अयोध्या के राममंदिर में चढ़ावे और दान की कथित चोरी से जुड़े मामले में आज यानी 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। इस मामले में दायर याचिकाओं में जांच को अदालत की निगरानी में कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से मौजूदा जांच व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट में आज इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राममंदिर में देशभर से श्रद्धालुओं की ओर से बड़ी मात्रा में दान और चढ़ावा आता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस राशि से जुड़े रिकॉर्ड, लेन-देन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए। इसी आधार पर अदालत की निगरानी में SIT जांच और वित्तीय रिकॉर्ड के फोरेंसिक ऑडिट की मांग उठाई गई है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बताया गया था कि मामले की जांच के लिए नई SIT गठित की गई है। इस SIT की अध्यक्षता लखनऊ रेंज की IG किरण एस कर रही हैं। कोर्ट ने जांच में फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने और SIT से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश भी दिए थे।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई है कि मंदिर निर्माण और राममंदिर से जुड़े दान में देशभर के लोगों की आस्था और आर्थिक योगदान जुड़ा है। ऐसे में दान की राशि का पूरा हिसाब, उसके संग्रह और बैंक खातों तक पहुंचने की प्रक्रिया तथा उससे संबंधित रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। याचिकाकर्ता चाहते हैं कि जांच ऐसी व्यवस्था में हो, जिससे उसकी निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर कोई सवाल न उठे।
मामले की जांच पहले से उत्तर प्रदेश की SIT कर रही है। जांच का दायरा भी लगातार बढ़ाया जा रहा है। हाल में SIT ने मंदिर ट्रस्ट के गठन के समय से जुड़े पुराने रिकॉर्ड की भी जांच शुरू की है। वित्तीय वर्ष 2020-21 से संबंधित दस्तावेजों, पुराने रजिस्टर, खातों और लेन-देन की पड़ताल किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुराने कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
SIT की शुरुआती जांच में मंदिर के चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई कथित लापरवाही के बिंदु सामने आने की खबरें भी आई हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक CCTV निगरानी, कर्मचारियों की तलाशी, कैश काउंटिंग प्रक्रिया और निर्धारित सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। जांच एजेंसी ने CCTV फुटेज और कैश काउंटिंग से जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल की है।
जांच के दौरान मंदिर में चढ़ावे की गिनती से जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई हुई है। मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आ चुकी है। जांच एजेंसियां कथित तौर पर चोरी की रकम और उससे जुड़े अन्य साक्ष्यों को भी खंगाल रही हैं। हालांकि मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और अदालत के समक्ष रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही रहेगा कि क्या मौजूदा SIT जांच को अदालत की निगरानी में आगे बढ़ाने की जरूरत है या उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित जांच व्यवस्था पर्याप्त है। अदालत याचिकाकर्ताओं की मांग, सरकार का पक्ष और अब तक हुई जांच की प्रगति को ध्यान में रखकर आगे की दिशा तय कर सकती है।
याचिकाकर्ताओं ने केवल चोरी की घटना की जांच तक मामला सीमित रखने के बजाय दान और चढ़ावे से जुड़े व्यापक वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि दान की राशि और उसके इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता की स्थिति स्पष्ट हो सके।
मामले में फोरेंसिक ऑडिट की मांग भी इसी वजह से महत्वपूर्ण हो गई है। फोरेंसिक ऑडिट के जरिए वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान कर संभावित गड़बड़ियों की पहचान की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट की पिछली कार्यवाही में फोरेंसिक ऑडिटर को जांच में शामिल करने का निर्देश दिया जा चुका है।
राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में CCTV फुटेज भी अहम साक्ष्य माना जा रहा है। शुरुआती SIT रिपोर्ट से संबंधित खबरों में दावा किया गया कि सुरक्षित रखे गए CCTV फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां रिकॉर्ड हुई थीं। साथ ही फुटेज को सीमित अवधि तक सुरक्षित रखने और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
मामले में मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों और चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में रही है। जांच एजेंसी अलग-अलग लोगों से पूछताछ कर रही है और पुराने रिकॉर्ड को भी खंगाला जा रहा है। इससे जांच का दायरा केवल एक घटना तक सीमित न रहकर मंदिर की दान व्यवस्था से जुड़े व्यापक पहलुओं तक पहुंच गया है।
सुप्रीम कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत की निगरानी में जांच की जरूरत पर जोर दिए जाने की संभावना है। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अब तक की जांच और गठित SIT की कार्रवाई के बारे में जानकारी दी जा सकती है। कोर्ट इस मामले में आगे की जांच को लेकर जरूरी निर्देश भी दे सकता है।
यह मामला धार्मिक आस्था से जुड़ा होने के साथ-साथ प्रशासनिक और वित्तीय पारदर्शिता का विषय भी बन गया है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर अयोध्या के साथ-साथ देशभर की नजर है। अदालत की ओर से जांच को लेकर दिया जाने वाला कोई भी निर्देश आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। SIT द्वारा जुटाए जा रहे दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि अदालत इस जांच की निगरानी किस स्तर तक करेगी और याचिकाओं पर आगे क्या रुख अपनाएगी।
कुल मिलाकर, अयोध्या राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आज 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी। अदालत की निगरानी में SIT जांच कराने की मांग वाली याचिकाओं पर बहस होगी। उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही नई SIT गठित कर चुकी है और कोर्ट ने जांच में फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने तथा स्टेटस रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। अब आज की सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की मांग और सरकार की जांच व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।











