जर्मनी के मैगडेबर्ग क्रिसमस मार्केट में 2024 में हुए हमले के दोषी तलिब अल-अब्दुलमोहसेन को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस हमले में छह लोगों की मौत हुई थी और करीब 300 लोग घायल हुए थे।
बर्लिन: जर्मनी की एक अदालत ने 2024 में हुए मैगडेबर्ग क्रिसमस मार्केट हमले के दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस हमले में छह लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 300 लोग घायल हुए थे। अदालत ने आरोपी तालिब अल-अब्दुलमोहसन को हत्या का दोषी मानते हुए यह अधिकतम सजा दी है।
यह मामला जर्मनी में पिछले वर्षों के सबसे गंभीर सार्वजनिक हमलों में से एक माना जा रहा है, जिसने देश की सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
भीड़भाड़ वाले क्रिसमस मार्केट में हुआ था हमला
यह हमला 20 दिसंबर 2024 को जर्मनी के मैगडेबर्ग शहर के क्रिसमस मार्केट में हुआ था। उस समय बाजार में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और त्योहार का माहौल था। लोग जिंजरब्रेड, मल्ड वाइन और अन्य क्रिसमस स्टॉल्स का आनंद ले रहे थे।
प्रॉसिक्यूटर के अनुसार, आरोपी ने एक किराए की BMW कार से भीड़भाड़ वाले बाजार में लगभग 48 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चलाई। यह हमला स्थानीय समयानुसार शाम 7:02 बजे हुआ और लगभग एक मिनट चार सेकंड तक चला, लेकिन इस छोटे समय में भारी तबाही मच गई।
छह लोगों की मौत, सैकड़ों घायल
इस दर्दनाक हमले में छह लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक 9 वर्षीय बच्चा और 45 से 75 वर्ष की उम्र की पांच महिलाएं शामिल थीं। इसके अलावा करीब 300 लोग घायल हुए, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई गई थी।
हमले के बाद पूरे जर्मनी में शोक की लहर फैल गई थी और क्रिसमस समारोहों की सुरक्षा को लेकर व्यापक बहस शुरू हो गई थी।
आरोपी की गिरफ्तारी और जांच
घटना के तुरंत बाद आरोपी तालिब अल-अब्दुलमोहसन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। जांच एजेंसियों ने इस मामले को गंभीर आपराधिक हमला मानते हुए गहन जांच शुरू की।
अभियोजकों ने अदालत में कहा कि आरोपी ने यह हमला पहले से योजनाबद्ध तरीके से किया था और उसने अकेले ही इसे अंजाम दिया। हालांकि, जांच में यह सामने आया कि वह किसी बड़े वैचारिक नेटवर्क का हिस्सा नहीं था। प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, आरोपी का मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत था और वह किसी गंभीर राजनीतिक या वैचारिक एजेंडे को आगे नहीं बढ़ा रहा था।
मानसिक स्थिति और विशेषज्ञों की रिपोर्ट
मामले की सुनवाई के दौरान मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अदालत को बताया कि आरोपी में नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के लक्षण पाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, उसे लगातार ध्यान और मान्यता पाने की तीव्र आवश्यकता रहती थी। अभियोजकों ने यह भी कहा कि “इस आरोपी की सबसे बड़ी चिंता केवल वह स्वयं था और आज भी वही स्थिति बनी हुई है।
आरोपी के दावे और बयान
सुनवाई के दौरान तालिब अल-अब्दुलमोहसन ने दावा किया कि वह जर्मन अधिकारियों के साथ अपने विवादों और मतभेदों से परेशान था। उसने यह भी कहा कि वह सऊदी अरब की महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी से नाराज था। हालांकि, उसने हमले के वास्तविक घटनाक्रम पर बहुत कम बात की और अधिकांश सवालों का सीधा जवाब देने से बचता रहा।
सऊदी अरब से जर्मनी तक का सफर
रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी सऊदी अरब के होफुफ शहर से संबंध रखता है और शिया समुदाय से आता है। उसने 2016 में जर्मनी में शरण (asylum) प्राप्त की थी। उस समय उसने दावा किया था कि उसे सऊदी अरब में अपने विचारों और आलोचनात्मक रुख के कारण उत्पीड़न का खतरा था।
जर्मन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उसका कार्यकाल पहले एक मानसिक स्वास्थ्य क्लिनिक में भी रहा है, जहां वह नशा और मानसिक रोगों से जुड़े मरीजों के साथ काम करता था। बाद में उसे काम के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
चरमपंथ और सोशल मीडिया गतिविधियां
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया पर इस्लाम विरोधी विचारों और दक्षिणपंथी विचारधाराओं के प्रति सहानुभूति व्यक्त करता था। उसने जर्मनी की “Alternative for Germany (AfD)” पार्टी के कुछ विचारों का समर्थन भी किया था। इन तथ्यों के बावजूद अभियोजकों ने कहा कि यह हमला किसी स्पष्ट वैचारिक या संगठित आतंकवादी योजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि व्यक्तिगत कारणों से प्रेरित था।
अदालत का निर्णय और सजा
अदालत ने सभी सबूतों और गवाहियों के आधार पर तालिब अल-अब्दुलमोहसन को हत्या का दोषी करार दिया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
जर्मनी के कानून के अनुसार, आजीवन कारावास का मतलब है कि दोषी व्यक्ति को बहुत गंभीर मामलों में लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है, और कुछ परिस्थितियों में ही रिहाई संभव होती है। अभियोजन पक्ष ने इसे न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हमले के बाद जर्मनी में सार्वजनिक आयोजनों, विशेषकर क्रिसमस मार्केट्स की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे। सरकार ने सुरक्षा बढ़ाने और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर निगरानी मजबूत करने के लिए कई कदम उठाने का आश्वासन दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप में ऐसे सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा जोखिम हमेशा बना रहता है, इसलिए तकनीकी निगरानी और पुलिस उपस्थिति को और मजबूत करना जरूरी है।








