रांची के मोरहाबादी मैदान में आदिवासी एकता महाजुटान में हजारों लोग शामिल हुए। कांग्रेस ने परिसीमन के दौरान ST सीटों में कमी का विरोध किया। कार्यक्रम में आदिवासी जमीन, खनन, ग्रामसभा और सरना कोड समेत पांच प्रस्ताव पारित हुए।
रांची: मोरहाबादी मैदान में रविवार को आयोजित आदिवासी एकता महाजुटान में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में परिसीमन, आदिवासी अधिकार और जल-जंगल-जमीन से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठे। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने कहा कि कांग्रेस झारखंड में ST सीटों को घटने नहीं देगी। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी भी इस मुद्दे पर झारखंड के आदिवासियों के साथ खड़े हैं। महाजुटान में पांच प्रस्ताव भी पारित किए गए।
मोरहाबादी मैदान में जुटे हजारों आदिवासी
रांची के मोरहाबादी मैदान में रविवार को आदिवासी एकता महाजुटान का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। मैदान में झंडों और नारों के बीच नेताओं ने परिसीमन, आदिवासी अधिकार और जल-जंगल-जमीन से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखी।
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प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने कहा कि कांग्रेस झारखंड में ST सीटों को कम नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि पार्टी आदिवासियों के साथ खड़ी रहेगी और इस मुद्दे पर मिलकर संघर्ष किया जाएगा। राजू के मुताबिक परिसीमन को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी चर्चा हुई है और राहुल गांधी झारखंड के आदिवासियों के साथ खड़े हैं।
के. राजू ने भाजपा पर झारखंड के आदिवासियों के खिलाफ षड्यंत्र करने का आरोप भी लगाया।
परिसीमन को आदिवासी अधिकारों से जोड़ा
पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि आदिवासियों के हक और अधिकारों पर किसी तरह का हमला स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ संघर्ष जारी रखा जाएगा।
बंधु तिर्की के मुताबिक परिसीमन सिर्फ लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या का विषय नहीं है, बल्कि यह आदिवासियों के राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए इस मुद्दे को गांव-गांव तक ले जाना होगा।
उन्होंने आशंका जताई कि अगर जनसंख्या को आधार बनाकर परिसीमन में आदिवासी क्षेत्रों और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने की कोशिश हुई तो इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने RSS और भाजपा पर झारखंड की पहचान बदलने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
महाजुटान में पांच प्रस्ताव पारित
महाजुटान में परिसीमन से लेकर सरना कोड तक कई मुद्दों को लेकर पांच प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें लोकसभा और विधानसभा की सीटें बढ़ने की स्थिति में ST के लिए आरक्षित सीटों को भी समान अनुपात में बढ़ाने की मांग शामिल है। आयोजकों ने आदिवासी क्षेत्रों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में किसी भी कमी को स्वीकार नहीं करने की बात कही।
दूसरे प्रस्ताव में खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन कानून यानी MMDR Bill को वापस लेने की मांग की गई। इसमें कहा गया कि इससे राज्यों की राजकोषीय स्वतंत्रता और विधायी अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
तीसरे प्रस्ताव में CNT और SPT कानूनों का उल्लंघन कर आदिवासी जमीन के हुए अवैध हस्तांतरण, कब्जे और बिक्री को रोकने की मांग की गई। साथ ही अवैध रूप से हस्तांतरित जमीन मूल रैयतों को वापस करने की मांग रखी गई।
चौथे प्रस्ताव में पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में ग्रामसभा की मंजूरी के बिना खनन, जमीन अधिग्रहण और विस्थापन पर रोक लगाने की मांग की गई। इसके साथ PESA और वन अधिकार कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने की बात कही गई।
पांचवें प्रस्ताव में जनगणना फॉर्म में सरना के लिए अलग कोड और अलग कॉलम उपलब्ध कराने की मांग दोहराई गई।
राहुल गांधी का संदेश पढ़कर सुनाया
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कार्यक्रम में राहुल गांधी का संदेश पढ़कर सुनाया। संदेश में कहा गया कि कांग्रेस के लिए आदिवासी अधिकार सर्वोपरि हैं और अधिकार, पहचान व सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट हुए लोगों के साथ राहुल गांधी मजबूती से खड़े हैं।
संदेश में झारखंड के आदिवासी समाज के संघर्ष और इतिहास का भी उल्लेख किया गया। जयपाल सिंह मुंडा को याद करते हुए कहा गया कि उन्होंने संविधान सभा में आदिवासियों की आवाज उठाई और उनके अधिकारों को संवैधानिक सुरक्षा दिलाने के लिए संघर्ष किया।
संदेश में पांचवीं अनुसूची, PESA और वन अधिकार कानून को आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जोड़ा गया। इसमें कहा गया कि जल-जंगल-जमीन की रक्षा करने वाले समुदायों की अपने संसाधनों पर मजबूत भागीदारी होनी चाहिए।
राहुल गांधी के संदेश में विकास को आदिवासियों के विस्थापन के बजाय उनकी भागीदारी, सहमति और सम्मान के साथ जोड़ने की बात कही गई। साथ ही झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों में स्थानीय लोगों की सार्थक भागीदारी की मांग रखी गई।









