पटना जंक्शन पर बढ़ते यात्री और ट्रेनों के दबाव को कम करने के उद्देश्य से हार्डिंग पार्क में विकसित किया जा रहा नया पैसेंजर टर्मिनल अभी निर्माण की धीमी रफ्तार में फंसा हुआ है। करीब 95 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को पटना की उपनगरीय रेल व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन टेंडर अवार्ड होने के करीब 24 महीने बाद भी पहले चरण का 10 प्रतिशत काम पूरा नहीं हो सका है। रेलवे की योजना के अनुसार इस टर्मिनल के पहले चरण को निर्धारित समय में पूरा कर यात्री ट्रेनों का संचालन यहां से शुरू करना था, लेकिन वाशिंग पिट लाइन से जुड़ी तकनीकी और परिचालन संबंधी बाधाओं के कारण निर्माण की गति प्रभावित हुई है।
हार्डिंग पार्क पैसेंजर टर्मिनल परियोजना का उद्देश्य पटना जंक्शन की मुख्य लाइन पर मौजूद दबाव को कम करना है। योजना पूरी होने के बाद लोकल और मेमू जैसी यात्री ट्रेनों के एक हिस्से का परिचालन हार्डिंग पार्क से किया जाना प्रस्तावित है। इससे पटना जंक्शन पर ट्रेनों के परिचालन के लिए उपलब्ध क्षमता बढ़ाने और स्थानीय यात्रियों के लिए अलग टर्मिनल उपलब्ध कराने की योजना है। रेलवे के आधिकारिक प्रोजेक्ट दस्तावेज में भी हार्डिंग पार्क में पांच टर्मिनल प्लेटफार्म विकसित करने और पटना जंक्शन की हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने को परियोजना के प्रमुख लाभों में शामिल किया गया है।
इस परियोजना का टेंडर सितंबर 2024 में करीब 95 करोड़ रुपये की लागत पर अवार्ड किया गया था। शुरुआती योजना के अनुसार प्रथम चरण का काम करीब 12 महीने में पूरा किया जाना था। बाद में रेलवे ने दिसंबर 2026 तक पहले चरण को पूरा करने का लक्ष्य रखा। अब सितंबर 2026 का अंत आ चुका है और लक्ष्य की समय सीमा भी नजदीक है, जबकि परियोजना की भौतिक प्रगति अभी 10 प्रतिशत से भी कम बताई जा रही है। ऐसे में दिसंबर तक निर्धारित काम पूरा करने को लेकर स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
परियोजना की सबसे बड़ी बाधा हार्डिंग पार्क क्षेत्र में मौजूद वाशिंग पिट लाइन को बताया गया है। निर्माण क्षेत्र में रेलवे की मौजूदा परिचालन व्यवस्था और वाशिंग पिट से जुड़ी गतिविधियों के कारण निर्माण एजेंसी को पर्याप्त कार्यक्षेत्र नहीं मिल पा रहा है। एक तरफ मौजूदा रेल परिचालन को प्रभावित किए बिना व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत है, तो दूसरी तरफ नए टर्मिनल के लिए ट्रैक, प्लेटफार्म और भवन निर्माण का काम भी आगे बढ़ाना है। यही समन्वय निर्माण की रफ्तार को प्रभावित कर रहा है।
वाशिंग पिट से जुड़ी बाधा का असर केवल एक हिस्से के निर्माण तक सीमित नहीं है। इसके कारण नए रेल ट्रैक की लिंकिंग और प्लेटफार्म से जुड़े कई काम भी प्रभावित हुए हैं। एसएनटी यानी सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन भवन के निर्माण की प्रगति भी इसी वजह से प्रभावित होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। रेलवे के लिए चुनौती यह है कि टर्मिनल के निर्माण के दौरान मौजूदा रेल परिचालन भी जारी रखना है और निर्माण के लिए आवश्यक जगह भी उपलब्ध करानी है।
परियोजना की धीमी प्रगति को लेकर रेलवे स्तर पर समीक्षा भी हो चुकी है। 30 अप्रैल 2026 को पूर्व मध्य रेल के तत्कालीन महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने पटना की रेल परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में हार्डिंग पार्क टर्मिनल के काम की स्थिति पर निर्देश दिए थे। फेज-एक के ट्रैक लिंकिंग, बाउंड्री वाल, ब्रिज एक्सटेंशन और एसएंडटी भवन से जुड़े कामों को तेज करने तथा तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए समयसीमा तय की गई थी। इसके साथ ही दूसरे चरण के डिजाइन को भी जल्द तैयार करने के निर्देश दिए गए थे।
हालांकि इसके बाद भी परियोजना की रफ्तार में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई दी। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पांच महीने बीतने के बाद भी निर्माण का बड़ा हिस्सा आगे नहीं बढ़ सका है। साइट पर चहारदीवारी से जुड़े काम जरूर आगे बढ़े हैं, लेकिन मुख्य टर्मिनल ढांचे, प्लेटफार्म और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। यही वजह है कि रेलवे के सामने अब तय समय सीमा के भीतर काम पूरा करने की चुनौती बनी हुई है।
हार्डिंग पार्क टर्मिनल के पहले चरण में पांच प्लेटफार्म और पांच रेल लाइन तैयार करने की योजना है। इसके अलावा जी+4 स्टेशन भवन, जी+6 एसएनटी भवन, सबवे, फुट ओवरब्रिज, सिग्नल एवं टेलीकम्युनिकेशन भवन और यात्रियों से जुड़ी अन्य सुविधाएं विकसित की जानी हैं। प्लेटफार्मों पर कवर शेड लगाने की भी योजना है, ताकि यात्रियों को मौसम से बचाव मिल सके।
शुरुआत में हार्डिंग पार्क टर्मिनल पर चार प्लेटफार्म बनाने की योजना थी। अप्रैल 2024 में रेलवे बोर्ड से परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद यहां मेमू और लोकल ट्रेनों के संचालन के लिए टर्मिनल विकसित करने की योजना सामने आई थी। बाद में पहले चरण में प्लेटफार्मों की संख्या बढ़ाकर पांच कर दी गई। रेलवे की योजना में बड़ी संख्या में लोकल ट्रेनों को हार्डिंग पार्क से चलाने की संभावना भी जताई गई थी।
इस परियोजना को पटना जंक्शन के पुनर्विकास और भविष्य की यात्री क्षमता से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पटना जंक्शन राजधानी के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शामिल है और यहां अलग-अलग श्रेणी की ट्रेनों का संचालन होता है। यदि लोकल और उपनगरीय ट्रेनों का एक हिस्सा अलग टर्मिनल से संचालित होता है तो मुख्य स्टेशन की लाइन क्षमता के इस्तेमाल का तरीका बदला जा सकता है। हार्डिंग पार्क टर्मिनल की मूल योजना इसी तरह परिचालन को अलग-अलग करने की दिशा में तैयार की गई है।
रेलवे के मुताबिक हार्डिंग पार्क में तैयार होने वाले पांच नए टर्मिनल प्लेटफार्म से पटना जंक्शन की हैंडलिंग क्षमता में वृद्धि हो सकती है। परियोजना के लाभों में बेहतर ट्रेन शेड्यूलिंग, टर्नअराउंड और आधुनिक यात्री सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया है। यानी यह सिर्फ एक नया स्टेशन भवन बनाने की परियोजना नहीं है, बल्कि पटना की रेल परिचालन व्यवस्था को पुनर्गठित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है।
इस परियोजना के निर्माण की शुरुआत को लेकर भी अलग-अलग चरण रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 30 मई 2025 को हार्डिंग पार्क में प्रस्तावित नए टर्मिनल भवन का ऑनलाइन शिलान्यास किया था। उस समय परियोजना की अनुमानित लागत करीब 95 करोड़ रुपये बताई गई थी और इसे दो चरणों में पूरा करने की योजना बताई गई थी। पहले चरण में पांच प्लेटफार्म और पांच लाइन विकसित करने का प्रस्ताव था।
शिलान्यास के बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन साइट पर तकनीकी और परिचालन संबंधी अड़चनों के कारण काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया। 2026 में परियोजना की समीक्षा के दौरान रेलवे अधिकारियों ने तकनीकी बाधाओं को दूर कर काम तेज करने के निर्देश भी दिए। इसके बावजूद सितंबर 2026 की स्थिति में परियोजना का बड़ा हिस्सा अधूरा है।
परियोजना की लागत को लेकर भी ताजा रिपोर्ट में बढ़ोतरी की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार समय बीतने के साथ परियोजना की लागत करीब 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ने की जानकारी दी गई है। हालांकि अंतिम संशोधित लागत और उसके लिए औपचारिक स्वीकृति की स्थिति अलग से स्पष्ट होना बाकी है। निर्माण में देरी से लागत बढ़ने का असर रेलवे के बजट और परियोजना के आर्थिक पक्ष पर भी पड़ सकता है।
हार्डिंग पार्क टर्मिनल के अधूरे रहने का सीधा असर उन यात्रियों पर भी पड़ सकता है जिनके लिए लोकल और मेमू ट्रेनों का अलग टर्मिनल प्रस्तावित किया गया है। अभी इन ट्रेनों का परिचालन मौजूदा रेल नेटवर्क और स्टेशनों पर निर्भर है। नया टर्मिनल तैयार होने के बाद परिचालन व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद है, लेकिन निर्माण पूरा होने तक मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी।
वाशिंग पिट लाइन से जुड़ी समस्या को हल करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नए ट्रैक और प्लेटफार्म तैयार करने के लिए निर्माण एजेंसी को पर्याप्त और सुरक्षित कार्यक्षेत्र चाहिए। वहीं रेलवे के लिए मौजूदा ट्रेनों और कोचिंग गतिविधियों को अचानक रोकना संभव नहीं है। ऐसे में चरणबद्ध तरीके से परिचालन और निर्माण के बीच तालमेल बैठाना जरूरी है। परियोजना में देरी का एक प्रमुख कारण यही समन्वय चुनौती बताई जा रही है।
रेलवे की ओर से कहा गया है कि परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए निगरानी की जा रही है। पूर्व मध्य रेल के सीपीआरओ सरस्वती चन्द्र के अनुसार जो भी बाधाएं हैं, उन्हें दूर कर काम को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वाशिंग पिट से जुड़ी तकनीकी समस्या कितनी जल्दी दूर होती है और निर्माण एजेंसी साइट पर कितनी तेजी से काम बढ़ा पाती है।
फिलहाल हार्डिंग पार्क टर्मिनल की स्थिति यह है कि 95 करोड़ रुपये की परियोजना का बड़ा हिस्सा अभी निर्माणाधीन है और पहले चरण का 10 प्रतिशत से कम काम पूरा होने की जानकारी सामने आई है। दिसंबर 2026 की निर्धारित समय सीमा नजदीक है। पांच प्लेटफार्म, पांच लाइन, स्टेशन भवन, एसएनटी भवन, सबवे, फुट ओवरब्रिज और यात्री सुविधाओं वाला यह टर्मिनल कब पूरी तरह तैयार होगा, यह अब तकनीकी बाधाओं को दूर करने और निर्माण की गति पर निर्भर करेगा।












