पटना में चर्चित NEET छात्रा मामले की जांच अब और गहराई में पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामले की परतें खोलने के लिए डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों पर फोकस बढ़ा दिया है। जांच एजेंसी ने छात्रा के भाई का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और उसकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल डेटा इस केस की कई अहम कड़ियों को जोड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, CBI टीम कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), व्हाट्सएप और अन्य मैसेजिंग ऐप की चैट हिस्ट्री, सोशल मीडिया अकाउंट्स, लोकेशन डेटा और इंटरनेट गतिविधियों का विश्लेषण कर रही है। डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना से पहले और बाद में किन लोगों से संपर्क हुआ, बातचीत की प्रकृति क्या थी और घटनाक्रम की टाइमलाइन कैसे विकसित हुई।
इसी क्रम में छात्रा के मामा से भी करीब दो घंटे तक लंबी पूछताछ की गई। जांच अधिकारियों ने पारिवारिक माहौल, छात्रा की मानसिक स्थिति, हालिया गतिविधियों और रिश्तों को लेकर विस्तृत सवाल किए। मामा से पूछताछ के दौरान एजेंसी ने उन बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जो पहले दिए गए बयानों से मेल खाते हैं या जिनमें विरोधाभास की संभावना है।
CBI सूत्रों का कहना है कि जांच पूरी तरह साक्ष्य आधारित होगी। एजेंसी किसी भी संभावना को खारिज नहीं कर रही और सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि क्या किसी प्रकार का दबाव, धमकी या अन्य परिस्थितियां घटना से पहले मौजूद थीं।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए CBI बेहद सावधानी बरत रही है। परिजनों, परिचितों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से भी चरणबद्ध तरीके से पूछताछ की जा रही है। जरूरत पड़ने पर तकनीकी विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों की राय भी ली जा सकती है।
इस केस ने राज्यभर में व्यापक चर्चा पैदा कर दी है। छात्र संगठनों और सामाजिक संस्थाओं की नजर जांच की प्रगति पर बनी हुई है। परिजन निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
CBI अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी डिजिटल, फॉरेंसिक और मौखिक साक्ष्यों का मिलान किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही आधिकारिक जानकारी साझा की जाएगी। फिलहाल एजेंसी हर एंगल से जांच को आगे बढ़ा रही है और मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।









