अजमेर में यौमे आशूरा पर ताजिये का जुलूस, हाईदौस के दौरान तलवारबाज़ी और तोप के प्रदर्शन से कई लोग घायल

अजमेर में यौमे आशूरा पर अंदरकोट क्षेत्र में हाईदौस के दौरान तलवारबाजी और हैरतअंगेज करतब हुए। जुलूस में कई लोग घायल हुए, पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली।

अजमेर में यौमे आशूरा के मौके पर अंदरकोट क्षेत्र में हाईदौस खेला गया। इस दौरान तलवारों और ढोल-नगाड़ों के बीच हैरतअंगेज करतब हुए, जिसमें कई लोग घायल हो गए। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच पूरे आयोजन की वीडियोग्राफी कराई।

अजमेर: राजस्थान के अजमेर शहर में यौमे आशूरा के मौके पर धार्मिक परंपराओं और जुलूस के दौरान हुए हाईदौस ने इस बार बड़े आयोजन का रूप ले लिया। अंदरकोट क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम में ताजिये, डोले शरीफ और पारंपरिक रस्मों के बीच कर्बला की जंग की याद को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया। इस दौरान कई जगहों पर ढोल-नगाड़ों की गूंज और तलवारों के करतब देखने को मिले, जबकि कुछ प्रतिभागियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई।

अंदरकोट में ताजिये और डोले शरीफ की भव्य सवारी

अजमेर के Ajmer के अंदरकोट क्षेत्र में यौमे आशूरा के अवसर पर बड़ी संख्या में अकीदतमंद एकत्र हुए। यहां ताजियों और डोले शरीफ की सवारी निकाली गई, जिसमें धार्मिक आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

दिन भर चले इस आयोजन में लोग कर्बला के शहीदों की याद में मातम, कलाम और फातेहाख्वानी करते नजर आए। झालरा और अन्य स्थानों पर ताजियों को पारंपरिक तरीके से “सैराब” भी किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने शहीदाने कर्बला को श्रद्धांजलि दी।

हाईदौस के दौरान तलवारबाज़ी और हैरतअंगेज करतब

अंदरकोट में आयोजित मुख्य हाईदौस कार्यक्रम इस आयोजन का सबसे आकर्षक और संवेदनशील हिस्सा रहा। इसमें प्रतिभागियों ने तलवारों के साथ हैरतअंगेज करतब दिखाए और कर्बला की ऐतिहासिक जंग के दृश्यों को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत किया।

इस दौरान ढोल-नगाड़ों की तेज़ आवाज़ और भीड़ की मौजूदगी में माहौल काफी उत्साहपूर्ण लेकिन तनावपूर्ण भी दिखाई दिया। कुछ प्रतिभागियों द्वारा किए गए जोखिम भरे करतबों के चलते कई लोग घायल हो गए, जिन्हें मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।

प्रशासन की ओर से सुरक्षा और तलवारों की व्यवस्था

इस आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे। जानकारी के अनुसार, आयोजन के लिए प्रशासन की ओर से लगभग 100 तलवारें उपलब्ध कराई गईं, जिनका उपयोग केवल हाईदौस के दौरान प्रतीकात्मक प्रदर्शन के लिए किया गया।

अजमेर में यौमे आशूरा पर ताजिये का जुलूस, हाईदौस के दौरान तलवारबाज़ी और तोप के प्रदर्शन से कई लोग घायल

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद इन तलवारों को प्रशासन द्वारा वापस जब्त कर लिया जाता है। आयोजन स्थल पर पुलिस बल और वॉलंटियर्स की भारी तैनाती भी की गई थी ताकि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

वीडियोग्राफी और मेडिकल टीम की तैनाती

पूरे हाईदौस और जुलूस कार्यक्रम की निगरानी के लिए पुलिस प्रशासन ने वीडियोग्राफी कराई, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की रिकॉर्डिंग और समीक्षा की जा सके।

इसके अलावा, मौके पर मेडिकल टीम भी तैनात रही ताकि घायल हुए लोगों को तुरंत उपचार दिया जा सके। भीड़भाड़ और पारंपरिक तलवारबाजी के कारण कुछ प्रतिभागियों को चोटें आईं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद सुरक्षित स्थान पर भेजा गया।

धार्मिक भावनाओं के बीच कर्बला की याद

इस पूरे आयोजन का मुख्य उद्देश्य कर्बला की ऐतिहासिक घटना और हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करना रहा। प्रतिभागियों ने इस अवसर पर फातेहाख्वानी की और धार्मिक कलाम पढ़े।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कर्बला के संदेशों पर प्रकाश डालते हुए त्याग, बलिदान और इंसानियत की सीख को याद किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु नमाज और तकरीर के बाद ताजियों के पास एकत्र हुए और श्रद्धांजलि अर्पित की।

ताजिया जुलूस और देर रात तक चले आयोजन

ताजिये की सवारी गुरुवार देर रात 12 बजे के बाद शुरू हुई, जो कई घंटों तक जारी रही। इसके बाद ताजियों को झालरा और अन्य निर्धारित स्थलों पर “सैराब” किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने धार्मिक रस्में पूरी कीं।

दिनभर चले इस आयोजन में विभिन्न समुदायों की भागीदारी देखी गई और प्रशासन ने पूरी व्यवस्था को नियंत्रण में रखने का प्रयास किया।

वॉलंटियर्स की भूमिका और भीड़ नियंत्रण

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में वॉलंटियर्स की तैनाती की गई थी। इन वॉलंटियर्स ने लाठियों और हॉकी स्टिक्स के माध्यम से भीड़ को व्यवस्थित रखने में मदद की, ताकि जुलूस सुचारू रूप से आगे बढ़ सके।

हालांकि, हाईदौस के दौरान अचानक बढ़ी भीड़ और तलवारबाज़ी के कारण कुछ स्थानों पर अव्यवस्था की स्थिति भी बनी, जिसे बाद में नियंत्रित कर लिया गया।

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