नालंदा जिले की पावन नगरी पावापुरी में भगवान महावीर के 2552वें निर्वाण महोत्सव के अवसर पर दो दिवसीय राजकीय पावापुरी महोत्सव का शुभारंभ किया गया। शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन पहुंचे। उन्होंने श्री दिगंबर जैन मंदिर में पूजा-अर्चना की और भगवान महावीर के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। इस दौरान उन्होंने पावापुरी की धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां आना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
राज्यपाल के आगमन को लेकर पावापुरी में विशेष तैयारियां की गई थीं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों को सजाया गया था। सुरक्षा व्यवस्था के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा का भी ध्यान रखा गया। राज्यपाल ने मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद जैन समाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें पावापुरी के धार्मिक महत्व और भगवान महावीर के निर्वाण से जुड़ी परंपराओं की जानकारी दी गई।
भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे। पावापुरी को उनकी निर्वाण स्थली के रूप में विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। मान्यता है कि यहीं भगवान महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया था। यहां स्थित प्रसिद्ध जल मंदिर देश-विदेश के जैन श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पवित्र स्थल पर दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। महावीर निर्वाण महोत्सव के अवसर पर यहां धार्मिक गतिविधियों का विशेष आयोजन किया जाता है।
इस बार 2552वें निर्वाण महोत्सव के साथ आयोजित पावापुरी महोत्सव सात और आठ नवंबर को मनाया जा रहा है। आयोजन में दिगंबर और श्वेतांबर दोनों जैन संप्रदायों के श्रद्धालुओं की सहभागिता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से जैन समाज के लोगों का पावापुरी पहुंचना शुरू हो गया है। मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी और झालरों से सजाया गया है। श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए आयोजन स्थल पर पंडाल और अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं।
महोत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ पदयात्रा, शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। सात नवंबर की सुबह दिगंबर जैन धर्मावलंबियों की ओर से करीब डेढ़ किलोमीटर की पदयात्रा निकाले जाने का कार्यक्रम रखा गया है। आठ नवंबर को भी जुलूस और सांस्कृतिक आयोजन प्रस्तावित हैं। वहीं श्वेतांबर जैन धर्मावलंबियों के कार्यक्रम आठ और नौ नवंबर को आयोजित किए जाने हैं।
महोत्सव को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसके माध्यम से बिहार की लोक संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं को भी मंच दिया जा रहा है। पहले दिन शिक्षा विभाग की ओर से कक्षा छह से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए रंगोली, पेंटिंग, मेहंदी, वाद-विवाद और भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। इन प्रतियोगिताओं के जरिए बच्चों की रचनात्मकता और सामाजिक विषयों के प्रति उनकी समझ को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करने की व्यवस्था भी की गई है।
सांस्कृतिक संध्या में भोजपुरी लोक गायिका देवी और भजन गायक नवीन जैन पंड्या की प्रस्तुतियां प्रमुख आकर्षण रहेंगी। देवी अपनी लोकगीतों की प्रस्तुति से बिहार की लोक संस्कृति की झलक पेश करेंगी, जबकि नवीन जैन पंड्या भगवान महावीर से जुड़े भजन और धार्मिक गीत प्रस्तुत करेंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए महोत्सव में शामिल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा।
आयोजन को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने साफ-सफाई, पेयजल, रोशनी, शौचालय, बैरिकेडिंग और यातायात की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया है। पावापुरी मोड़ से जल मंदिर तक के रास्ते को दुरुस्त रखने और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। भीड़ को देखते हुए वाहनों की पार्किंग के लिए स्थान निर्धारित किए गए हैं। टोटो और अन्य सार्वजनिक वाहनों के किराये का रेट चार्ट प्रदर्शित कराने पर भी जोर दिया गया है, ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से मनमाना किराया नहीं वसूला जा सके।
पावापुरी महोत्सव का उद्देश्य भगवान महावीर के अहिंसा, सत्य, त्याग और करुणा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। राज्यपाल के आगमन और पूजा-अर्चना से जैन श्रद्धालुओं में उत्साह देखा गया। दो दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और स्थानीय प्रतिभाओं का संगम देखने को मिल रहा है। प्रशासन को उम्मीद है कि महोत्सव के जरिए पावापुरी की धार्मिक और पर्यटन संबंधी पहचान को और व्यापक स्तर पर प्रचार मिलेगा।










