पूंजी बाजार नियामक सेबी ने उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की उस सेटलमेंट अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी के करीब 6,526 करोड़ रुपये के कथित फंड दुरुपयोग मामले को समझौते के जरिए निपटाने का अनुरोध किया गया था।
बिजनेस न्यूज़: भारत और वैश्विक कारोबारी जगत में शुक्रवार को कई महत्वपूर्ण आर्थिक घटनाक्रम सामने आए। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने उद्योगपति अनिल अंबानी और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सेटलमेंट अर्जी को खारिज कर दिया, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 672.58 अरब डॉलर पहुंच गया।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई और जर्मन वाहन निर्माता फॉक्सवैगन ने बड़े स्तर पर पुनर्गठन की तैयारी शुरू कर दी है।
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर मामले में सेबी का सख्त रुख
पूंजी बाजार नियामक सेबी ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और उसके चेयरमैन अनिल अंबानी की उस सेटलमेंट याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसमें कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले को समझौते के जरिए समाप्त करने की मांग की गई थी। यह मामला कंपनी के फंड के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है।
सेबी के अंतरिम आदेश के अनुसार, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा इंजीनियरिंग कंपनी CLE प्राइवेट लिमिटेड को बड़े पैमाने पर धन हस्तांतरित किया गया, जिसके बाद उस राशि का एक हिस्सा रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियों में निवेश किया गया। नियामक का मानना है कि इस लेन-देन से संबंधित पक्षों को संभावित लाभ पहुंचा। यह हाल के वर्षों में दूसरा अवसर है जब अनिल अंबानी से जुड़ी किसी सेटलमेंट याचिका को सेबी ने अस्वीकार किया है।
विदेशी मुद्रा भंडार में दर्ज हुई बढ़ोतरी
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 19 जून को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 96.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 672.58 अरब डॉलर हो गया। पिछले सप्ताह इसमें उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन इस बार स्वर्ण भंडार के मूल्य में वृद्धि ने कुल भंडार को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
सोने के भंडार का मूल्य बढ़कर लगभग 108 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया, जबकि विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में मामूली कमी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करता है।
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कच्चे तेल की कीमतों में साप्ताहिक बड़ी गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों प्रमुख बेंचमार्क इस सप्ताह लगभग 10 प्रतिशत की साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ते दिखाई दिए। विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की सामान्य आवाजाही बहाल होने से बाजार में आपूर्ति संबंधी चिंताएं घटी हैं। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो कई देशों में ईंधन कीमतों पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
फॉक्सवैगन बड़े पुनर्गठन की तैयारी में
यूरोप की प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन लागत कम करने और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर पुनर्गठन की योजना बना रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी लगभग एक लाख कर्मचारियों की संख्या घटाने और जर्मनी में चार विनिर्माण संयंत्र बंद करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।
इस योजना का उद्देश्य दशक के अंत तक अरबों यूरो की अतिरिक्त लागत बचाना है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह यूरोपीय ऑटोमोबाइल उद्योग के सबसे बड़े पुनर्गठन अभियानों में से एक माना जाएगा।
भारत में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में बदलाव संभव
सरकार आगामी 1 जुलाई से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क की नई दरों की घोषणा कर सकती है। वर्तमान शुल्क 30 जून तक प्रभावी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और घरेलू स्तर पर ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता को देखते हुए सरकार शुल्क की समीक्षा कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति सामान्य बनी रहती है तो निर्यात शुल्क में कमी की संभावना बढ़ सकती है।









