मॉनसून के दौरान Himalayan region के राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बादल फटने (cloudburst) की घटनाएँ अक्सर भारी तबाही का कारण बनती हैं।
नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन और बढ़ती चरम मौसम घटनाओं के बीच भारत के वैज्ञानिकों ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। IIT भुवनेश्वर के वैज्ञानिकों ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मौसम पूर्वानुमान मॉडल विकसित किया है, जो बादल फटने और अत्यधिक वर्षा जैसी गंभीर घटनाओं की 72 घंटे पहले चेतावनी देने में सक्षम बताया जा रहा है।
यह तकनीक विशेष रूप से हिमालयी राज्यों—हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर—के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां हर साल मॉनसून के दौरान बादल फटने, भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ से भारी जन-धन की हानि होती है।
क्या है नया AI आधारित मौसम मॉडल?
IIT भुवनेश्वर के वैज्ञानिक संदीप पटनायक, हेमंत कुमार और धनंजय त्रिवेदी ने एक ड्यूल एन्कोडर क्रॉस अटेंशन फ्यूजन ट्रांसफॉर्मर मॉडल विकसित किया है। यह एक उन्नत डीप लर्निंग सिस्टम है, जो मौसम से जुड़े विशाल और जटिल आंकड़ों का विश्लेषण करके संभावित आपदाओं का पूर्वानुमान लगाने में सक्षम है।यह मॉडल तापमान, आर्द्रता, वायुमंडलीय दबाव, वर्षा और अन्य मौसम संबंधी संकेतकों का एक साथ विश्लेषण करता है, जिससे अत्यधिक वर्षा और बादल फटने जैसी घटनाओं की संभावना का अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सकता है।
वैज्ञानिकों ने इस AI मॉडल का परीक्षण वर्ष 2023 में उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में हुई भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं के दौरान किया। उस समय कई क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुई थीं, जिनमें 140 से अधिक लोगों की जान गई थी। परीक्षण के दौरान AI मॉडल ने संभावित आपदा के संकेत लगभग 72 घंटे पहले देने में सफलता हासिल की। विभिन्न क्षेत्रों में इसकी सटीकता उल्लेखनीय रही—
- मंडी : लगभग 68 प्रतिशत
- देहरादून : लगभग 67 प्रतिशत
- हरिद्वार : लगभग 54 प्रतिशत
- पौड़ी गढ़वाल : लगभग 78 प्रतिशत
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मॉडल बारिश की तीव्रता और समय में होने वाले बदलावों को पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में अधिक प्रभावी ढंग से समझने में सक्षम है।
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पारंपरिक मौसम मॉडल से कैसे अलग है यह तकनीक?
वर्तमान में मौसम पूर्वानुमान के लिए व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले मौसम अनुसंधान एवं पूर्वानुमान (WRF) मॉडल की अपनी सीमाएं हैं, विशेषकर स्थानीय स्तर पर होने वाली अचानक मौसम घटनाओं की पहचान में। नई AI प्रणाली लगातार सीखने और नए डेटा के आधार पर अपने पूर्वानुमानों में सुधार करने की क्षमता रखती है। यही कारण है कि वैज्ञानिक इसे भविष्य की मौसम चेतावनी प्रणालियों के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति मान रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक को व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है, तो स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में पहले से तैयारी करने का पर्याप्त समय मिल सकता है। 72 घंटे पहले मिलने वाली चेतावनी के आधार पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना, सड़क और यातायात प्रबंधन करना तथा राहत और बचाव दलों को तैनात करना अधिक प्रभावी ढंग से संभव हो सकेगा।
दिल्ली जैसे शहरों के लिए भी उपयोगी हो सकती है तकनीक
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जब किसी सीमित क्षेत्र में एक घंटे के भीतर 100 मिलीमीटर या उससे अधिक वर्षा होती है, तो उसे बादल फटने की घटना माना जाता है। हाल के वर्षों में दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में भी कम समय में अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते जलवायु पैटर्न को देखते हुए भविष्य में महानगरों के लिए भी ऐसी उन्नत चेतावनी प्रणालियां महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसम घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है। ऐसे समय में IIT भुवनेश्वर द्वारा विकसित AI आधारित मौसम पूर्वानुमान मॉडल भारत के आपदा प्रबंधन तंत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।








