पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर सर्विस रोड की मांग अब एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्र के लोगों की आवाज और जनप्रतिनिधियों की पहल के बाद उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने अंबेडकरनगर के जिलाधिकारी से भूमि से जुड़ी रिपोर्ट मांगी है। बताया जा रहा है कि सुल्तानपुर के दो भाजपा विधायकों ने इस संबंध में पहले पत्र भेजकर सर्विस रोड की आवश्यकता उठाई थी। अब यूपीडा की ओर से भूमि की उपलब्धता और संबंधित जानकारी मांगे जाने के बाद इस मांग को आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है।
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे बनने के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के बीच आवागमन आसान हुआ है। हालांकि एक्सप्रेस-वे से जुड़े गांवों और स्थानीय आबादी के लिए कई जगह मुख्य मार्ग तक पहुंचना अब भी चुनौती बना हुआ है। एक्सप्रेस-वे पर सीधे आवागमन के लिए निर्धारित प्रवेश और निकास बिंदु होने के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को कई बार लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।
इसी समस्या को देखते हुए स्थानीय स्तर पर सर्विस रोड की मांग की जा रही है। लोगों का तर्क है कि सर्विस रोड बनने से एक्सप्रेस-वे के आसपास बसे गांवों और स्थानीय बाजारों के बीच संपर्क बेहतर हो सकेगा। किसानों, छोटे कारोबारियों, विद्यार्थियों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों को भी इसका सीधा फायदा मिल सकता है।
सुल्तानपुर के दो भाजपा विधायकों की ओर से यूपीडा को पत्र भेजकर इस मांग को उठाया गया था। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि एक्सप्रेस-वे का लाभ केवल लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके आसपास रहने वाली स्थानीय आबादी को भी बेहतर संपर्क सुविधा मिलनी चाहिए।
अब यूपीडा द्वारा अंबेडकरनगर डीएम से भूमि की रिपोर्ट मांगे जाने को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भूमि रिपोर्ट से यह पता लगाया जा सकेगा कि प्रस्तावित सर्विस रोड के लिए कितनी जमीन उपलब्ध है, किस तरह की भूमि की आवश्यकता होगी और भूमि से संबंधित क्या स्थिति है।
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लिए पहले भी बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया गया था। यूपीडा की आधिकारिक वेबसाइट पर एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध हैं।
सर्विस रोड के निर्माण की मांग का एक अहम कारण स्थानीय संपर्क व्यवस्था को मजबूत करना भी है। एक्सप्रेस-वे पर तेज रफ्तार वाहनों के लिए मुख्य कैरिजवे बनाया गया है, लेकिन आसपास के गांवों के लिए स्थानीय यातायात की जरूरत अलग होती है। अगर स्थानीय सड़क व्यवस्था बेहतर हो तो लोगों को एक्सप्रेस-वे के मुख्य मार्ग पर अनावश्यक दबाव डालने की जरूरत कम हो सकती है।
ग्रामीण इलाकों में किसानों के लिए भी सर्विस रोड महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। खेतों से ट्रैक्टर और कृषि वाहन निकालने, स्थानीय मंडियों तक पहुंचने और गांव से मुख्य सड़क तक जाने के लिए बेहतर संपर्क की जरूरत होती है। सर्विस रोड बनने से ऐसे वाहनों को सुरक्षित और सुविधाजनक रास्ता मिल सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक्सप्रेस-वे के निर्माण से क्षेत्र में विकास की संभावनाएं बढ़ी हैं, लेकिन उसका पूरा लाभ तभी मिलेगा जब आसपास के गांवों को भी बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध हो। सर्विस रोड बनने से स्थानीय बाजारों और कस्बों में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
अंबेडकरनगर डीएम से भूमि रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अब आगे की प्रक्रिया रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। संबंधित प्रशासन भूमि की स्थिति और उपलब्धता से जुड़ी जानकारी यूपीडा को भेजेगा। इसके बाद प्रस्तावित सड़क के तकनीकी और वित्तीय पहलुओं का आकलन किया जा सकता है।
यह पहली बार नहीं है जब पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर स्थानीय संपर्क सुविधा बढ़ाने की मांग सामने आई है। सुल्तानपुर में भी एक्सप्रेस-वे पर अतिरिक्त इंटरचेंज और कट की मांग पहले उठ चुकी है। एक रिपोर्ट के अनुसार बल्दीराय के पास इंटरचेंज की मांग को लेकर भी ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की ओर से प्रयास हुए थे और यूपीडा ने जमीन की नाप-जोख की थी।
सर्विस रोड और इंटरचेंज की मांग के पीछे स्थानीय लोगों की मुख्य चिंता यह है कि एक्सप्रेस-वे के कारण उनके क्षेत्र में सड़क संपर्क तो बेहतर हुआ है, लेकिन निर्धारित प्रवेश और निकास बिंदुओं की दूरी कई गांवों के लिए परेशानी पैदा करती है। ऐसे में स्थानीय सड़क नेटवर्क को एक्सप्रेस-वे से जोड़ना क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुल्तानपुर जिले में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़े औद्योगिक विकास की दिशा में भी काम चल रहा है। प्रशासन ने यूपीडा की मांग पर औद्योगिक गलियारे के लिए ग्राम समाज की भूमि उपलब्ध कराई थी और निजी भूमि खरीदने की प्रक्रिया भी चल रही थी।
अगर सर्विस रोड का प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो इसका असर केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। इससे एक्सप्रेस-वे के आसपास के इलाकों में जमीन की उपयोगिता, व्यापारिक गतिविधियों और स्थानीय आवागमन के पैटर्न में भी बदलाव आ सकता है। सड़क संपर्क बेहतर होने से छोटे बाजारों और गांवों को बड़े मार्गों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
हालांकि सर्विस रोड का निर्माण आसान प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए भूमि की उपलब्धता, सड़क की चौड़ाई, निर्माण लागत, जल निकासी, पुल-पुलिया और मौजूदा मार्गों से कनेक्टिविटी जैसे कई तकनीकी पहलुओं का अध्ययन करना होगा। इसके अलावा जहां निजी भूमि की जरूरत होगी, वहां भूमि से जुड़े मामलों को भी सुलझाना पड़ेगा।
यूपीडा की ओर से भूमि रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। अगर भूमि उपलब्धता अनुकूल रहती है तो सर्वे और तकनीकी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सर्विस रोड का प्रस्ताव किस रूप में लागू किया जा सकता है।
जनप्रतिनिधियों की ओर से इस मांग को लगातार उठाए जाने का उद्देश्य भी यही बताया जा रहा है कि एक्सप्रेस-वे से स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधा मिले। क्षेत्रीय स्तर पर सड़क संपर्क मजबूत होने से लोगों को रोजमर्रा के काम के लिए लंबी दूरी तय करने से राहत मिल सकती है।
सर्विस रोड बनने से एक्सप्रेस-वे के मुख्य मार्ग पर स्थानीय यातायात का दबाव भी कम किया जा सकता है। गांवों से निकलने वाले छोटे वाहन, कृषि वाहन और स्थानीय यातायात सर्विस रोड का इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि एक्सप्रेस-वे का मुख्य मार्ग लंबी दूरी के तेज यातायात के लिए अधिक सुरक्षित रह सकता है।
फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण कदम अंबेडकरनगर प्रशासन की भूमि रिपोर्ट होगी। रिपोर्ट मिलने के बाद यूपीडा यह तय कर सकेगा कि प्रस्तावित सर्विस रोड के लिए जमीन की स्थिति क्या है और आगे किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
कुल मिलाकर, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर सर्विस रोड की मांग अब प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। सुल्तानपुर के दो भाजपा विधायकों की ओर से पत्र भेजे जाने के बाद यूपीडा ने अंबेडकरनगर डीएम से भूमि रिपोर्ट मांगी है। अब भूमि की उपलब्धता और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो एक्सप्रेस-वे से जुड़े स्थानीय गांवों के लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिल सकती है।










