भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक तेज गिरावट के साथ बंद हुए। पूरे कारोबारी सत्र के दौरान निवेशकों की धारणा कमजोर रही और आईटी सेक्टर में आई बड़ी गिरावट ने बाजार पर सबसे अधिक दबाव बनाया।
बिजनेस न्यूज़: भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई। सोमवार को निवेशकों की कमजोर धारणा, वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेत और आईटी सेक्टर में तेज बिकवाली के कारण प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स करीब 900 अंक टूटकर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, विदेशी निवेशकों की सतर्कता और टेक्नोलॉजी सेक्टर में बढ़ते दबाव ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया। दिनभर के कारोबार के दौरान अधिकांश सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली, हालांकि फार्मा शेयरों ने कुछ हद तक राहत प्रदान की।
सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट
कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 893 अंक की गिरावट के साथ 76,200.68 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 278.80 अंक टूटकर 23,824.10 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट का दायरा व्यापक रहा और अधिकांश शेयर लाल निशान में बंद हुए। निवेशकों ने जोखिम वाले सेक्टरों से दूरी बनाते हुए सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना। विश्लेषकों के अनुसार, हाल के सप्ताहों में बाजार में आई तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली भी गिरावट का एक प्रमुख कारण रही।
आईटी शेयर बने गिरावट की सबसे बड़ी वजह
सोमवार की गिरावट में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेक्टर की सबसे बड़ी भूमिका रही। देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो जैसे दिग्गज शेयरों में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा भी दबाव में रहे।
वैश्विक स्तर पर तकनीकी कंपनियों के भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताओं और अमेरिकी बाजारों में टेक सेक्टर की कमजोरी का असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी दिखाई दिया। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियों का बड़ा कारोबार अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर निर्भर करता है, इसलिए वैश्विक आर्थिक संकेतकों में बदलाव का सीधा असर इनके शेयरों पर पड़ता है।
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मेटल और बैंकिंग सेक्टर भी दबाव में
आईटी सेक्टर के अलावा मेटल कंपनियों के शेयरों में भी भारी बिकवाली हुई। स्टील और धातु क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे सेक्टर में कमजोरी बढ़ी। टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और हिंडाल्को जैसे प्रमुख शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक मांग को लेकर चिंताओं का असर इस सेक्टर पर पड़ा।
बैंकिंग शेयर भी बाजार को संभालने में सफल नहीं रहे। एचडीएफसी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस जैसे बड़े वित्तीय संस्थानों के शेयर दबाव में रहे। बैंकिंग सेक्टर की कमजोरी ने सूचकांकों की गिरावट को और गहरा कर दिया।
बड़े कॉर्पोरेट शेयरों में भी बिकवाली
देश की कुछ सबसे बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। रिलायंस इंडस्ट्रीज, अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स जैसे प्रमुख शेयरों में गिरावट ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया। इन कंपनियों का बाजार पूंजीकरण काफी बड़ा होने के कारण इनके शेयरों में मामूली गिरावट भी सूचकांकों पर बड़ा असर डालती है। निवेशकों की सतर्कता और जोखिम कम करने की रणनीति ने इन शेयरों में बिकवाली को बढ़ावा दिया।
जहां अधिकांश सेक्टर लाल निशान में बंद हुए, वहीं फार्मास्युटिकल कंपनियों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। सिप्ला, डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेटरीज और सन फार्मा जैसे शेयरों में खरीदारी देखी गई। आर्थिक अनिश्चितता के दौर में फार्मा सेक्टर को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश माना जाता है। यही कारण है कि बाजार में गिरावट के बावजूद इस क्षेत्र में निवेशकों की रुचि बनी रही।








