महिलाओं पर टिप्पणी मामले में पूर्णिया सांसद के खिलाफ पटना के शास्त्रीनगर थाने में आवेदन दिया गया है। शिकायत जदयू की प्रदेश सचिव Reena Kumari Chaudhary द्वारा दर्ज कराई गई है, जिसमें एफआईआर की मांग की गई है।
पटना: पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव एक विवादित बयान को लेकर गंभीर कानूनी और राजनीतिक घेराबंदी में आ गए हैं। राजनीति में आने वाली महिलाओं पर की गई कथित टिप्पणी के मामले में पटना के शास्त्रीनगर थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला जनता दल (यूनाइटेड) की प्रदेश सचिव रीना कुमारी चौधरी द्वारा दर्ज कराया गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बयान से शुरू हुआ विवाद
शिकायत के अनुसार, यह विवाद 20 और 21 अप्रैल को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए गए बयान से जुड़ा है। आरोप है कि सांसद ने राजनीति में सक्रिय महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी की, जिससे व्यापक विरोध शुरू हो गया। एफआईआर में कहा गया है कि सांसद के बयान से महिलाओं की गरिमा और सामाजिक सम्मान को ठेस पहुंची है, जिसके बाद यह कानूनी कार्रवाई की गई।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि पप्पू यादव के बयान में यह दावा किया गया कि राजनीति में आने वाली बड़ी संख्या में महिलाएं पुरुष नेताओं के साथ संबंधों के जरिए आगे बढ़ती हैं। इस तरह की टिप्पणी को शिकायतकर्ता ने बेहद आपत्तिजनक, अपमानजनक और महिलाओं के आत्मसम्मान पर सीधा हमला बताया है।
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एफआईआर में लगाए गए आरोप
शास्त्रीनगर थाने में दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि यह बयान न केवल महिलाओं के प्रति असम्मानजनक है, बल्कि यह सार्वजनिक जीवन में सक्रिय महिलाओं के लिए एक नकारात्मक और डर का माहौल पैदा करता है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ऐसे बयान देश सेवा और राजनीति में भाग लेने वाली महिलाओं के आत्मविश्वास को कमजोर करते हैं और समाज में गलत संदेश फैलाते हैं।
इस मामले के सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों और महिला संगठनों ने इस बयान की कड़ी आलोचना की है। कई संगठनों ने इसे महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बताया है और सार्वजनिक माफी की मांग की है। राज्य महिला आयोग ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए सांसद को नोटिस जारी किया है। आयोग ने उनसे बयान पर स्पष्टीकरण देने को कहा है और मामले की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कुछ संगठनों और नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष से पप्पू यादव की सदस्यता पर कार्रवाई की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि इस तरह के बयान संसदीय मर्यादा और सार्वजनिक आचरण के खिलाफ हैं।










