेवा करते हैं, लेकिन सच्ची सेवा वही है जिसमें किसी प्रकार का स्वार्थ न हो।

पहले भी दे चुके हैं ऐसा संदेश

यह पहली बार नहीं है जब मोहन भागवत ने सेवा और राजनीति को लेकर इस तरह की टिप्पणी की है। इससे पहले भी चुनाव के बाद उन्होंने कहा था कि सच्चा सेवक कभी अहंकारी नहीं होता और सेवा दिखावे के लिए नहीं बल्कि समाज के लिए होनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि चुनाव के समय प्रचार और सामाजिक गतिविधियां अचानक बढ़ जाती हैं, लेकिन असली सेवा वह है जो लगातार बिना किसी अपेक्षा के की जाए।

भागवत ने अपने भाषण में यह भी कहा कि समाज में स्थायी परिवर्तन केवल निस्वार्थ सेवा से ही संभव है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि सेवा को राजनीतिक लाभ या व्यक्तिगत पहचान से जोड़कर न देखें। उनके अनुसार,

  • सेवा का उद्देश्य समाज का कल्याण होना चाहिए
  • सेवा में निरंतरता जरूरी है
  • स्वार्थ से की गई सेवा लंबे समय तक नहीं चलती

भागवत के इस बयान को राजनीतिक हलकों में भी चर्चा के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि चुनावी समय में नेताओं द्वारा किए जाने वाले सामाजिक कार्यक्रमों को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं।

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