राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) की नेता Priyanka Chaturvedi ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
नई दिल्ली: अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा (दान) प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मामले पर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए वर्ष 2020 में दिए गए शुरुआती सुझावों और चेतावनियों का हवाला दिया है।
प्रियंका चतुर्वेदी का सरकार पर आरोप
प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद वर्ष 2020 में ही आंतरिक ऑडिट और जोखिम प्रबंधन (Risk Management) से संबंधित सुझाव दिए गए थे। उनके अनुसार, उस समय एक ऑडिट फर्म ने कई प्रशासनिक कमियों की ओर ध्यान आकर्षित किया था और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने की सिफारिश की थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन सुझावों को लागू नहीं किया गया, जिसके कारण आगे चलकर दान प्रबंधन और मूल्यवान वस्तुओं की सुरक्षा में कथित अनियमितताएं सामने आईं। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक बताते हुए कहा कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जाते, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
SIT जांच और प्रारंभिक निष्कर्ष
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राज्य सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) ने इस मामले में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली है। रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर परिसर में चढ़ावे और दान से संबंधित प्रबंधन प्रणाली में कई खामियां पाई गई हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि दान की गिनती और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया में असंगतियां थीं। कुछ स्थानों पर सीसीटीवी फुटेज के गायब या डिलीट होने की बात भी सामने आई है, जिससे निगरानी प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
इसके अलावा, सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड रखरखाव में भी कमी पाई गई है, जिसे जांच रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक त्रुटि माना गया है।
रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई
SIT ने लगभग 150 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंपी है। अधिकारियों के अनुसार, यह एक प्रारंभिक रिपोर्ट है और अंतिम निष्कर्ष एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। रिपोर्ट को अब आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार की ओर से इस मामले में अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दलों का दावा है कि चढ़ावे और दान के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जबकि सत्ताधारी पक्ष ने जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने को अनुचित बताया है। प्रियंका चतुर्वेदी ने इससे पहले मध्य प्रदेश सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि विभिन्न राज्यों में प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता पर बहस
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब धार्मिक और सार्वजनिक ट्रस्टों में वित्तीय पारदर्शिता और ऑडिटिंग को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े धार्मिक संस्थानों में दान प्रबंधन के लिए मजबूत डिजिटल ट्रैकिंग, नियमित ऑडिट और स्वतंत्र निगरानी तंत्र की आवश्यकता है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जांच में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता या लापरवाही की पुष्टि होती है, तो इसके आधार पर आगे प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।










