नागालैंड के दीमापुर में नाबालिग से कथित यौन शोषण की घटना की सांसद एस. फांगनॉन कोन्याक ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने त्वरित जांच और सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए बच्चों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
कोहिमा: नगालैंड से राज्यसभा सांसद S. Phangnon Konyak ने दीमापुर में नाबालिग के साथ कथित यौन शोषण की घटना पर गहरी चिंता और कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने इस घटना को “मानवता को शर्मसार करने वाला जघन्य अपराध” बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
यह मामला Dimapur में सामने आने के बाद राज्यभर में रोष फैल गया है, जबकि सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है।
सांसद ने पुलिस आयुक्त से की बातचीत
सांसद एस. फांगनोन कोन्याक ने बताया कि उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीधे दीमापुर के पुलिस आयुक्त से बातचीत की। पुलिस आयुक्त ने उन्हें जानकारी दी कि पुलिस ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए (suo motu cognisance) जांच शुरू कर दी है और जांच प्रक्रिया में प्रगति हो रही है।
सांसद ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है और पुलिस को बिना किसी देरी के निष्पक्ष, पारदर्शी और कठोर जांच सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके।
“समाज में ऐसे अपराधों की कोई जगह नहीं” – सांसद
इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए सांसद ने कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराध किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि ऐसे अमानवीय कृत्य केवल पीड़ित और उसके परिवार को ही नहीं बल्कि पूरे समाज को झकझोर देते हैं।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“नाबालिगों के खिलाफ अपराध अत्यंत गंभीर और असहनीय हैं। समाज के हर जिम्मेदार नागरिक को एकजुट होकर ऐसे अपराधों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।”
बच्चों की सुरक्षा पर उठाए सवाल
सांसद कोन्याक ने इस घटना के बाद राज्य में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और संवेदनशीलता से भी जुड़ा हुआ विषय है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार, पुलिस प्रशासन, स्कूलों और समुदायों को मिलकर बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना होगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
त्वरित न्याय और सख्त कार्रवाई की मांग
सांसद ने मांग की कि जांच तेजी से पूरी की जाए और दोषियों को कानून के अनुसार कठोरतम सजा दी जाए। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी किसी भी पीड़ित के लिए न्याय से इनकार के समान है, इसलिए समयबद्ध कार्रवाई बेहद जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में विशेष त्वरित अदालतों (Fast Track Courts) के माध्यम से सुनवाई कर पीड़ित को शीघ्र न्याय दिलाया जाना चाहिए।

सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद नागालैंड में कई सामाजिक संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी है। संगठनों ने कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराध समाज के नैतिक ढांचे पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि न केवल दोषियों को सजा दी जाए, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस नीति भी बनाई जाए।
कई संगठनों ने स्कूलों और समुदाय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है, ताकि बच्चों को सुरक्षित रहने और खतरे की पहचान करने की शिक्षा दी जा सके।
पुलिस जांच में तेजी
दीमापुर पुलिस के अनुसार, मामले में जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। पुलिस ने पीड़ित के बयान दर्ज कर लिए हैं और तकनीकी व फॉरेंसिक साक्ष्यों को भी एकत्र किया जा रहा है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस का कहना है कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील है और इसलिए हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।
बच्चों के अधिकारों पर राष्ट्रीय बहस की जरूरत
यह घटना एक बार फिर देश में बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए केवल कानून ही नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव भी जरूरी है।
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्कूलों में यौन शिक्षा, जागरूकता अभियान और हेल्पलाइन सेवाओं को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि बच्चे किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें।
सरकार और प्रशासन पर जिम्मेदारी
सांसद ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से अपील की है कि इस मामले को “प्राथमिकता के आधार” पर लिया जाए और पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता दी जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ित के पुनर्वास और मानसिक स्वास्थ्य सहायता पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में केवल अपराधियों को सजा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पीड़ित के जीवन को फिर से सामान्य बनाने के लिए व्यापक समर्थन प्रणाली की आवश्यकता होती है।








