पूर्वी भारत में रक्षा क्षमता को बड़ा बल: पश्चिम बंगाल सरकार ने हाशिमारा और कलाईकुंडा एयरबेस विस्तार को दी मंजूरी

पूर्वी भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूती देने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने हाशिमारा और कलाईकुंडा एयरबेस के विस्तार को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से रणनीतिक

वायुसेना की परिचालन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए देश के दो रणनीतिक एयरफोर्स स्टेशनों—Hashimara Air Force Station और Kalaikunda Air Force Station—को कुल 62 एकड़ अतिरिक्त भूमि आवंटित करने का फैसला किया गया है।

West Bengal: भारत के पूर्वी क्षेत्र में सैन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने भारतीय वायुसेना के दो प्रमुख और रणनीतिक एयरफोर्स स्टेशनों—हाशिमारा और कलाईकुंडा—के विस्तार के लिए अतिरिक्त भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया है। इस फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय रक्षा तैयारियों के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नई बजट घोषणाओं के तहत अलीपुरद्वार जिले में स्थित हाशिमारा एयरफोर्स स्टेशन को 25 एकड़ और पश्चिम मेदिनीपुर स्थित कलाईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन को 37 एकड़ अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। कुल 62 एकड़ भूमि के इस आवंटन से भारतीय वायुसेना को अपनी परिचालन और रणनीतिक क्षमताओं का विस्तार करने में मदद मिलेगी।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को मिलेगा नया सुरक्षा कवच

हाशिमारा एयरफोर्स स्टेशन का महत्व विशेष रूप से सिलीगुड़ी कॉरिडोर के कारण बढ़ जाता है। यह संकरा भूभाग, जिसे आमतौर पर "चिकन नेक" कहा जाता है, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा यह क्षेत्र राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।

सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी संभावित संघर्ष की स्थिति में यह कॉरिडोर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसलिए इस क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करना भारत की रक्षा नीति का अहम हिस्सा रहा है। हाशिमारा एयरबेस के विस्तार से इस महत्वपूर्ण गलियारे की हवाई सुरक्षा और निगरानी क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होने की संभावना है।

राफेल स्क्वॉड्रन और आधुनिक सैन्य ढांचे को मिलेगा समर्थन

पूर्वी भारत में रक्षा क्षमता को बड़ा बल: पश्चिम बंगाल सरकार ने हाशिमारा और कलाईकुंडा एयरबेस विस्तार को दी मंजूरी

हाशिमारा एयरफोर्स स्टेशन भारतीय वायुसेना के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में से एक, राफेल स्क्वॉड्रन का प्रमुख ठिकाना है। यह एयरबेस भूटान और चीन सीमा के निकट स्थित होने के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। राफेल विमानों की तैनाती के बाद यहां अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों, उन्नत रडार नेटवर्क, अतिरिक्त हैंगर और रखरखाव सुविधाओं की आवश्यकता बढ़ गई थी। अतिरिक्त भूमि उपलब्ध होने से इन बुनियादी ढांचागत जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और एयरबेस की परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी।

कलाईकुंडा एयरबेस की रणनीतिक भूमिका भी होगी मजबूत

पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन का महत्व भी लगातार बढ़ रहा है। यह एयरबेस पूर्वी क्षेत्र में भारतीय वायुसेना के लिए एक महत्वपूर्ण संचालन और प्रशिक्षण केंद्र माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बेस पूर्वोत्तर सीमाओं की निगरानी, आपातकालीन सैन्य संचालन और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

अतिरिक्त 37 एकड़ भूमि मिलने से यहां सैन्य अवसंरचना का विस्तार किया जा सकेगा, जिससे भविष्य की परिचालन जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा।

पूर्वी थिएटर में आधुनिकीकरण की दिशा में अहम कदम

हाल के वर्षों में भारत ने अपनी सीमाओं और रणनीतिक क्षेत्रों में सैन्य ढांचे के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया है। पूर्वी क्षेत्र में सड़क, सुरंग, एयरबेस और सैन्य सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण और आधुनिक युद्ध की चुनौतियों को देखते हुए एयरफोर्स स्टेशनों का विस्तार आवश्यक हो गया था। अतिरिक्त भूमि मिलने से भविष्य की रक्षा परियोजनाओं को गति मिलेगी और वायुसेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में भी सुधार होगा।

भूमि आवंटन से जुड़ी कई परियोजनाएं लंबे समय से प्रक्रियात्मक कारणों से लंबित थीं। राज्य सरकार द्वारा इन प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने को राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं और बुनियादी ढांचा विकास के बीच बेहतर समन्वय के रूप में देखा जा रहा है।

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