उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव: सालाना 12 से घटकर 4 हुए LPG सिलेंडर

उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव किया गया है। अब लाभार्थियों को सालाना 12 की जगह सिर्फ 4 LPG सिलेंडर मिलेंगे। जानें इस फैसले का असर और नई शर्तें।

Pradhan Mantri Ujjwala Yojana को लेकर सरकार ने सोमवार को एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत अब प्रति वर्ष मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या को 9 से घटाकर 4 कर दिया गया है।

बिजनेस न्यूज़: भारत सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की सीमा में बड़ा बदलाव किया है। अब लाभार्थियों को सालाना 12 या 9 की बजाय केवल 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलेंगे। इस फैसले को पिछले एक दशक में कल्याणकारी योजनाओं में सबसे बड़ा नीति-परिवर्तन माना जा रहा है।

क्या है उज्ज्वला योजना में नया बदलाव?

Pradhan Mantri Ujjwala Yojana के तहत अब तक लाभार्थियों को मुफ्त या सब्सिडी दर पर सालाना 9 सिलेंडर तक का लाभ मिलता था। शुरुआत में यह सीमा 12 सिलेंडर प्रति वर्ष थी। नए निर्णय के बाद:

  • पहले: 12 सिलेंडर (2016 में शुरुआत)
  • बाद में: 9 सिलेंडर
  • अब: केवल 4 सिलेंडर प्रति वर्ष

इस बदलाव के बाद योजना की संरचना और सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

सरकार के फैसले के पीछे आर्थिक दबाव

उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव: सालाना 12 से घटकर 4 हुए LPG सिलेंडर

सरकारी सूत्रों और ऊर्जा क्षेत्र के अनुमानों के अनुसार, एलपीजी सब्सिडी और ईंधन सहायता पर सरकार का खर्च लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान स्थिति:

  • LPG सब्सिडी खर्च: ₹11,000–₹12,000 करोड़ प्रति वर्ष
  • ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को अतिरिक्त सहायता: लगभग ₹30,000 करोड़
  • कुल वेलफेयर फ्यूल सपोर्ट: करीब ₹41,000 करोड़

इसके बावजूद तेल कंपनियों को हर सिलेंडर पर लगभग ₹700 का नुकसान हो रहा है।

वैश्विक संकट का असर और तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव

विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अस्थिरता और पश्चिम एशिया में तनाव ने भारत की ऊर्जा लागत को प्रभावित किया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85–88% आयात करता है, जिससे:

  • कच्चे तेल की कीमत में $10/बैरल की बढ़ोतरी
  • भारत के आयात बिल में ₹1–1.5 लाख करोड़ तक का असर

इस कारण सरकार पर सब्सिडी और राजकोषीय संतुलन बनाए रखने का दबाव बढ़ गया है। Pradhan Mantri Ujjwala Yojana के तहत अब तक 10 करोड़ से अधिक परिवारों को स्वच्छ ईंधन से जोड़ा गया है। यह योजना ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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