मुजफ्फरपुर में मशरूम क्लस्टर योजना को लेकर चल रहा विवाद अब SDO कोर्ट तक पहुंच गया है। मामले में वाद दायर किए जाने के बाद अब अदालत में इसकी सुनवाई होगी। कोर्ट ने सुनवाई के लिए 19 अगस्त की तारीख तय की है। दूसरी ओर, मशरूम क्लस्टर योजना से जुड़ी जीविका दीदियां अपनी मांगों को लेकर पिछले दो दिनों से अनशन पर बैठी थीं। महिलाओं का आरोप है कि योजना के नाम पर उन्हें आर्थिक परेशानी में डाल दिया गया, जबकि जिस उद्देश्य से क्लस्टर शुरू किया जाना था, वह जमीन पर पूरा नहीं हो सका।
मामले को लेकर पिछले कई दिनों से महिलाओं और संबंधित पक्षों के बीच विवाद बना हुआ है। जीविका दीदियों की शिकायत है कि मशरूम उत्पादन के जरिए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का सपना दिखाया गया था, लेकिन योजना के क्रियान्वयन में गंभीर गड़बड़ियां हुईं। इसी को लेकर महिलाओं ने प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखीं और कार्रवाई की मांग की।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब प्रशासनिक स्तर की कार्रवाई के साथ न्यायिक प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। SDO कोर्ट में वाद दायर होने के बाद अब दोनों पक्षों की बात अदालत के सामने रखी जाएगी। 19 अगस्त की सुनवाई में मामले से जुड़े दस्तावेज और पक्षकारों की दलीलें सामने आने की उम्मीद है।
मशरूम क्लस्टर योजना से जुड़ा विवाद पहले भी प्रशासन के सामने उठ चुका है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक मुजफ्फरपुर में मशरूम उत्पादन शुरू नहीं होने के बावजूद कुछ जीविका दीदियों पर बैंक लोन की वसूली का दबाव बना था। बोचहां प्रखंड की 10 महिलाओं के मामले में 33.20 लाख रुपये से अधिक के ऋण का उल्लेख सामने आया था। बैंक की ओर से ऋण चुकाने के लिए नोटिस दिए जाने की बात भी रिपोर्ट हुई थी।
महिलाओं का कहना था कि उन्होंने सरकारी योजना पर भरोसा करके मशरूम उत्पादन का काम शुरू करने की तैयारी की थी। इसके लिए बैंक से लोन लिया गया, लेकिन जमीन पर अपेक्षित ढांचा और उत्पादन शुरू नहीं हो सका। ऐसे में महिलाओं के सामने एक तरफ रोजगार शुरू नहीं होने की समस्या रही, तो दूसरी तरफ बैंक ऋण चुकाने का दबाव भी बढ़ गया।
मामले को लेकर प्रशासनिक जांच भी की गई। एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक जांच टीम ने संबंधित एजेंसी को मशरूम क्लस्टर शुरू करने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम पूरा करने का निर्देश दिया था। रिपोर्ट में 10 क्लस्टर को चालू करने और 15 अक्टूबर तक काम पूरा करने की समयसीमा का भी उल्लेख किया गया है।
इसी बीच जीविका दीदियों ने अपनी मांगों को लेकर अनशन का रास्ता अपनाया। महिलाओं का कहना था कि जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक वे अपनी आवाज उठाती रहेंगी। दो दिनों तक अनशन पर बैठी महिलाओं ने प्रशासन से मामले में स्पष्ट और ठोस कार्रवाई की मांग की।
महिलाओं की मुख्य चिंता आर्थिक नुकसान को लेकर है। उनका कहना है कि उन्होंने योजना को रोजगार का माध्यम समझकर इसमें भाग लिया था। अगर योजना समय पर शुरू होती तो उत्पादन से आमदनी होती और बैंक का कर्ज भी चुकाया जा सकता था। लेकिन उत्पादन नहीं होने से उनके सामने कर्ज और आर्थिक दबाव की स्थिति पैदा हो गई।
मामले के SDO कोर्ट पहुंचने के बाद अब महिलाओं को न्यायिक प्रक्रिया से समाधान की उम्मीद है। 19 अगस्त की सुनवाई में कोर्ट के सामने मामले के अलग-अलग पहलुओं को रखा जाएगा। इसमें योजना से जुड़े दस्तावेज, आर्थिक लेन-देन, क्लस्टर के निर्माण और उसके संचालन की स्थिति जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
प्रशासनिक जांच में यदि किसी एजेंसी या अन्य पक्ष की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता भी साफ हो सकता है। वहीं अदालत में दायर वाद के बाद संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
मशरूम क्लस्टर योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को कृषि आधारित स्वरोजगार से जोड़ना और उनकी आमदनी बढ़ाना था। ऐसी योजनाओं में महिलाओं को प्रशिक्षण, उत्पादन की सुविधा, बाजार और बिक्री की व्यवस्था उपलब्ध कराना जरूरी होता है। यदि इनमें से किसी स्तर पर कमी रह जाती है तो योजना का लाभ सीधे लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पाता।
मुजफ्फरपुर मामले में भी यही सवाल उठ रहा है कि योजना के लिए स्वीकृत धनराशि और बैंक ऋण का इस्तेमाल किस तरह हुआ और जमीन पर वास्तविक स्थिति क्या रही। महिलाओं की शिकायतों के बाद इन पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
विवाद बढ़ने के साथ अब यह मामला केवल महिलाओं की शिकायत तक सीमित नहीं रहा। प्रशासनिक जांच, एजेंसी पर कार्रवाई की तैयारी और SDO कोर्ट में वाद दायर होने से मामले की कानूनी दिशा भी तय होने लगी है।
जीविका दीदियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि उन्हें आर्थिक नुकसान से कैसे राहत मिलेगी और मशरूम क्लस्टर योजना वास्तव में कब शुरू होगी। अगर क्लस्टर चालू होते हैं तो महिलाओं को अपने रोजगार के सपने को पूरा करने का मौका मिल सकता है। वहीं अगर योजना में वित्तीय अनियमितता या धोखाधड़ी की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई की मांग भी तेज हो सकती है।
इस मामले में 19 अगस्त की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोर्ट में वाद की सुनवाई के दौरान सामने आने वाले तथ्यों से यह स्पष्ट हो सकता है कि विवाद की वास्तविक स्थिति क्या है और आगे किस दिशा में कार्रवाई होगी।
फिलहाल अनशन पर बैठी जीविका दीदियों ने प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया से समाधान की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि वे किसी तरह का विवाद नहीं चाहतीं, बल्कि अपनी मेहनत और आर्थिक हितों की सुरक्षा चाहती हैं। महिलाओं की मांग है कि योजना से जुड़ी पूरी स्थिति की निष्पक्ष जांच हो और यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो उसे ठीक कराया जाए।
कुल मिलाकर, मुजफ्फरपुर का मशरूम क्लस्टर विवाद अब SDO कोर्ट तक पहुंच गया है। मामले में वाद दायर होने के बाद 19 अगस्त को सुनवाई होगी। वहीं अपनी मांगों को लेकर जीविका दीदियां दो दिनों से अनशन पर बैठी थीं। प्रशासनिक जांच में भी योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठ चुके हैं। अब सबकी नजर 19 अगस्त की सुनवाई और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर है।











