आज से खत्म होगा अमेरिका का अतिरिक्त टैरिफ: भारत–अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील से क्या बदलेगा? जानें

भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के तहत आज से अमेरिकी अतिरिक्त टैरिफ खत्म हो जाएगा। जानिए इससे आम लोगों, उद्योग जगत और भारतीय निर्यातकों पर क्या असर पड़ेगा।

भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा जारी करते हुए उसका ढांचा तय कर लिया है और इस संबंध में संयुक्त बयान भी जारी किया है, जिसे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Framework) पर सहमति बन चुकी है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इस समझौते को दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसके तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को खत्म कर दिया है और सामान्य टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, MSME सेक्टर मजबूत होगा और लाखों नए रोजगार सृजित होंगे।

आज से खत्म हुआ भारत पर लगा अतिरिक्त टैरिफ

अमेरिकी प्रशासन ने पुष्टि की है कि 7 फरवरी 2026 से भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ पूरी तरह हटा दिया गया है। यह टैरिफ पिछले साल अगस्त में लगाया गया था, जब अमेरिका ने आरोप लगाया था कि भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल आयात कर रहा है। अब भारत ने अमेरिका को आश्वासन दिया है कि वह सीधे या परोक्ष रूप से रूस से तेल की खरीद नहीं करेगा और अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों की खरीद बढ़ाएगा। 

साथ ही अगले 10 वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी मजबूत किया जाएगा। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में भारत फिर से रूस से तेल खरीदता है, तो यह अतिरिक्त टैरिफ दोबारा लगाया जा सकता है।

अंतरिम व्यापार समझौते की बड़ी बातें

दोनों देशों द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, इस समझौते का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाना, रोजगार सृजन करना और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना है। इसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया।
  • भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टैरिफ आज से समाप्त।
  • लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर का अमेरिकी बाजार भारतीय MSMEs, किसानों और मछुआरों के लिए खुलेगा।
  • निर्यात बढ़ने से लाखों नए रोजगार, विशेषकर महिलाओं और युवाओं के लिए अवसर पैदा होंगे।
  • जेनेरिक दवाएं, हीरे-जवाहरात और विमान के पुर्जों पर टैरिफ शून्य (0%) होगा।
  • टेक्सटाइल, रेडीमेड कपड़े, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और चुनिंदा मशीनरी क्षेत्रों को बड़ा फायदा।
  • भारत ने गेहूं, चावल, मक्का, दूध, पनीर, पोल्ट्री और अन्य संवेदनशील कृषि उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखा।
  • भारत अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर टैरिफ घटाएगा, जिनमें मेवे, फल, सोयाबीन तेल, शराब और पशु आहार शामिल हैं।
  • डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले GPUs और अन्य तकनीकी उपकरणों में सहयोग बढ़ेगा।
  • दोनों देश मिलकर वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करेंगे।
  • अगले 5 वर्षों में भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान, कीमती धातुएं, तकनीकी सामान और कोकिंग कोल खरीदेगा।

इस ढांचे को तुरंत लागू किया जाएगा और पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में काम जारी रहेगा।

क्या है अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा?

व्हाइट हाउस और भारत सरकार द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि यह अंतरिम फ्रेमवर्क दोनों देशों के बीच चल रही व्यापक व्यापार वार्ताओं का अगला चरण है। यह पहल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई बातचीत का परिणाम है। इस समझौते का लक्ष्य एक संतुलित, पारदर्शी और पारस्परिक लाभ वाला व्यापार तंत्र बनाना है, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती मिले।

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत ने अपने संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा है। मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल, तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी गई है। सरकार का कहना है कि इससे भारतीय किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

किन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

इस समझौते से कई प्रमुख भारतीय उद्योगों को सीधा लाभ होगा, जिनमें शामिल हैं:

  • टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स – अमेरिका में निर्यात बढ़ेगा।
  • चमड़ा और फुटवियर – टैरिफ कटौती से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
  • प्लास्टिक और रबर उत्पाद – नए बाजार अवसर मिलेंगे।
  • ऑर्गेनिक केमिकल्स और होम डेकोर – निर्यात में तेजी आएगी।
  • हस्तशिल्प और मशीनरी – छोटे और मध्यम उद्योगों को फायदा।
  • जेनेरिक दवाएं – अमेरिका में भारतीय फार्मा कंपनियों की पहुंच बढ़ेगी।
  • हीरे-जवाहरात और विमान के पुर्जे – टैरिफ शून्य होने से व्यापार बढ़ेगा।

आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?

इस समझौते से भारतीय आम नागरिकों पर कई तरह से सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है:

  • निर्यात बढ़ने से नौकरियां बढ़ेंगी।
  • MSMEs को फायदा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
  • टेक और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश बढ़ेगा।
  • भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा मिलेगी।

हालांकि, अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खुलने से कुछ क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, लेकिन सरकार का दावा है कि घरेलू उद्योगों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

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