तिरहुत स्नातक चुनाव में वंशीधर ब्रजवासी का दबदबा दूसरी वरीयता के वोटों पर टिकी नजर

तिरहुत स्नातक एमएलसी चुनाव में वंशीधर ब्रजवासी और जदयू के अभिषेक झा के बीच कड़ा मुकाबला है। पहली वरीयता के मतों के बाद दूसरी वरीयता की गिनती अहम होगी।
तिरहुत स्नातक चुनाव में वंशीधर ब्रजवासी का दबदबा दूसरी वरीयता के वोटों पर टिकी नजर
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मुजफ्फरपुर में तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव की मतगणना के दौरान निर्दलीय प्रत्याशी वंशीधर ब्रजवासी ने बढ़त बनाकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। शुरुआती रुझानों में ब्रजवासी ने जदयू प्रत्याशी अभिषेक झा को पीछे रखा है, जबकि राजद समर्थित प्रत्याशी डॉ. रश्मि विनायक गौतम भी मतों की गिनती में प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। मतगणना के अलग-अलग चरणों में उम्मीदवारों के बीच वोटों का अंतर बदलने से मुकाबला लगातार रोचक बना हुआ है। अब सबकी नजर आगे की गिनती और दूसरी वरीयता के मतों पर टिकी है, क्योंकि पहली वरीयता के मतों से जीत का फैसला नहीं होने की स्थिति में दूसरी वरीयता के मत निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

मतगणना के पहले राउंड में वंशीधर ब्रजवासी को 2813 मत मिले थे। जदयू के अभिषेक झा को 1739 मत प्राप्त हुए और वह दूसरे स्थान पर रहे। राजद समर्थित डॉ. रश्मि विनायक गौतम को 1407 मत मिले। पहले राउंड के आंकड़ों में ब्रजवासी ने अभिषेक झा पर 1074 मतों की बढ़त बनाई थी। हालांकि, अगले राउंड में मुकाबले का अंतर बदलता रहा और अभिषेक झा ने भी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की। मतगणना के आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट हुआ कि अंतिम नतीजे के लिए सभी चरणों की गणना महत्वपूर्ण होगी।

छठे राउंड की गिनती के बाद भी वंशीधर ब्रजवासी आगे बने हुए थे, लेकिन उनकी बढ़त घटकर 235 मत रह गई थी। इस चरण में ब्रजवासी को 2327 वोट मिले, जबकि अभिषेक झा के खाते में 2092 वोट आए। इससे पहले पांचवें राउंड में ब्रजवासी ने 535 मतों की बढ़त बनाई थी। लगातार बदलते मतांतर ने चुनावी मुकाबले को और करीबी बना दिया। ऐसे में केवल शुरुआती बढ़त के आधार पर अंतिम परिणाम का अनुमान लगाना उचित नहीं है और आधिकारिक मतगणना पूरी होने तक स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।

तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में वरीयता आधारित मतगणना की प्रक्रिया भी अहम है। इस व्यवस्था में मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवारों को पहली और उसके बाद दूसरी वरीयता दे सकते हैं। यदि पहली वरीयता के मतों से किसी प्रत्याशी को जीत के लिए आवश्यक मत नहीं मिलते हैं, तो नियमानुसार आगे की वरीयताओं के मतों की गणना की जाती है। इस प्रक्रिया में कम मत पाने वाले प्रत्याशियों को क्रमशः गणना से बाहर किया जा सकता है और उनके मतपत्रों पर दर्ज अगली वरीयता को निर्धारित नियमों के अनुसार शेष उम्मीदवारों के मतों में शामिल किया जाता है। इसी वजह से पहली वरीयता में आगे चल रहे प्रत्याशी की बढ़त अंतिम नतीजे तक कायम रहे, यह जरूरी नहीं है।

वंशीधर ब्रजवासी की बढ़त ने इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी की भूमिका को चर्चा में ला दिया है। दूसरी ओर जदयू प्रत्याशी अभिषेक झा के मतों और दोनों उम्मीदवारों के बीच बदलते अंतर पर भी राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है। राजद समर्थित डॉ. रश्मि विनायक गौतम के मत भी चुनावी गणना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अब आगे की मतगणना और दूसरी वरीयता के मतों की गणना से ही साफ होगा कि मुकाबले का अंतिम परिणाम किस दिशा में जाता है। मतदाताओं और उम्मीदवारों की निगाहें आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं।

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