PM Vishwakarma Yojana: 18 पारंपरिक कारीगरों को मिलेगा लाभ, जानें पात्रता, लोन और आवेदन प्रक्रिया

PM Vishwakarma Yojana में 18 पारंपरिक व्यवसायों के कारीगरों को प्रशिक्षण, ₹15,000 टूलकिट प्रोत्साहन और ₹3 लाख तक का बिना गारंटी लोन मिलता है।

PM Vishwakarma Yojana पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट और आसान ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। योजना में 18 पारंपरिक व्यवसाय शामिल हैं और पात्र लाभार्थियों को कई वित्तीय सुविधाएं मिलती हैं।

PM Vishwakarma Yojana: पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और उनके व्यवसाय को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार की यह योजना कई सुविधाएं देती है। पात्र लाभार्थियों को कौशल प्रशिक्षण, रोजाना वजीफा, टूलकिट प्रोत्साहन और बिना गारंटी के रियायती ब्याज पर लोन उपलब्ध कराया जाता है। जानिए योजना की पात्रता, लाभ, जरूरी दस्तावेज और आवेदन का तरीका।

क्या है पीएम विश्वकर्मा योजना?

भारत में पीढ़ियों से बढ़ई, लोहार, कुम्हार, सुनार, दर्जी, मोची और कई अन्य पारंपरिक कारीगर अपने हुनर के जरिए लोगों की जरूरतें पूरी करते आ रहे हैं। हालांकि, आधुनिक उपकरणों, तकनीकी जानकारी और वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण कई कारीगर अपने व्यवसाय को बड़े स्तर पर नहीं बढ़ा पाते हैं।

PM Vishwakarma Yojana: 18 पारंपरिक कारीगरों को मिलेगा लाभ, जानें पात्रता, लोन और आवेदन प्रक्रिया

इन्हीं पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने पीएम विश्वकर्मा योजना शुरू की है। योजना के जरिए कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है।

इसका उद्देश्य पारंपरिक हुनर को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ना, उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करना और कारीगरों को नए बाजारों तक पहुंच दिलाना है। योजना का लाभ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में काम करने वाले पात्र कारीगरों को मिल सकता है।

किन पारंपरिक व्यवसायों को योजना में शामिल किया गया है?

योजना के तहत 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगर और शिल्पकार पात्र हो सकते हैं। इनमें लोहार, सुनार, कुम्हार, बढ़ई या सुतार, मूर्तिकार और पत्थर तराशने वाले, मोची या जूता बनाने वाले, दर्जी, नाई, धोबी और मालाकार शामिल हैं।

इसके अलावा अस्त्रकार, ताला बनाने वाले, हथौड़ा और टूलकिट निर्माता, नाव निर्माता, टोकरी, मैट और झाड़ू बनाने वाले, गुड़िया और खिलौना निर्माता, राजमिस्त्री तथा मछली का जाल बनाने वाले कारीगर भी योजना के दायरे में आते हैं।

पीएम विश्वकर्मा योजना के लिए कौन पात्र है?

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक हाथों और औजारों से काम करने वाला पारंपरिक कारीगर या शिल्पकार होना चाहिए और स्वरोजगार के आधार पर संबंधित व्यवसाय में काम करता होना चाहिए। आवेदक की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी जरूरी है।

एक परिवार से केवल एक सदस्य इस योजना का लाभ ले सकता है। यहां परिवार में पति, पत्नी और अविवाहित बच्चों को शामिल किया गया है।

आवेदक ने पिछले पांच वर्षों में केंद्र या राज्य सरकार की किसी समान क्रेडिट-आधारित योजना, जैसे PM स्वनिधि या PMEGP, के तहत ऋण नहीं लिया होना चाहिए। इसके अलावा परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में कार्यरत नहीं होना चाहिए।

प्रशिक्षण से लेकर लोन तक मिलते हैं कई फायदे

योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को आधिकारिक पहचान पत्र और डिजिटल प्रमाणपत्र दिया जाता है। कारीगरों के कौशल को बेहतर बनाने के लिए 5 से 7 दिनों का बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाता है। इच्छुक लाभार्थी 15 दिन या उससे अधिक अवधि का उन्नत प्रशिक्षण भी ले सकते हैं।

प्रशिक्षण के दौरान लाभार्थियों को 500 रुपये प्रतिदिन का वजीफा दिया जाता है। आधुनिक औजार खरीदने के लिए 15,000 रुपये की ई-वाउचर या अनुदान राशि भी उपलब्ध कराई जाती है।

योजना के तहत बिना किसी गारंटी के कुल 3 लाख रुपये तक का ऋण 5 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक डिजिटल लेनदेन पर 1 रुपये का प्रोत्साहन दिया जाता है।

आवेदन के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होगी?

पीएम विश्वकर्मा योजना में आवेदन के लिए आधार कार्ड जरूरी है और यह मोबाइल नंबर से लिंक होना चाहिए। इसके अलावा बैंक खाते की जानकारी, पासबुक और IFSC कोड की जरूरत होगी।

आवेदक को मोबाइल नंबर, परिवार के सत्यापन के लिए राशन कार्ड, जहां लागू हो वहां जाति या श्रेणी प्रमाण पत्र और अपने पारंपरिक व्यवसाय से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।

कैसे करें पीएम विश्वकर्मा योजना के लिए आवेदन?

योजना में पंजीकरण कराने के लिए आवेदक अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर यानी CSC पर जा सकता है। वहां आधार कार्ड और बैंक विवरण के साथ बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

इसके बाद CSC ऑपरेटर के माध्यम से पीएम विश्वकर्मा के आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन फॉर्म भरा जाएगा। आवेदन जमा होने के बाद इसकी जांच तीन चरणों में की जाती है।

सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र लाभार्थी को पीएम विश्वकर्मा डिजिटल आईडी जारी की जाती है। इसके बाद प्रशिक्षण, टूलकिट और ऋण से संबंधित लाभ की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।

Leave a comment