N Ramchander Rao ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चुनाव आयोग की नियमित और संवैधानिक प्रक्रिया है। उन्होंने कांग्रेस, BRS और AIMIM पर राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को गुमराह करने तथा फर्जी वोटरों की रक्षा करने का आरोप लगाया।
हैदराबाद: तेलंगाना में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य भाजपा अध्यक्ष N Ramchander Rao ने कांग्रेस, Bharat Rashtra Samithi (BRS) और All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) पर आरोप लगाया है कि वे इस प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण कोई नई पहल नहीं है, बल्कि भारत के चुनावी ढांचे का एक नियमित और संवैधानिक हिस्सा है, जिसे समय-समय पर लागू किया जाता रहा है।
राव के बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां मतदाता सूची की पारदर्शिता, अवैध मतदाताओं के आरोप और राजनीतिक दलों के वोट बैंक की राजनीति जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
चुनाव आयोग की नियमित प्रक्रिया है SIR
रामचंदर राव ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण न तो प्रधानमंत्री Narendra Modi की पहल है और न ही केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया कोई नया कार्यक्रम। उनके अनुसार यह प्रक्रिया Election Commission of India द्वारा नियमित रूप से संचालित की जाती है और अतीत में कई बार लागू की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि देश में विभिन्न सरकारों के कार्यकाल के दौरान यह प्रक्रिया पहले भी कई बार संपन्न हो चुकी है। इसलिए इसे किसी राजनीतिक दल या सरकार से जोड़ना तथ्यों के विपरीत है। उनका दावा था कि वर्तमान विवाद केवल राजनीतिक लाभ हासिल करने के उद्देश्य से पैदा किया जा रहा है।
विपक्ष पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, BRS और AIMIM इस प्रक्रिया का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें अपने पारंपरिक वोट बैंक पर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इन दलों द्वारा मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
राव ने सवाल उठाया कि यदि यह प्रक्रिया गलत है तो इन दलों ने पहले हुए विशेष पुनरीक्षण अभियानों के दौरान विरोध क्यों नहीं किया। उनके अनुसार SIR का उद्देश्य केवल नए मतदाताओं का पंजीकरण, मृत मतदाताओं के नाम हटाना और पते में बदलाव जैसी तकनीकी प्रक्रियाओं को अद्यतन करना है।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक विवाद के रूप में।
फर्जी और डुप्लीकेट वोटों का मुद्दा
भाजपा नेता ने दावा किया कि राज्य के कुछ क्षेत्रों में फर्जी और डुप्लीकेट मतदाताओं की समस्या मौजूद है। उन्होंने विशेष रूप से हैदराबाद के कुछ निर्वाचन क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि एक ही पते पर असामान्य संख्या में मतदाता दर्ज हैं।
राव ने कहा कि यदि किसी घर में बड़ी संख्या में संदिग्ध मतदाता सूचीबद्ध हैं, तो उनकी जांच होना आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा किसी भी प्रकार के फर्जी मतदान या अवैध मतदाता पंजीकरण का विरोध करती है और मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के पक्ष में है।
हालांकि इन आरोपों पर संबंधित दलों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं और कई मामलों में स्वतंत्र सत्यापन की आवश्यकता बताई जाती है।
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रोहिंग्या और विदेशी नागरिकों को लेकर आरोप
रामचंदर राव ने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी नागरिकों ने कथित तौर पर अवैध रूप से पहचान दस्तावेज प्राप्त कर लिए हैं और मतदाता सूची में शामिल होने का प्रयास किया है। उन्होंने रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तान से जुड़े लोगों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में राजनीतिक संरक्षण के कारण ऐसे लोगों को सरकारी दस्तावेज प्राप्त हुए हैं। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची से संबंधित ऐसे दावों की पुष्टि केवल आधिकारिक जांच और चुनाव आयोग की प्रक्रिया के माध्यम से ही की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
भाजपा नेता ने अपने बयान में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि अदालत ने विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को कानूनी और वैध माना है तथा चुनाव आयोग को मतदाता सूची से अयोग्य या अवैध प्रविष्टियां हटाने का अधिकार दिया है।
राव के अनुसार यह निर्णय दर्शाता है कि चुनाव आयोग संविधान और कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मतदाता सूची का नियमित अद्यतन आवश्यक है।
कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला
अपने बयान में रामचंदर राव ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला भी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस द्वारा मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर उठाए जा रहे सवाल तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ विपक्षी नेता दावा कर रहे हैं कि इसी प्रकार की प्रक्रियाओं के कारण अन्य राज्यों में चुनाव परिणाम प्रभावित हुए, लेकिन ऐसे आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है। भाजपा का कहना है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसके कार्यों को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।
मतदाता अधिकारों को लेकर आश्वासन
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि किसी भी पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाने का उद्देश्य नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि SIR का मकसद केवल अपात्र या फर्जी प्रविष्टियों को हटाना और वास्तविक मतदाताओं का रिकॉर्ड अद्यतन करना है।
उनका कहना था कि यदि कोई नागरिक वैध रूप से मतदाता है तो उसके मतदान अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की।
तेलंगाना की राजनीति में बढ़ सकता है विवाद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का मुद्दा आने वाले समय में तेलंगाना की राजनीति में महत्वपूर्ण विषय बन सकता है। राज्य में विभिन्न दल इस मुद्दे को अपने-अपने राजनीतिक दृष्टिकोण से पेश कर रहे हैं।
जहां भाजपा इसे चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता से जोड़ रही है, वहीं विपक्षी दल प्रक्रिया के दुरुपयोग की आशंका जता रहे हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में यह बहस और तेज हो सकती है।








