नेपाल में बाढ़ के अज्ञात शवों को DNA सैंपल के बाद दफनाया जा रहा, अब तक 29 की पहचान

नेपाल में बाढ़ के अज्ञात शवों को DNA और फोरेंसिक सैंपल के बाद दफनाया जा रहा है। 669 शवों में सिर्फ 29 की पहचान हुई है, बाकी की जांच जारी है।

नेपाल में बाढ़ में मारे गए अज्ञात लोगों के शवों को DNA और फोरेंसिक सैंपल सुरक्षित करने के बाद दफनाया जा रहा है। मुर्दाघरों में जगह खत्म होने के बीच 650 से अधिक शव मिले हैं, जिनमें केवल 29 की पहचान हुई है।

नुवाकोट: नेपाल में भोटेकोशी-त्रिशूली-नारायणी बाढ़ के बाद बरामद अज्ञात शवों को DNA और फोरेंसिक सैंपल लेने के बाद दफनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लगातार शव मिलने और मुर्दाघरों में जगह की कमी के कारण अधिकारियों ने यह कदम उठाया है। शुरुआती 669 शवों में से 211 बुरी तरह क्षतिग्रस्त या अधूरे मिले हैं, जबकि अब तक सिर्फ 29 शवों की पहचान हो सकी है।

DNA और फोरेंसिक सैंपल सुरक्षित करने के बाद दफनाए जा रहे शव

नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद नदियों से बरामद हो रहे अज्ञात शवों की पहचान अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। शवों की संख्या बढ़ने और मुर्दाघरों में पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण अब DNA और अन्य फोरेंसिक सबूत सुरक्षित करने के बाद अज्ञात शवों को दफनाया जा रहा है।

नेपाल में बाढ़ के अज्ञात शवों को DNA सैंपल के बाद दफनाया जा रहा, अब तक 29 की पहचान

अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ के बाद अब तक 650 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं। नेपाल पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक शुरुआती 669 शवों में 211 शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त, अधूरे या कटे-फटे मिले थे। कई शव दो से तीन दिनों तक पानी और मोटी कीचड़ के नीचे दबे रहे, जिससे उनकी पहचान और मुश्किल हो गई।

अब तक केवल 29 शवों की पहचान हो पाई है। बाकी शवों की पहचान के लिए DNA, फिंगरप्रिंट और दूसरे फोरेंसिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जा रहे हैं।

चितवन में मिले सबसे ज्यादा शव

बाढ़ के दौरान रसुवा से बहकर आए शव नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी समेत कई जिलों में मिले हैं। इनमें से कई शव उन स्थानों से काफी दूर बरामद हुए, जहां से लोग लापता हुए थे।

चितवन इस मामले में सबसे बड़ा केंद्र बनकर सामने आया है। रविवार तक यहां त्रिशूली और नारायणी नदियों के किनारे 259 शव बरामद किए जा चुके थे। इनमें से केवल नौ शवों की पहचान हो सकी।

अधिकारियों ने पोस्टमार्टम और DNA सैंपल लेने के बाद बिना पहचान वाले शवों को देवघाट जंगल में दफनाना शुरू किया। पहले चरण में 26 शवों को दफनाया गया।

हर शव का रिकॉर्ड और पहचान नंबर तैयार

अज्ञात शवों को दफनाने से पहले पूरी प्रक्रिया दर्ज की जा रही है, ताकि भविष्य में परिवार अपने लापता परिजनों की पहचान कर सकें। हर शव को एक अलग पहचान नंबर दिया जा रहा है। इसके साथ शव की तस्वीर, शारीरिक पहचान, कपड़े, गहने और उसके साथ मिली दूसरी वस्तुओं का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।

अधिकारियों ने DNA और फिंगरप्रिंट समेत अन्य फोरेंसिक सैंपल भी सुरक्षित रखे हैं। दफनाए गए शवों की जगहों को जियो-टैग किया जा रहा है। इससे भविष्य में किसी परिवार की ओर से पहचान की पुष्टि होने पर संबंधित शव या उसके अवशेषों को खोजने में मदद मिल सकेगी।

गोरखा और नवलपरासी में भी दफनाए गए शव

गोरखा जिले में भी DNA सैंपल लेने के बाद 29 अज्ञात शवों और शरीर के अंगों को दफनाया गया है। मुख्य जिला अधिकारी तुलसी प्रसाद श्रेष्ठ के अनुसार, जिले में शव रखने के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं और लगातार नए शव बरामद हो रहे हैं।

नवलपरासी ईस्ट में भी रविवार से इसी तरह की प्रक्रिया शुरू की गई। वहां फोरेंसिक सैंपल लेने और पहचान नंबर दर्ज करने के बाद 20 अज्ञात शवों को दफनाया गया।

निजी चीजों से भी अपनों की पहचान कर रहे परिवार

बाढ़ में लापता लोगों के परिजन अपने रिश्तेदारों की पहचान के लिए शवों की तस्वीरों और उनके साथ मिली निजी वस्तुओं का सहारा ले रहे हैं। शनिवार को 1,000 से अधिक रिश्तेदार पोखरा पहुंचे थे, जहां निचले इलाकों के जिलों से लाए गए 102 शवों की तस्वीरें दिखाई गईं।

कई मामलों में परिवारों ने टैटू, हार, झुमके और यहां तक कि स्कूल यूनिफॉर्म जैसी चीजों से अपने प्रियजनों की पहचान की। एक पिता ने ऑनलाइन उपलब्ध तस्वीर देखकर अपने पांच साल के बेटे की पहचान की। बच्चे का शव नवलपरासी में काफी दूर निचले इलाके से बरामद हुआ था।

पुलिस के मुताबिक, जिन शवों के चेहरे पहचानने की स्थिति में नहीं हैं, वहां परिवार कपड़ों और दूसरी व्यक्तिगत चीजों के आधार पर पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। लगातार शव मिलने के कारण आने वाले दिनों में भी पहचान और फोरेंसिक प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है।

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