AI डीपफेक वीडियो के झांसे में आए रिटायर्ड कर्मचारी, 27 लाख रुपये की ठगी

मध्य प्रदेश के खरगोन में AI डीपफेक निवेश वीडियो के झांसे में आकर रिटायर्ड कर्मचारी ने 27 लाख रुपये गंवाए। पुलिस ने साइबर सतर्कता की अपील की।

मध्य प्रदेश के खरगोन में एक रिटायर्ड कर्मचारी AI आधारित डीपफेक वीडियो के जरिए साइबर ठगी का शिकार हो गया। यूट्यूब पर निवेश से जुड़े फर्जी वीडियो देखकर उसने करीब 27 लाख रुपये निवेश कर दिए, जिसके बाद ठगी का खुलासा हुआ।

खरगोन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग का एक गंभीर मामला मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में सामने आया है। यहां एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने सोशल मीडिया पर प्रसारित फर्जी निवेश वीडियो पर भरोसा कर अपनी जीवनभर की बचत गंवा दी। साइबर ठगों ने मशहूर हस्तियों के नाम और चेहरे का इस्तेमाल कर निवेश पर भारी मुनाफे का लालच दिया और लाखों रुपये ठग लिए।

डीपफेक वीडियो के जरिए रचा गया निवेश का जाल

खरगोन जिले के बड़वाह क्षेत्र में रहने वाले सेवानिवृत्त विद्युत विभाग कर्मचारी अवध बिहारी शर्मा साइबर ठगी का शिकार हो गए। पुलिस के अनुसार, उन्होंने यूट्यूब पर निवेश और म्यूचुअल फंड से जुड़े कुछ वीडियो देखे, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत अन्य चर्चित हस्तियों के कथित संदेश दिखाए गए थे।

AI डीपफेक वीडियो के झांसे में आए रिटायर्ड कर्मचारी, 27 लाख रुपये की ठगी

दरअसल, ये वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक की मदद से तैयार किए गए थे। वीडियो में कम समय में अधिक मुनाफा और सुरक्षित निवेश का दावा किया गया था, जिससे प्रभावित होकर पीड़ित ने विज्ञापन में दिए गए संपर्क नंबरों पर बातचीत शुरू कर दी।

एक महीने में खाते से निकल गए 27 लाख रुपये

संपर्क होने के बाद ठगों ने खुद को निवेश सलाहकार बताकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष निवेश योजना का प्रस्ताव दिया। धीरे-धीरे विश्वास जीतने के बाद उन्होंने अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा करवानी शुरू की।

करीब एक महीने के दौरान अवध बिहारी शर्मा ने अपने दो बैंक खातों से कुल 27.16 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए। ठग लगातार उन्हें बेहतर रिटर्न और बढ़ते मुनाफे का भरोसा दिलाते रहे। निवेश की प्रक्रिया को विश्वसनीय दिखाने के लिए उन्हें कथित ऑनलाइन निवेश विवरण भी दिखाया गया।

अतिरिक्त पैसे मांगने पर खुली ठगी की परत

रकम जमा होने के बाद भी साइबर अपराधियों की मांग खत्म नहीं हुई। उन्होंने पीड़ित को बताया कि उनके निवेश खाते में निर्धारित सीमा से अधिक राशि दिखाई दे रही है और यदि धन का स्रोत स्पष्ट नहीं किया गया तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इस दबाव में आकर शर्मा ने अतिरिक्त धन की व्यवस्था करने का प्रयास शुरू किया। जब उन्होंने एक परिचित व्यक्ति से आर्थिक मदद मांगी और पूरी जानकारी साझा की, तब उन्हें एहसास हुआ कि वे एक सुनियोजित साइबर धोखाधड़ी का शिकार बन चुके हैं। इसके बाद उन्होंने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

ऐसे काम करते हैं डीपफेक निवेश घोटाले

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ठग सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म पर लोकप्रिय नेताओं, अभिनेताओं या उद्योगपतियों के नकली AI वीडियो प्रसारित करते हैं। इन वीडियो में गारंटीड रिटर्न और कम समय में दोगुना-तीन गुना मुनाफा मिलने का दावा किया जाता है।

इसके बाद निवेशकों को फर्जी वेबसाइट या ऐप पर पंजीकरण कराया जाता है और नकली डैशबोर्ड के माध्यम से काल्पनिक लाभ दिखाया जाता है। जब निवेशक पैसे निकालने की कोशिश करता है तो टैक्स, वेरिफिकेशन या प्रोसेसिंग शुल्क के नाम पर और रकम मांगी जाती है। अंततः ठग संपर्क तोड़ देते हैं और निवेशक अपनी जमा पूंजी गंवा बैठता है।

पुलिस ने जारी की सावधानी की सलाह

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी निवेश योजना पर केवल सोशल मीडिया वीडियो या ऑनलाइन विज्ञापन देखकर भरोसा न करें। निवेश करने से पहले संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट, पंजीकरण और वैधता की जांच अवश्य करें।

विशेषज्ञों का कहना है कि AI और डीपफेक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में डिजिटल सतर्कता पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गई है। किसी भी योजना में असामान्य रूप से अधिक और गारंटीड मुनाफे का दावा दिखाई दे तो उसे संदेह की नजर से देखना चाहिए और तुरंत सत्यापन करना चाहिए।

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