बिहार के नालंदा जिले में आयोजित होने वाला राजगीर महोत्सव 2026 कला, संस्कृति, संगीत, खानपान और पारंपरिक खेलों का अनूठा संगम बनने जा रहा है। इस महोत्सव में बॉलीवुड नाइट से लेकर लोक संगीत की प्रस्तुतियों तक दर्शकों को मनोरंजन के कई रंग देखने को मिलेंगे। वहीं, दंगल और तांगा दौड़ जैसे पारंपरिक आयोजनों के जरिए बिहार की पुरानी खेल संस्कृति और ग्रामीण परंपराओं को भी सामने लाने की तैयारी है। महोत्सव में स्थानीय व्यंजनों को भी खास जगह मिलने की उम्मीद है, जिनमें नालंदा की पहचान बन चुका सिलाव का प्रसिद्ध खाजा लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेगा।
राजगीर महोत्सव का उद्देश्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक पहचान और स्थानीय प्रतिभाओं को व्यापक मंच भी मिलता है। राजगीर ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। भगवान बुद्ध और भगवान महावीर से जुड़ी परंपराओं के कारण इस क्षेत्र की पहचान देश-विदेश तक है। ऐसे में यहां आयोजित होने वाला सांस्कृतिक महोत्सव पर्यटकों को स्थानीय कला, परंपरा और खानपान से रूबरू कराने का अवसर प्रदान करता है।
महोत्सव की बॉलीवुड नाइट संगीत प्रेमियों के लिए खास आकर्षण रहने वाली है। फिल्मी गीतों और लोकप्रिय धुनों के बीच दर्शकों को मनोरंजन का अलग अनुभव मिल सकता है। इसके साथ सुर, लय और ताल पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां कार्यक्रम को और खास बनाएंगी। लोकगीत, पारंपरिक संगीत और नृत्य के जरिए बिहार की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। ऐसे आयोजन स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच देते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में भी मदद करते हैं।
दंगल प्रतियोगिता महोत्सव के उन आयोजनों में शामिल रहेगी, जिनके जरिए पारंपरिक भारतीय खेलों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाता है। कुश्ती बिहार के ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से लोकप्रिय रही है और दंगल के आयोजन से पहलवानों को अपनी ताकत, तकनीक और कौशल दिखाने का मौका मिलता है। इसी तरह तांगा दौड़ राजगीर महोत्सव की पुरानी परंपराओं में शामिल है। घोड़ों से जुड़ा यह आयोजन लोगों को पुराने दौर की याद दिलाता है और महोत्सव को दूसरे सांस्कृतिक कार्यक्रमों से अलग पहचान देता है।
खानपान के शौकीनों के लिए भी महोत्सव में खास आकर्षण रहने वाला है। सिलाव का खाजा नालंदा जिले की प्रसिद्ध मिठाइयों में गिना जाता है। इसकी खास बनावट और स्वाद के कारण इसकी पहचान बिहार से बाहर भी है। महोत्सव में स्थानीय व्यंजनों को जगह मिलने से बाहर से आने वाले पर्यटकों को क्षेत्रीय स्वाद चखने का अवसर मिलता है। साथ ही स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को अपने उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने का मंच मिलता है। व्यंजन मेले में बिहार की पारंपरिक खानपान संस्कृति को सामने लाने की संभावना है।
महोत्सव के साथ लगने वाला ग्रामश्री मेला भी खास महत्व रखता है। ऐसे मेलों में ग्रामीण हस्तशिल्प, पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। इसके अलावा पुस्तक मेले, कृषि से जुड़े आयोजन और विभिन्न प्रतियोगिताएं महोत्सव को परिवार के हर आयु वर्ग के लोगों के लिए आकर्षक बनाती हैं। बच्चों और युवाओं के लिए आयोजित होने वाली गतिविधियों से उनकी प्रतिभा को सामने लाने में मदद मिलती है। राजगीर की ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराने के लिए हेरिटेज वॉक जैसे कार्यक्रम भी आयोजन का हिस्सा बनाए जाने की योजना है।
राजगीर महोत्सव की शुरुआत वर्ष 1986 में हुई थी। तब से यह आयोजन नालंदा और राजगीर की सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है। समय के साथ इसमें संगीत और नृत्य के कार्यक्रमों के अलावा मेले, पारंपरिक खेल, स्थानीय कला और खानपान जैसे आकर्षण भी शामिल होते गए। महोत्सव के मंच पर पहले भी देश के कई प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। बॉलीवुड संगीत, शास्त्रीय कला और लोक परंपराओं को एक साथ प्रस्तुत करने की इसकी विशेषता ने इसे बिहार के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में जगह दिलाई है।
वर्ष 2026 के महोत्सव को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, तीन दिवसीय आयोजन 26 से 28 नवंबर तक राजगीर के स्टेट गेस्ट हाउस परिसर में प्रस्तावित है। हालांकि, प्रमुख कलाकारों की अंतिम सूची और कार्यक्रमों का विस्तृत समय अभी स्पष्ट नहीं है। महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, मेलों और पारंपरिक आयोजनों के जरिए राजगीर में उत्सव जैसा माहौल बनने की उम्मीद है। इससे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय कारोबारियों, कलाकारों और शिल्पकारों को भी लाभ मिल सकता है। राजगीर आने वाले पर्यटकों के लिए यह आयोजन ऐतिहासिक स्थल की यात्रा के साथ बिहार की कला, संगीत, परंपरा और स्वाद को करीब से जानने का अवसर बनेगा।









