मुंबई पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग, क्रिकेट सट्टेबाजी और कैसीनो से जुड़े साइबर फ्रॉड के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले अंतरराज्यीय म्यूल अकाउंट नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर 110 बैंक खातों की पहचान की है।
महाराष्ट्र: मुंबई पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग, क्रिकेट सट्टेबाजी और कैसीनो से जुड़े साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किए जा रहे एक बड़े अंतरराज्यीय म्यूल बैंक अकाउंट नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। डोंगरी पुलिस के साइबर दस्ते को इस नेटवर्क के बारे में गोपनीय और विश्वसनीय जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस ने बैंकिंग ट्रांजैक्शन, तकनीकी डेटा और डिजिटल सबूतों का विश्लेषण शुरू किया। जांच के दौरान संदिग्ध बैंक खातों और उनसे जुड़े लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने सैंडहर्स्ट रोड रेलवे स्टेशन, डॉ. महेश्वरी रोड और डोंगरी इलाके में कार्रवाई की। इस कार्रवाई के दौरान नेटवर्क से जुड़े छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में निखिल कमल कुमार जयसवानी, राहुल श्यामलाल परवानी और जय बिहारीलाल तीरपाठी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, ये तीनों मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। मामले में पांच अन्य आरोपी फरार हैं, जबकि तीन महिलाओं को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।
50 लाख रुपये से अधिक का सामान बरामद
पुलिस ने आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में बैंकिंग और डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। बरामद सामान में 44 बैंक पासबुक, 70 डेबिट कार्ड, 36 सिम कार्ड, 23 मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, एक टैबलेट, 12 बैंक किट और एक कार शामिल है।
पुलिस के मुताबिक, बरामद सामान की अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपये है। इतनी बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज और डिजिटल उपकरण मिलने से जांच एजेंसियों को नेटवर्क के संचालन और उसके संभावित संपर्कों की जानकारी जुटाने में मदद मिल रही है।
जांच के दौरान पुलिस ने कुल 110 बैंक खातों का पता लगाया। इनमें से 17 खातों से संबंधित वित्तीय और अन्य जानकारी संबंधित बैंकों से हासिल की गई है। इन खातों की तकनीकी जानकारी और लेन-देन का विश्लेषण करने पर देश के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज साइबर अपराधों से इनके संबंध सामने आए हैं।
17 खातों में डेढ़ महीने में 25.45 करोड़ रुपये की गतिविधि
पुलिस के अनुसार, जांच में शामिल 17 म्यूल बैंक खातों में पिछले करीब डेढ़ से दो महीने के दौरान 25.45 करोड़ रुपये की वित्तीय गतिविधि दर्ज हुई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों से पैसा किन लाभार्थी खातों में भेजा गया और उन खातों के पीछे कौन लोग या संगठन सक्रिय थे।
जांच में देशभर में दर्ज 38 साइबर अपराध और शिकायतों का संबंध इन बैंक खातों से सामने आया है। पुलिस को आशंका है कि जिन अन्य खातों की जांच अभी बाकी है, उनका इस्तेमाल भी दूसरे साइबर अपराधों में किया गया हो सकता है।
इसके अलावा, जब्त बैंक खातों के व्यापक विश्लेषण में 100 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन और साइबर फ्रॉड की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, इन सभी लेन-देन का वास्तविक साइबर अपराधों से संबंध जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
मुंबई से कई राज्यों तक फैले नेटवर्क के संकेत
जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क केवल डोंगरी इलाके तक सीमित नहीं था। पुलिस के अनुसार, इसके संपर्क मुंबई के गोवंडी, मानखुर्द और डोंगरी के अलावा नवी मुंबई के बेलापुर, पनवेल और उलवे तक फैले हुए थे। जांच में उस्मानाबाद से भी इस नेटवर्क का संबंध सामने आया है।

इन बैंक खातों से जुड़े साइबर अपराधों की शिकायतें महाराष्ट्र के अलावा कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में मिली हैं। इससे जांच एजेंसियों को संदेह है कि नेटवर्क का इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी से हासिल रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा था।
अब असली साइबर अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश
छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद डोंगरी पुलिस की जांच का अगला चरण नेटवर्क के पीछे मौजूद मुख्य साइबर अपराधियों की पहचान करना है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले कितना पैसा दिया जाता था और इन खातों की जानकारी किन लोगों तक पहुंचाई जाती थी।
जांच एजेंसियां बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों से मिले डेटा का विश्लेषण कर रही हैं। इसके जरिए संभावित लाभार्थी खातों, संपर्कों और साइबर अपराध से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस फरार आरोपियों की तलाश भी कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और अतिरिक्त बैंक खातों के बारे में जानकारी सामने आने की संभावना है।
पुलिस ने आम लोगों को किया सतर्क
डोंगरी पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता, पासबुक, डेबिट कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड या मोबाइल किसी अन्य व्यक्ति को न दें। बैंक खाते को किराए पर देना या उसका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति को करने देना भविष्य में गंभीर कानूनी और वित्तीय परेशानी पैदा कर सकता है।
पुलिस ने लोगों को OTP, PIN, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड और अन्य बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी है। अगर किसी खाते में कोई अनजान या संदिग्ध लेन-देन दिखाई देता है तो खाताधारक को तुरंत अपने बैंक से संपर्क करना चाहिए और संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देनी चाहिए।
मामले में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। मुंबई पुलिस अब इस नेटवर्क की वित्तीय कड़ियों को जोड़ने और इसके पीछे मौजूद साइबर अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। यह कार्रवाई साइबर फ्रॉड में बैंक खातों के दुरुपयोग और आम लोगों को मामूली आर्थिक लालच देकर अपराधी नेटवर्क का हिस्सा बनाए जाने के बढ़ते खतरे को भी उजागर करती है।












