संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में सैम ऑल्टमैन और डारियो अमोडेई ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े संभावित जोखिमों पर चर्चा की। दोनों ने AI के सुरक्षित विकास के लिए देशों के बीच सहयोग और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों की जरूरत बताई।
Tech: संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में OpenAI के प्रमुख सैम ऑल्टमैन और Anthropic के प्रमुख डारियो अमोडेई ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव और संभावित जोखिमों को लेकर अपनी बात रखी। दोनों ने AI के विकास के साथ सुरक्षा उपायों, अंतरराष्ट्रीय समन्वय और देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में AI पर चर्चा
सैम ऑल्टमैन और डारियो अमोडेई ने 23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। बैठक में AI तकनीक के तेजी से हो रहे विकास और इसके संभावित प्रभावों को लेकर चर्चा हुई।

सैम ऑल्टमैन ने कहा कि अलग-अलग देशों के बीच प्रतिस्पर्धा और मतभेद के बावजूद उभरती शक्तिशाली तकनीक से जुड़े साझा हितों के लिए सहयोग जरूरी है। उन्होंने AI के भविष्य के विकास में लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका और मानव नियंत्रण बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।
डारियो अमोडेई ने अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर दिया जोर
Anthropic के प्रमुख डारियो अमोडेई ने AI के तेजी से हो रहे विकास को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय की जरूरत बताई। उन्होंने AI प्रणालियों की जांच और सुरक्षा के लिए वैश्विक मानकों तथा देशों के बीच समझौतों की आवश्यकता पर जोर दिया।
अमोडेई के अनुसार, लोकतांत्रिक और अधिनायकवादी सरकारों के बीच समन्वय इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण चुनौती हो सकता है। उन्होंने AI के विकास से जुड़े संभावित जोखिमों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने की बात कही।
AI सुरक्षा को लेकर बढ़ी वैश्विक चर्चा
संयुक्त राष्ट्र में यह चर्चा ऐसे समय हुई है जब AI प्रणालियों की बढ़ती क्षमताओं और उनसे जुड़े संभावित जोखिमों पर दुनियाभर में चर्चा जारी है। ऑल्टमैन और अमोडेई ने AI के सुरक्षित विकास के लिए सुरक्षा उपायों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर अपने-अपने विचार रखे।
दोनों के संबोधनों में AI के विकास के साथ सुरक्षा, परीक्षण, अंतरराष्ट्रीय समन्वय और मानव नियंत्रण जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। बैठक में AI से जुड़े वैश्विक जोखिमों से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया गया।











