देश की नीति निर्माण संस्था NITI Aayog में पश्चिम बंगाल से दो प्रमुख नामों को अहम जिम्मेदारी मिली है। अर्थशास्त्री Ashok Lahiri को उपाध्यक्ष बनाया जाएगा, जबकि वैज्ञानिक Govardhan Das को सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है।
नई दिल्ली: भारत के नीति निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाने वाले नीति आयोग में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। इस नए पुनर्गठन में पश्चिम बंगाल से जुड़े दो प्रमुख व्यक्तित्वों को शीर्ष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि प्रतिष्ठित वैज्ञानिक गोवर्धन दास को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
इन नियुक्तियों को विशेषज्ञता आधारित नीति निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे भारत के विकास एजेंडे को नई गति मिलने की उम्मीद है।
अशोक लाहिड़ी बने नीति आयोग के उपाध्यक्ष
डॉ. अशोक लाहिड़ी भारत के सबसे अनुभवी अर्थशास्त्रियों में से एक माने जाते हैं। चार दशकों से अधिक के करियर में उन्होंने देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण संस्थानों में काम किया है। वे भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं और 15वें वित्त आयोग के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
इसके अलावा, लाहिड़ी विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और एशियाई विकास बैंक जैसी वैश्विक संस्थाओं से भी जुड़े रहे हैं। उनकी विशेषज्ञता सार्वजनिक वित्त, कर नीति और आर्थिक सुधारों में मानी जाती है। कोलकाता की बौद्धिक परंपरा से जुड़े लाहिड़ी को नीति-निर्माण में संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है।
उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की है। उनकी नियुक्ति को सरकार के “विकसित भारत” के विज़न को मजबूत करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
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गोवर्धन दास को नीति आयोग में अहम जिम्मेदारी
नीति आयोग में शामिल दूसरे प्रमुख नाम वैज्ञानिक डॉ. गोवर्धन दास हैं, जो मॉलिक्यूलर साइंस और इम्यूनोलॉजी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक हैं। वे वर्तमान में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), भोपाल के निदेशक हैं। डॉ. दास का शोध विशेष रूप से तपेदिक (Tuberculosis) और संक्रामक रोगों के अध्ययन पर केंद्रित रहा है।
उन्होंने अपने वैज्ञानिक करियर में अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी, ह्यूस्टन मेथोडिस्ट हॉस्पिटल, दक्षिण अफ्रीका की क्वाज़ुलु-नटाल यूनिवर्सिटी और नेशनल रिसर्च फाउंडेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रह चुके डॉ. दास ने वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।









