अमेरिका के 25 डेमोक्रेटिक राज्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नए टैरिफ को कोर्ट में चुनौती देते हुए इसे अवैध बताया है। राज्यों का कहना है कि इससे महंगाई बढ़ेगी और राष्ट्रपति ने ट्रेड एक्ट 1974 का गलत उपयोग किया है।
दारफुर: सूडान के पश्चिमी दारफुर क्षेत्र में जारी गृहयुद्ध के बीच एक पारंपरिक अदालत (ट्राइबल कोर्ट) की बैठक पर हुए ड्रोन हमले में कम से कम 35 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। स्थानीय मानवाधिकार संगठन इमरजेंसी लॉयर्स ग्रुप (Emergency Lawyers Group) ने इस घटना की जानकारी देते हुए कहा कि हमला उत्तर दारफुर के घारा अल-जाविया (Ghara al-Zawiya) गांव में हुआ, जहां उस समय स्थानीय समुदाय के नेताओं की मौजूदगी में एक पारंपरिक न्यायिक बैठक चल रही थी। संगठन ने आरोप लगाया कि यह ड्रोन हमला सूडानी सेना की ओर से किया गया, हालांकि समाचार लिखे जाने तक सेना ने इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
पेड़ के नीचे चल रही थी अदालत की कार्यवाही
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पारंपरिक अदालत की कार्यवाही गांव में एक बड़े पेड़ के नीचे आयोजित की जा रही थी। इस बैठक में स्थानीय जनजातीय नेताओं, समुदाय के प्रतिनिधियों और क्षेत्रीय विवादों के समाधान के लिए कई लोग मौजूद थे।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अचानक आसमान में ड्रोन दिखाई दिए और कुछ ही देर बाद कई मिसाइलें दागी गईं, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। विस्फोट इतने शक्तिशाली थे कि कई लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
चार जनजातीय नेता और दो आरएसएफ कमांडर भी मारे गए
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मृतकों में चार प्रमुख जनजातीय नेता और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के दो कमांडर भी शामिल हैं। हालांकि मृतकों की आधिकारिक सूची अभी तक जारी नहीं की गई है और स्वतंत्र रूप से सभी दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
घायलों को आसपास के स्वास्थ्य केंद्रों और अस्थायी चिकित्सा शिविरों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
मानवाधिकार संगठन ने जांच की मांग की
इमरजेंसी लॉयर्स ग्रुप ने इस घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि नागरिकों की मौजूदगी वाले स्थान पर जानबूझकर हमला किया गया है, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (International Humanitarian Law) का गंभीर उल्लंघन हो सकता है।
संगठन ने बयान में कहा कि अदालत, नागरिक सभाओं और गैर-सैन्य ढांचों को निशाना बनाना किसी भी सशस्त्र संघर्ष के दौरान स्वीकार्य नहीं है। उसने सभी पक्षों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की अपील की।
ड्रोन हमलों के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि सूडान के गृहयुद्ध में हाल के महीनों में ड्रोन हमलों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। उनका कहना है कि आधुनिक ड्रोन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से नागरिक आबादी के लिए खतरा और अधिक गंभीर हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, घनी आबादी वाले क्षेत्रों, बाजारों, अस्पतालों और सार्वजनिक सभाओं के आसपास ड्रोन हमलों का जोखिम लगातार बढ़ रहा है, जिससे मानवीय संकट और गहरा हो सकता है।
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दारफुर में जारी है भीषण संघर्ष
दारफुर क्षेत्र पिछले कई वर्षों से हिंसा और संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। वर्तमान गृहयुद्ध में रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) ने दारफुर के अधिकांश हिस्सों पर नियंत्रण स्थापित कर रखा है, जबकि सूडानी सेना इन इलाकों पर दोबारा कब्जा करने के लिए सैन्य अभियान चला रही है।
लगातार हो रहे संघर्षों के कारण लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं और हजारों लोगों की जान जा चुकी है। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां पहले ही सूडान को दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक बता चुकी हैं।
आरएसएफ पर भी लगे हैं गंभीर आरोप
सिर्फ सूडानी सेना ही नहीं, बल्कि रैपिड सपोर्ट फोर्सेज पर भी पिछले तीन वर्षों के दौरान कई गंभीर आरोप लगे हैं। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों में आरएसएफ पर नागरिकों पर हमले, जबरन विस्थापन, यौन हिंसा और युद्ध अपराधों के आरोप लगाए गए हैं।
संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र जांच मिशन ने पिछले वर्ष दारफुर के प्रमुख शहर एल-फाशेर (El-Fasher) पर आरएसएफ के हमलों में "नरसंहार जैसे संकेत" (Hallmarks of Genocide) पाए जाने की बात कही थी। हालांकि आरएसएफ इन आरोपों से लगातार इनकार करता रहा है।
गृहयुद्ध ने बढ़ाया मानवीय संकट
सूडान में अप्रैल 2023 से सेना और आरएसएफ के बीच जारी संघर्ष ने देश की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचाया है। लाखों लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हो चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में नागरिक पड़ोसी देशों में शरण लेने को मजबूर हुए हैं।
स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में भोजन, दवाइयों और स्वच्छ पेयजल की भारी कमी बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ती चिंता
दारफुर में ताजा ड्रोन हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और बढ़ गई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि संघर्ष के सभी पक्षों को नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हिंसा इसी तरह जारी रही तो सूडान में मानवीय संकट और गंभीर हो सकता है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठन संघर्ष विराम, मानवीय सहायता और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।









