पाकिस्तान ईरान-अमेरिका युद्ध में मध्यस्थ बनने का दावा कर रहा है। विदेश मंत्री इशाक डार ने मिस्र और तुर्की मंत्रियों से वार्ता की। लेकिन अफगानिस्तान और बलूचिस्तान की समस्याएं इसे वास्तविक नियंत्रण में रोक रही हैं।
Iran US War: पाकिस्तान इस समय अपने भीतर गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है। अफगानिस्तान और बलूचिस्तान में सुरक्षा और राजनीतिक संकट बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में मध्यस्थता की भूमिका निभाने का दावा कर रहा है। इस्लामाबाद में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार इस समय पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर शांति वार्ता को लेकर इस्लामिक राष्ट्रों के साथ चर्चा कर रहे हैं।
इशाक डार की बैठकों का मकसद
इशाक डार ने रविवार को मिस्र और तुर्की के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की। यह मुलाकात सऊदी अरब सहित होने वाले चौपक्षीय शिखर सम्मेलन से पहले हुई, जिसमें पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और शांति वार्ता के प्रयासों पर चर्चा की गई। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के अनुसार, इस बैठक में पाकिस्तान और मिस्र ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और पिछले उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान के सकारात्मक असर पर संतोष व्यक्त किया। इसमें नवंबर 2025 में अब्देलअत्ती की पाकिस्तान यात्रा भी शामिल थी।
सऊदी अरब और अन्य देश शामिल
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान और मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलअत्ती इशाक डार के निमंत्रण पर इस्लामाबाद आए। बैठक में क्षेत्रीय शांति और संघर्ष को कम करने के लिए संभावित प्रयासों पर चर्चा की गई। पाकिस्तान यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह ईरान-अमेरिका युद्ध को खत्म करवा सकता है और इस्लामिक राष्ट्रों के बीच मध्यस्थ का काम कर रहा है।
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पाकिस्तान का दावा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के मध्यस्थता वाले पोस्ट को साझा किए जाने के बाद इस्लामाबाद इस स्थिति को बड़े सम्मान के रूप में दिखा रहा है। पाकिस्तान अब खुद को इस्लामिक राष्ट्रों का नेतृत्वकर्ता यानी ‘चौधरी’ बता रहा है। हालांकि वास्तविकता यह है कि पाकिस्तान अपने देश की समस्याओं को संभालने में नाकाम है। अफगानिस्तान और बलूचिस्तान के मोर्चे पर पाकिस्तान को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, और घरेलू स्तर पर उसे कई संकटों से जूझना पड़ रहा है।
गाजा और फिलिस्तीनी समर्थन
पाकिस्तान ने फिलिस्तीनी लोगों के प्रति अपना अटूट समर्थन भी दोहराया। इशाक डार ने गाजा और वेस्ट बैंक में इजरायली कब्जे और आक्रामकता की कड़ी निंदा की। पाकिस्तान ने कहा कि गाजा के लोगों को मानवीय सहायता पहुंचाने में मिस्र की भूमिका सराहनीय है और पाकिस्तान के राहत प्रयासों को भी इसके तहत शामिल किया गया। बैठक में यह भी तय किया गया कि संयुक्त राष्ट्र और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर पाकिस्तान और मिस्र आपसी समन्वय जारी रखेंगे।
पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान की यह कोशिश कि वह ईरान-अमेरिका युद्ध में मध्यस्थ बनकर क्षेत्रीय शांति स्थापित करे, इसे राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि देश के भीतर सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए पाकिस्तान की यह भूमिका केवल कागजों तक सीमित रह सकती है। अफगानिस्तान में तालिबान और बलूचिस्तान में अलगाववादियों के कारण पाकिस्तान का संसाधनों और सैन्य ताकत दोनों पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में पाकिस्तान का दावा कि वह युद्ध को खत्म करवा सकता है, वास्तविकता से काफी दूर प्रतीत होता है।









