भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें स्वतंत्रता सेनानी Subhas Chandra Bose को “राष्ट्र पुत्र” घोषित करने और उनकी भूमिका को लेकर आधिकारिक मान्यता देने की मांग की गई थी।
नई दिल्ली: Supreme Court of India ने एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें यह मांग की गई थी कि Subhas Chandra Bose की Azad Hind Fauj को भारत की आजादी दिलाने वाला घोषित किया जाए। याचिका में नेताजी को ‘राष्ट्र पुत्र’ घोषित करने और 21 अक्टूबर 1943 (आईएनए स्थापना दिवस) तथा 23 जनवरी 1897 (उनकी जयंती) को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने की भी मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) की पीठ ने इस याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार की घोषणाएं न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं।
क्या थी याचिका की मांग?
याचिका में दावा किया गया था कि Indian National Army (INA) यानी आजाद हिंद फौज ने भारत की स्वतंत्रता में निर्णायक भूमिका निभाई और इसी आधार पर नेताजी को “राष्ट्र पुत्र” घोषित किया जाना चाहिए। इसके अलावा याचिका में दो प्रमुख तिथियों को राष्ट्रीय दिवस घोषित करने की भी मांग की गई थी:
- 21 अक्टूबर 1943 – आजाद हिंद सरकार की स्थापना का दिन
- 23 जनवरी 1897 – नेताजी की जयंती
याचिकाकर्ता ने यह भी आग्रह किया कि इन ऐतिहासिक घटनाओं को आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय मान्यता दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
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इस मामले की सुनवाई Supreme Court of India की पीठ ने की, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश Surya Kant कर रहे थे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के मुद्दे न्यायिक समीक्षा के दायरे में नहीं आते। अदालत ने कहा कि ऐसे विषय नीति निर्धारण और ऐतिहासिक व्याख्या से जुड़े होते हैं, जिन पर निर्णय लेना न्यायपालिका का काम नहीं है।
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि इसी याचिकाकर्ता द्वारा पहले भी इसी तरह की याचिका दायर की गई थी, जिसे पहले ही खारिज किया जा चुका है। पीठ ने कहा कि पहले दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इस तरह की याचिका दोबारा दाखिल करना अनुचित है।
“पब्लिसिटी के लिए दायर की गई याचिका” – कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह याचिका केवल “प्रचार (publicity) हासिल करने” के उद्देश्य से दायर की गई प्रतीत होती है। कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि न्यायालय का समय इस प्रकार की तुच्छ याचिकाओं में बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह की याचिकाएं दाखिल करने से बचें। कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसा दोबारा किया गया, तो भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा, अब आप यहां से जाइए, नहीं तो हम आप पर जुर्माना लगा देंगे। अदालत ने अपनी रजिस्ट्री को भी निर्देश दिया कि इस याचिकाकर्ता द्वारा इसी तरह के मुद्दों पर दायर किसी भी भविष्य की PIL को स्वीकार न किया जाए।











