त्रिपुरा में महिला आरक्षण कानून को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया। कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे राजनीतिक लाभ का साधन बताया और परिसीमन प्रक्रिया पर भी संवैधानिक सवाल उठाए।
अगरतला: त्रिपुरा में महिला आरक्षण कानून को लेकर राजनीतिक तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। 30 अप्रैल को वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि महिला आरक्षण कानून का इस्तेमाल वास्तविक महिला सशक्तिकरण के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
कांग्रेस विधायक का केंद्र पर सीधा हमला
विधानसभा में चर्चा के दौरान सुदीप रॉय बर्मन ने कहा कि महिला आरक्षण की 33 प्रतिशत व्यवस्था की पहल मूल रूप से कांग्रेस ने की थी, लेकिन अब इसका राजनीतिक श्रेय भाजपा लेने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस ने इस विधेयक को आगे बढ़ाया था, तब कई भाजपा नेताओं ने इसका विरोध किया था। उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दिवंगत नेता सुषमा स्वराज के बयानों का भी उल्लेख किया और दावा किया कि उन्होंने उस समय इस बिल का विरोध किया था।
रॉय बर्मन ने कहा, “मैं सदन में यह साबित कर सकता हूं कि उस समय भाजपा नेताओं ने इस बिल का विरोध किया था।”
कानून के नोटिफिकेशन की टाइमिंग पर सवाल
कांग्रेस विधायक ने महिला आरक्षण कानून के लागू होने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद में यह बिल सितंबर 2023 में पारित हुआ था, लेकिन इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन 16 अप्रैल 2026 को जारी किया गया।
उनके अनुसार, इस देरी से यह संदेह पैदा होता है कि सरकार इस कानून का इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजनीतिक रणनीति आगे बढ़ा रही है, न कि वास्तविक सुधार के लिए।
![]()
डिलिमिटेशन और संविधान पर उठाए सवाल
रॉय बर्मन ने इस कानून के क्रियान्वयन से जुड़े परिसीमन (Delimitation) प्रावधानों पर भी गंभीर संवैधानिक सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 81 और 82 संसदीय सीटों के पुनर्वितरण और परिसीमन से जुड़े हैं, और सरकार यह स्पष्ट नहीं कर रही कि बिना इन प्रावधानों में बदलाव किए महिला आरक्षण कैसे लागू किया जाएगा।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “जब तक अनुच्छेद 81 और 82 को संशोधित या निरस्त नहीं किया जाता, तब तक यह परिसीमन कानून कैसे लागू होगा?”
पूर्वोत्तर राज्यों पर असर की चिंता
कांग्रेस विधायक ने यह भी कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया छोटे राज्यों, खासकर पूर्वोत्तर भारत पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने त्रिपुरा का उदाहरण देते हुए कहा कि 2011 की जनगणना के बाद राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं हुई।
उनके अनुसार, अगर परिसीमन बिना उचित सुरक्षा उपायों के लागू किया गया तो छोटे राज्यों का प्रतिनिधित्व और कमजोर हो सकता है।
महिला आरक्षण कानून का उद्देश्य और विवाद
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। हालांकि, इसका वास्तविक कार्यान्वयन आगामी जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन पर निर्भर है।
यही कारण है कि इस कानून को लेकर राजनीतिक बहस लगातार जारी है, क्योंकि इसके लागू होने की समयसीमा और प्रक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
विधानसभा में बढ़ा राजनीतिक तापमान
कांग्रेस विधायक के बयान के बाद त्रिपुरा विधानसभा में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिला आरक्षण, परिसीमन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।









